लंपी वायरस:मवेशियों को टीका लगाने किसानों से ‌2-2 सौ रुवए लिए, पैसे देने से मना किया तो बीमार मवेशियों का नहीं किया इलाज

बेमेतरा24 दिन पहले
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ग्राम रवेली में निरीक्षण के दौरान ब्लॉक पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ.अनिल  शुक्ला को समस्या बताते हुए क्षेत्र के किसान व पशु पालक। - Dainik Bhaskar
ग्राम रवेली में निरीक्षण के दौरान ब्लॉक पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ.अनिल शुक्ला को समस्या बताते हुए क्षेत्र के किसान व पशु पालक।

जिले में लंपी वायरस के लक्षण मिलने के साथ ही मवेशियों का इलाज तो शुरू कर दिया गया है। जहां बीमारी की रोकथाम के लिए पशु चिकित्सक गांवों में पहुंचकर मवेशियों को टीका लगा रहे हैं। लेकिन बेरला ब्लॉक के ग्राम कठिया सेक्टर के अंतर्गत आने वाले गांवों में मवेशियों का इलाज करने व टीका लगाने के नाम पर सहायक पशु चिकित्सक क्षेत्र अधिकारी के द्वारा किसानों से प्रति मवेशी 200 रुपए लिया जा रहा है।

जबकि शासन से मवेशियों को टीका लगाने के लिए विभाग को नि:शुल्क गोट पॉक्स और दवा दिया जाता है। खास बात ये है कि पैसे नहीं देने पर मवेशियों को टीका नहीं लगाया जा रहा है। न ही बीमार मवेशियों का इलाज किया जा रहा है। समय पर इलाज नहीं मिलने से मवेशियों में लंपी वायरस फैलता जा रहा है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। मजबूरी में किसान मेडिकल से दवा खरीदकर स्वंय इलाज करवा रहे है।

ग्राम रवेली के किसान प्रेम साहू ने बताया कि एक बछड़े में लंपी वायरस के लक्षण दिखने पर इलाज कराने सहायक पशु चिकित्सक क्षेत्र अधिकारी सुभाष टंडन को बुलाया था। मवेशी को टीका लगाने व दवा देने के बाद 200 रुपये ले लिया गया। मना करने पर चिकित्सक ने कहा कि बेमेतरा से इतना दूर आया हूं। पेट्रोल खर्च के लिए पैसा लगेगा। कहकर किसान के हाथ से पैसे छिन लिए।

ग्रामीणों ने बताया कि चिकित्सक को देख गांव के कुछ लोग और पहुंचे थे। बीमार मवेशी का इलाज करने कहे जाने उनके द्वारा पैसे की मांग की गई। पैसा नहीं देने पर किसानों के मवेशियों का इलाज नहीं किया गया। ब्लॉक पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल शुक्ला ने बताया कि किसानों से मवेशियों के इलाज के नाम पर पैसे लेने की शिकायत मिली है। मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

6 मवेशियों की हो चुकी है मौत, लंपी के मिले थे लक्षण
किसानों ने बताया कि झलमला, कठिया में भी किसानों से मवेशी के इलाज के नाम पर भी पैसे लिया गया है। बीते महीने कठिया में सैंपल जांच में पहुंचे अधिकारियो ने खामियां पाए जाने पर सहायक पशु चिकित्सक अधिकारी सुभाष टंडन को को फटकार भी लगाई थी। साथ ही बीमारी की रोकथाम के लिए किसानों को दवा बांटने के निर्देश दिए थे। उसके बाद भी किसानों को पर्याप्त मात्रा में दवा नहीं बांटा गया। टीकाकरण में लेट होने के कारण अब मवेशियों में बीमारी ज्यादा फैल गई है।

जिसके कारण 3 टीम गठित कर लगातार उपचार व टीका लगाया जा रहा है। रवेली के रामलाल साहू ने बताया कि उनके 5 मवेशियों में लंपी के लक्षण मिले थे। मेडिकल से दवा लेकर इलाज कराया। उन्होंने बताया कि समय पर इलाज नहीं होने के कारण मवेशियों के शरीर में बड़े- बड़े फोड़े पड़ने लगे है। गांव में लंपी के लक्षण वाले करीब 6 मवेशियों की मौत हो चुकी है। बावजूद डॉक्टर बुलाने के बाद भी इलाज करने नहीं पहुंच रहे है। पहुंच भी जाते है तो पैसे मांगते है।

3 टीम गठित, गांवों में शिविर लगा कर रहे टीकाकरण
समय पर इलाज नहीं मिलने से ग्राम कठिया में एक मवेशी की मौत हो गई थी। मवेशी में लंपी के लक्षण पाए गए थे। यहां मवेशियों को टीका नहीं लगाया जा रहा था। मामले में भास्कर ने 3 नवंबर के अंक में प्रमुखता से खबर प्रकाशित किया था। अधिकारियों को फटकार लगने पर कठिया में टीकाकरण के लिए 3 टीम गठित की गई। इनमें झलमला में सहायक पशु चिकित्सक क्षेत्र अधिकारी एलके नेताम, करही में कैलाश साहू, रांका में सुभाष टंडन, कठिया में एसके मंडावी की ड्यूटी लगाई गई।

लंपी प्रभावित जेवरा, कठिया सेक्टर के करीब 20 गांवों में 9 नवंबर लगातार गठित टीम के चिकित्सकों के द्वारा टीकाकरण किया जाएगा। सहायक पशु चिकित्सक क्षेत्र अधिकारी सुभाष टंडन ने बताया कि पहले दिन रांका में 200, झलमला में 72, कठिया 200 मवेशियों को टीका लगाया गया। इस तरह करीब 472 मवेशियों को टीका लगाया गया। वही दूसरे दिन रविवार को जेवरा, कठिया, रांका, किरीतपुर, रवेली, करही, देवरी में मवेशियों को टीका लगाया गया।

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