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शॉर्टेज का खेल:110 केंद्रों में 45 हजार क्विंटल धान शॉर्टेज, मिलान किया तो सच उजागर, 11.25 करोड़ का नुकसान

बालाेदएक महीने पहले
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  • 4 समिति प्रबंधकों व अध्यक्षों के खिलाफ एफआईआर, नुकसान वसूलने सख्ती

जिले के 110 खरीदी केंद्रों में लगभग 45 हजार क्विंटल धान शॉर्टेज यानी कम पाया है। जिसकी कीमत प्रति क्विंटल 2500 रुपए के हिसाब से 11 करोड़ 25 लाख रुपए है। इस नुकसान की भरपाई समिति को ही करना होगा। जिसकी पुष्टि जिला खाद्य विभाग, डीएमओ, सेवा सहकारी समिति ने की है। इधर नुकसान की भरपाई के लिए जिला प्रशासन, डीएमओ सख्त हो गई है। यहां तक 4 समिति प्रबंधकों व अध्यक्षों के खिलाफ एफआईआर भी हो चुका है। समिति भुगतान नहीं करेगी तो यह सिलसिला जारी रह सकती है। अभी डीएमओ मिलान कर रहे है कि किस समिति में कितनी मात्रा में धान कम पाया गया है। हाल ही में खाद्य नियंत्रक (फूड कंट्रोलर) डॉ. एचएल बंजारे, डीएमओ शशांक सिंह, जिला खाद्य अधिकारी विजय किरण ने भरदाकला, सिर्री, कुसुमकसा, गुरूर समिति के प्रबंधक और अध्यक्ष के खिलाफ थाने में शिकायत की थी। जिसके बाद पुलिस ने धारा 409 के तहत मामला दर्ज किया। भास्कर ने पड़ताल कर धान खरीदी में शॉर्टेज के खेल को समझा तो कई तथ्य सामने आए। विभाग के रिकॉर्ड में शॉर्टेज यह: धान खरीदी के बाद इसे वापस करना होता है। अगर इससे कम दे रहे हो तो जो बचत में रहेगा, वह शॉर्टेज के दायरे में आएगा।

नुकसान की भरपाई सभी को मिलकर करनी चाहिए
समिति वालों ने कहा कि राज्य बनने के बाद नुकसान की भरपाई के लिए ऐसा दबाव पहले किसी ने नहीं बनाया। खरीदी बंद होने के बाद भी 1-2 माह तक धान का परिवहन होता रहा। अनुबंध अनुसार कार्य हो रहा। शासन, प्रशासन, डीएमओ की ओर से 72 घंटे न सही एक माह में भी परिवहन हो जाता तो ऐसी नौबत नहीं आती। नुकसान की भरपाई सभी को मिलकर करनी चाहिए। हर समिति को शॉर्टेज धान के एवज में 7 से 25 लाख रु. तक भरपाई करना होगा। अधिकांश समिति कार्रवाई के डर से भुगतान कर रहे हैं। समिति वाले तभी राहत की सांस लेंगे जब विभाग से भौतिक सत्यापन के बाद स्पष्ट होगा और कमीशन राशि खाते में आएगी।

केंद्रों में 17% नमी में धान की खरीदी करते हैं
खरीदी केंद्र में 17% नमी में किसान से 40 किलो प्रति कट्टा धान खरीदते हैं। फिर इसे केंद्र में रखते हंै। यहां से फड़ या राइस मिलर्स ले जाते है तब धर्मकांटा में दोबारा तौल होता है तब वजन कम आता है, प्रति कट्टा में एक से दो किलो कमी आती है, जो बढ़ती जाती है। जिसे शॉर्टेज में शामिल किया जाता है।

इन केंद्रों के खिलाफ एफआईआर किए हैं

  • भरदाकला सोसायटी में एक हजार 371.12 क्विंटल धान शॉर्टेज पाया गया।
  • सिर्री सोसायटी में कुल 413.03 क्विं. धान शॉर्टेज पाया गया।
  • कुसुमकसा सोसायटी में एक हजार 329 क्विंटल, गुरूर में 643.10 क्विंटल धान शॉर्टेज पाया गया।

