हमारे सिस्टम में फफूंद है:कोविड-19 से जिले में अब तक 451 की हुई मौत, प्रदेश के रिकॉर्ड में अभी भी 396 दर्ज; डेथ ऑडिट के बाद भी मौत के आंकड़े स्पष्ट नहीं

बालोद4 महीने पहले
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कोरोना की चपेट में आने वाले जिन संक्रमितों की मौत हुई, उनके परिजनों को शासन की ओर से अनुदान सहायता के तहत 50 हजार रुपए देने का निर्णय लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट से निर्देश मिलने के बाद राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव रीता शांडिल्य ने कलेक्टर को पत्र भेजकर विभागीय प्रोसेस कंपलीट कर मृतक संक्रमितों की जानकारी मांगी है।

जिसके बाद जिला स्तर पर विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है। अफसर रिकॉर्ड खंगाल रहे है, कि किस ब्लॉक में कितनी मौत हुई है। लेकिन मौतों के आंकड़ों में अब तक संक्रमण बरकरार है। दरअसल जिला स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में जिले के 451 संक्रमितों की मौत कोरोना से होने की पुष्टि की गई है। जबकि राज्य स्वास्थ्य विभाग(संचालक स्वास्थ्य सेवाएं) की रिपोर्ट में मौतों का आंकड़ा 396 है। लिहाजा 55 मौतों का अंतर है। स्थानीय अफसरों का कहना है कि जब कोरोना से मौतें हो रही थी, तब रिकॉर्ड व जरूरी जानकारी राज्य हेड कार्यालय भेज देते थे। अब अंतर कैसे आ रहा है, यह बता नहीं सकते। इधर कोविड से मौत के बाद अस्पताल से मृत्यु प्रमाण पत्र मिला लेकिन कोरोना का जिक्र नहीं होने से मुश्किलें बढ़ गई है।

कोरोना ने ली परिवार के मुखिया की जान
1. ग्राम खुरसुल की अनूपा बाई (51) की मौत 27 अप्रैल को घर में होने के बाद बेटा नरेंद्र(15) व बेटी मूर्ति ठाकुर(18) अनाथ हो गए है। 15 साल पहले पिता की मौत हुई थी।

2. खप्परवारा निवासी भुनेश्वर प्रसाद(43) की मौत 12 अप्रैल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुई थी। परिवार में अब पत्नी शकुन व दो छोटे बच्चे हीना (13) व मोनिका (9) बचे है।

3. टिकरी अर्जुन्दा के चंद्रप्रकाश देशमुख (43) की मौत 19 अप्रैल को हुई थी। अब कोई कमाने वाला नहीं है। बेटी हिमांशी(13) व तनीषा (16) को भविष्य की चिंता सताने लगी है।

जरूरत पड़ने पर अस्पताल से दिए गए मृत्यु प्रमाण पत्र को आवेदन के साथ अटैच करेंगे
जिला मुख्यालय से साढ़े 3 किमी दूर ग्राम मेड़की निवासी अभिषेक श्रीवास्तव (26) की मौत कोरोना सहित अन्य बीमारियों से 20 सितंबर 2020 को हुई थी। मां माधुरी श्रीवास्तव ने बताया कि जिला अस्पताल से मृत्यु प्रमाण पत्र मिला तो है लेकिन कोरोना का उल्लेख नहीं किया गया है। जरूरत पड़ने पर आवेदन के साथ इसी को अटैच करेंगे।

विभाग की ओर से जारी निर्धारित आवेदन पत्र के जरिए परिजनों को प्रस्तुत करना होगा दावा
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी पत्र में उल्लेख किया गया है कि कोविड-19 एक अभूतपूर्व आपदा है। पिछले डेढ़ साल में वायरस के प्रभाव से मृतकों की संख्या में वृद्धि हुई है। यह महत्वपूर्ण है कि विशिष्ट आपदाओं के लिए समय पर और प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए राज्य आपदा मोचन निधि के तहत पर्याप्त निधि उपलब्ध हो। कोविड-19 से मृत व्यक्तियों के परिजनों को राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 में निहित प्रावधान अनुसार अनुदान सहायता नहीं दी जाएगी। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा कोविड-19 से मृत प्रति व्यक्ति के लिए 50 हजार रुपए निर्धारित है। जिसे राज्य आपदा मोचन निधि के अंतर्गत उपलब्ध कराई जाएगी। जारी पत्र में कहा गया है कि संबंधित परिवार विभाग द्वारा जारी निर्धारित आवेदन पत्र के माध्यम से दावा प्रस्तुत करेंगे। इस दौरान आवेदक के पास कोविड से मृत्यु से संबंधित आधिकारिक प्रमाण-पत्र होना अनिवार्य है।

  • परिजन- मौत के बाद अस्पताल से मृत्यु प्रमाण पत्र मिला लेकिन कोरोना का जिक्र तक नहीं
  • तहसील कार्यालय में आवेदन व कोविड संबंधित प्रमाण पत्र जमा करने पर मिलेगा 50 हजार रुपए
  • राजस्व परिपत्र 6-4 नहीं बल्कि राज्य आपदा मोचन निधि के अंतर्गत राशि देने आदेश जारी

आवेदन के बाद 30 दिन के भीतर भुगतान
शासन ने स्पष्ट कर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए), जिला प्रशासन को जिम्मेदारी दी है कि वे मृत व्यक्तियों के निकटतम संबंधी, आवेदक को अनुदान राशि आधार लिंक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) की प्रक्रिया के माध्यम से भुगतान करेंगे एवं अनुदान सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया सरल तथा आवश्यक दस्तावेज जमा करने के 30 दिनों के भीतर पूरी करनी है।

तहसील कार्यालय में जमा होगा आवेदन
प्रत्येक तहसील कार्यालय तथा जिला कार्यालय में कार्यालयीन समय में एवं नगर पालिका क्षेत्र के जोन मुख्यालय में भी आवेदन प्राप्त करने के लिए समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए है। जिला प्रशासन की ओर से जल्द ही निर्धारित समय तय कर अफसरों को आवेदन लेने, वेरिफिकेशन, मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। जिसके बाद प्राप्त सभी आवेदनों को कलेक्टर जनमेजय महोबे स्वयं की निगरानी मे जाँच एवं सत्यापन करेंगे।

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