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परिवहन की रफ्तार धीमी:तिरपाल के भरोसे खुले में ही पड़ा है 21 लाख क्विंटल धान, बारिश होने से नुकसान तय

बालोद19 दिन पहले
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  • खाद्य मंत्री ने कहा- बारिश से धान खराब होने पर समिति होगी जिम्मेदार

परिवहन की रफ्तार धीमी होने का नतीजा है कि 126 केंद्रों में खुले में तिरपाल के भरोसे 21 लाख 30 हजार क्विंटल धान पड़ा है। बारिश होने से नुकसान तय है, क्योंकि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं है। करहीभदर केंद्र में यह स्थिति है कि बारदाना भीग रहा है, ऐसे में नमी के कारण नुकसान होने का अनुमान है। समिति वाले तिरपाल के भरोसे हैं, वही कह रहे हैं कि परिवहन में देरी का खामियाजा हर साल भुगतना पड़ता ही है क्योंकि तमाम व्यवस्था के बाद भी बारिश होने पर धान भीग जाता है। नुकसान होने का अनुमान है इसलिए शासन, प्रशासन भी सख्त हो गया है कि यह स्थिति न आए। तभी मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच बुधवार को कलेक्टर जनमेजय महोबे ने सांकरा (क) के धान खरीदी केन्द्र का आकस्मिक निरीक्षण किया था। धान के रखरखाव में लापरवाही पर कलेक्टर ने समिति प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश संबंधित अफसर को दिए हैं। कलेक्टर ने धान संग्रहण केन्द्र जगतरा का भी निरीक्षण कर प्रभारी को निर्देशित किया कि वे सभी स्टेक को केप कव्हर से ढंक कर रखें, ताकि बारिश से धान को नुकसान न हो।

एक दिसंबर से 29 जनवरी तक धान की हुई खरीदी
इस सीजन जिले के 126 केंद्रों में एक दिसंबर से 29 जनवरी तक 52 लाख क्विंटल से ज्यादा धान खरीदी हुई है। लेकिन धान का उठाव देरी से शुरू हुआ है। यह स्थिति अब तक बनी हुई है। तिलोदा, सिर्री, हल्दी, मेड़की, बालोद, पाररास, कांदुल, गुरुर सहित अन्य केंद्रों में हजारों क्विंटल धान जाम है। आलम यह है कि वेबसाइट खराब होने का हवाला देकर जिला सेवा सहकारी मर्यादित बैंक के अफसर व कम्प्यूटर ऑपरेटर किन केंद्रों में कितना धान पड़ा है, यह बता नहीं पा रहे हैं।

किसी भी स्थिति में खरीदा गया धान खराब नहीं होना चाहिए: खाद्य मंत्री
राज्य सरकार की ओर से खाद्य मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों से खरीदे गए धान को बारिश में नुकसान होने पर संबंधित समिति को जिम्मेदार माना जाएगा। बेमौसम बारिश और धान के रखरखाव को लेकर खाद्यमंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि धान खरीदी की सभी व्यवस्थाओं के लिए समितियों को पूरे पैसे का भुगतान किया जा चुका है। लिहाजा किसी भी स्थिति में किसानों से खरीदा गया धान खराब नहीं होना चाहिए। अगर कुछ नुकसान होता है तो समिति को जवाबदेह माना जाएगा और सारा नुकसान समिति के खाते में जाएगा। वहीं धान खरीदी के परिवहन और रखरखाव की संपूर्ण जवाबदारी जिले के अनुसार दी गई है। विभाग के सेक्रेटरी व अन्य सभी अफसरों को निर्देश दिये गए हैं कि धान के रखरखाव और परिवहन की व्यवस्था को हर हाल में दुरुस्त रखा जाए। खाद्य विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे धान संग्रहण एवं खरीदी केन्द्रों का निरीक्षण कर स्टेक को केप कव्हर से ढंकना निश्चित कराएं।

हमेशा समिति वालों से नुकसान की भरपाई
सेवा सहकारी समिति जिला संघ के अध्यक्ष ठाकुरराम चंद्राकर ने कहा कि परिवहन में देरी के लिए जिम्मेदार अफसरों के बजाय हमेशा समिति वालों से नुकसान की भरपाई शासन, जिला प्रशासन स्तर पर की जाती है। पिछले साल भी ऐसा ही हुआ था। अगर परिवहन निर्धारित समय में किया जाता तो यह स्थिति ही नहीं आती। लेकिन केंद्र में रखे हुए धान के परिवहन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

मिलर्स धान का उठाव कर रहे: शशांक सिंह
डीएमओ शशांक सिंह ने कहा कि केंद्रों से मिलर्स लगातार धान का उठाव कर ही रहे हैं। शासन के आदेशानुसार ही टीओ व डीओ जारी होने के बाद धान का उठाव होता है। धान उठाव अरवा मिलर्स का खत्म हो गया है, अब उसना मिलर्स धान उठा रहे हैं। केंद्रों में धान को सुरक्षित रखने कहा गया है।

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