20 फीट लंबे रथ में सवार होकर निकलेंगे भगवान जगन्नाथ:आज निकलेगी यात्रा, तुपकी से दी जाएगी सलामी; भव्य रूप से मनाया जाएगा गोंचा पर्व

जगदलपुर5 महीने पहले
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रथ को सजाया जा रहा है। - Dainik Bhaskar
रथ को सजाया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर में शुक्रवार को बड़े ही धूम-धाम से गोंचा पर्व मनाया जाएगा। भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बलभद्र तीन अलग-अलग रथ में सवार होकर नगर की परिक्रमा करेंगे। जगदलपुर में आज शाम रथ यात्रा निकाली जाएगी। जिसकी सारी तैयारी हो गई है। इस बार भी 4 चक्कों वाला एक नया रथ का निर्माण किया गया है। जिसमें भगवान जगन्नाथ विराजेंगे। साथ जी दो पुराने रथ में देवी सुभद्रा और बलभद्र के देव विग्रहों को विराजित किया जाएगा।

जगदलपुर के सीरासार चौक के सामने से रथ यात्रा निकाली जाएगी जो गोल बाजार होते हुए शहर की परिक्रमा करते वापस चौक पहुंचेगी। जिस समय रथ निकाला जाएगा, उस समय परंपरा अनुसार तुपकी से रथ को सलामी दी जाएगी। यह परंपरा करीब 615 साल से चली आ रही है। इधर, जिन-जिन स्थलों से रथ यात्रा गुजरेगी वहां रथ का स्वागत करने के लिए लोगों की भीड़ भी उमड़ेगी। इस बार दूर-दराज से लोग रथ यात्रा देखने के लिए पहुंच रहे हैं।

20 फीट लंबा बनाया गया है रथ
बस्तर में 27 दिनों तक चलने वाले गोंचा पर्व के लिए रथ निर्माण का काम बहुत जल्दी पूरा किया गया है। यह रथ 20 फीट लंबा और करीब 14 फीट चौड़ा बनाया गया है। साल की लकड़ी से रथ का निर्माण काम किया गया है। वहीं सालों से चली आ रही परंपरा के अनुसार गोंचा पर्व के लिए रथ बनाने की जिम्मेदारी बेड़ा उमरगांव के ग्रामीणों की होती है। इस बार भी इसी गांव के कारीगरों ने ही रथ का निर्माण किया है।

यह है मान्यता
360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के सदस्यों ने बताया कि, महाराजा पुरुषोत्तम देव ने पुरी से लाए गए जगन्नाथ स्वामी के विग्रहों को बस्तर में स्थापित किया था। जिसके बाद से जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर यहां भी गोंचा पर्व की शुरुआत की गई थी। यह परंपरा 615 साल पुरानी है।

साथ ही बस्तर में ‘तुपक’ शब्द से ही ‘तुपकी’ शब्द बना है। यहां रथयात्रा गोंचा पर्व के दौरान भक्त रंग-बिरंगी तुपकी लेकर रथ को सलामी देते हैं। शहर में हजारों की संख्या में आदिवासी तथा गैर आदिवासी भक्त जुटते हैं। जिससे नगर में मेले सा माहौल बना रहता है। बस्तर का गोंचा पर्व किसी एक समुदाय का नही बल्कि बस्तर में निवास कर रहे विभिन्न धर्म एवं जातियों के लोगों का पर्व है।

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