जानिए इसके लिए नियम क्या है और हुआ क्या
अनुबंध अनुसार किसानों से धान खरीदी के बाद 72 घंटे में परिवहन कराना होता है। चाहे तो मिलर्स को दें या फड़ में ले जाए। लेकिन इस बार परिवहन में देरी हुई और तय समय में खरीदे गए धान का वजन अब कम आ रहा है। ऐसा होना स्वाभाविक भी है क्योंकि 17 प्रतिशत नमी में धान खरीदी हुई थी। समिति अध्यक्षों के अनुसार पहले खरीदी के एक माह बाद भी परिवहन होता था तो 5-10 क्विंटल धान शॉर्टेज होता था। जिसकी भरपाई कर देते थे फिर शासन की ओर से कमीशन राशि मिलने के बाद मैनेज कर लेते थे। लेकिन इस बार धान शॉर्टेज के एवज में लाखों रुपए देना पड़ रहा है।

भुगतान करना होगा
सेवा सहकारी समिति संघ के जिलाध्यक्ष ठाकुरराम चंद्राकर ने बताया कि जिलेभर में 45 हजार क्विंटल धान शॉर्टेज बताया जा रहा है। कार्रवाई कर रहे हैं। मजबूरी है इसलिए भुगतान तो करना ही होगा। अधिकारियों की गलती का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। परिवहन में देरी हुई है। इसकी वजह से पूरी व्यवस्था गड़बड़ा गई।

विभागीय जांच जरूरी है
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग कर्मचारी संघ के अध्यक्ष धीरेंद्र देवांगन, महासचिव नंदकिशोर साहू ने बताया कि मार्कफेड द्वारा खाता मिलान के बाद समिति स्तर पर हुई धान शॉर्टेज राशि की बैंक अपने स्तर जांच करती है। फिर कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई फिर दोषी पाए जाने पर संबंधितों से राशि वसूली जैसी कार्रवाई होती है।

समिति अध्यक्ष बोले- परिवहन में देरी नुकसान होगा ही
जिलाध्यक्ष ठाकुर राम, बेलमांड अध्यक्ष मणिकांत बघेल, करहीभदर के देवधर साहू ने बताया कि प्रत्येक केंद्र में धान शॉर्टेज हुआ है। अनुबंध पत्र अनुसार 72 घंटे में धान का परिवहन करना होता है। 17 प्रतिशत नमी में खरीदे हैं तो परिवहन में देरी होने से बाद में कमी तो आएगी ही। शॉर्टेज धान को गबन बताकर अधिकारी एफआईआर करवा रहे हैं। परिवहन समय पर हो तो शॉर्टेज की नौबत ही नहीं आएगी। सरकार को सूखत मानना था लेकिन समिति अध्यक्ष व प्रबंधक को इसके लिए जिम्मेदार मानकर भरपाई करवा रहे हैं। बारिश होने से अल्टी-पल्टी हुआ है फिर धान का उठाव 5-6 महीने में हुआ है।

सीधी बात
शशांक सिंह, डीएमओ

सवाल - समिति वाले कह रहे अनुबंध के तहत 72 घंटे में धान परिवहन की जिम्मेदारी आपकी है?
- पॉलिसी है, खाद्य नीति है, स्पष्ट उल्लेख है कि डीएमओ, मार्कफेड परिवहन नहीं करती है तो समिति खुद पंजीयन करके यह करा सकती है, 30-40 हजार क्विंटल परिवहन भी की है।
सवाल - केंद्रों में कितना धान शॉर्टेज हुआ?
- मिलान हो रहा है, वास्तविक आंकड़ा अभी बता नहीं सकते, अभी 73-74 का मिलान हो गया, उसमें 5 का शॉर्टेज आ रहा।
सवाल - पहले विरोध नहीं होता था, अब क्यों?
-नियमानुसार ही विभागीय प्रक्रिया से सब कर रहे हैं, विरोध कर समिति वाले याचिका लगाने हाईकोर्ट गए थे, जो खारिज हो गया

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