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परेशानी:जमीन विवाद के 529 मामले लंबित, मरने-मारने की बन गई है स्थिति

बालोद3 महीने पहले
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  • जिम्मेदार कह रहे सिस्टम ही ऐसा, निराकरण करने समय का बंधन नहीं
  • बिखर रहा परिवार, करहिभदर में सरपंच की हत्या के बाद भी नहीं चेता प्रशासन

जिले के बालोद, गुरूर, गुंडरदेही, डौंडी और डौंडीलोहारा तहसील व एसडीएम कार्यालय(कोर्ट) में सालभर में 2300 से ज्यादा जमीन संबंधित मामले आते है। किसी में विवाद की स्थिति रहती है तो किसी में आपसी सहमति से बंटवारा हो जाता है। जिस पर विवाद की स्थिति रहती है, उसका निराकरण होने में समय लग जाता है, कई मामले में लोग थाना पहुंचकर आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाते है। वर्तमान में बालोद ब्लॉक क्षेत्र के 79, डौंडी, डौंडीलोहारा के 300, गुंडरदेही के 150 कुल 529 मामले पेंडिंग है। यह अनुमानित न्यूनतम आंकड़ा विभागीय अफसरों के अनुसार ही है। जिसका निराकरण अब तक नहीं होने के सवाल पर अफसरों का कहना है कि समय का बंधन नहीं है, क्योंकि प्रोसेस में समय लग ही जाता है। सिस्टम ही ऐसा है। किसी आवेदन का निराकरण एक माह के अंदर हो जाता है तो किसी का एक साल तक का समय भी लग जाता है। यह अफसरों का तर्क है लेकिन हमारा कहना है क्या समय सीमा का बंधन नहीं है तो आप इसे लंबा ही खीचेंगे, जैसा कि करहिभदर वाले प्रकरण में हुआ, यदि यह समय रहते न्यायालय में निपट जाता तो हत्या जैसी परिणति देखने को नहीं मिलती। ऐसे ही मामले हैं जिनका समय पर निराकरण होना चाहिए या शासन को एक ऐसा आदेश जारी करना चाहिए जिसमें ऐसे मामलों के निराकरण के लिए समय सीमा निर्धारित हो। लेकिन जमीन संबंधित मामले का निराकरण नहीं होने के कारण दुखद परिणाम भी सामने आ चुके है। इसका ध्यान भी जिम्मेदारों को रखना चाहिए। हाल ही में जमीन विवाद के चलते करहीभदर सरपंच ओंकार साहू की हत्या हुई है। जो अब तक चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि जमीन खरीदी के बाद नाम ट्रांसफर व प्रमाणीकरण का प्रोसेस चल रहा है। निराकरण न होने से लोग एक-दूसरे से उलझ रहे है।

महिला ने कहा जान से मारने की कोशिश कर रहा पति: गुंडरदेही ब्लॉक के ग्राम खुरसुनी की गायत्री बाई ने शुक्रवार को एसपी को आवेदन सौंपकर बताया कि मेरे पति राम अवतार मुझे एवं मेरी छोटी बेटी और पिता मुरहा देवांगन को जान से मारने की कोशिश कर रहे है।
खेती बाड़ी का विवाद थाने पहुंचा: ग्राम रमतरा में विनय साहू व त्रिभुवन साहू के बीच विवाद का मामला अब गुरूर थाने पहुंच गया है। दोनों के बीच मरने-मारने की स्थिति बनी हुई है।

इन मामलों में खून-खराबे तक की नौबत आ चुकी
केस 1.
22 नवंबर को ग्राम कचांदुर में दादी की जमीन को लेकर उपजे विवाद में धान कटा रहे जयप्रकाश साहू (35) पर उनके चचेरे भाई राजेन्द्र साहू उर्फ राजू ने टंगिया से प्राणघातक हमला कर दिया था।

केस 2. जून 2019 में जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर ग्राम लाटाबोड़ के खेत में पति के साथ काम कर रही महिला की तीन महिलाओं ने जमीन विवाद के कारण पिटाई कर दी थी। बालोद थाने में शिकायत की गई थी।

जिम्मेदारों से भास्कर का सवाल- जमीन विवाद के कितने मामले, निराकरण कब तक

  • बालोद एसडीएम आरएस ठाकुर ने कहा कि जमीन से जुड़े 500 से ज्यादा मामले सालाना आते है। कुछ मामले ऐसे होते है जो सिविल में जाते है, वही निराकरण होता है। फिलहाल जमीन विवाद सहित अन्य 79 मामलों का निराकरण नियमानुसार किया जा रहा है। आपसी सहमति होने पर निराकरण तत्काल हो जाता है।
  • बालोद टीआई जीएस ठाकुर ने कहा कि जमीन विवाद के मामले तो आते है लेकिन कितने, यह रिकॉर्ड देखकर ही बता पाएंगे। आवेदन मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
  • डौंडीलोहारा तहसीलदार आरआर दुबे ने कहा कि जमीन बंटवारा व इससे जुड़े 400 से ज्यादा मामले हर साल आते है। अधिकांश विवादित होते है। तभी तो मामला यहां तक पहुंचता है। जिसका नियमानुसार निराकरण करते हैं।
  • गुंडरदेही तहसीलदार अश्वन कुमार पुशाम ने कहा कि सालभर में जमीन से जुड़े 550 या इससे ज्यादा आवेदन आते है। लगभग 150 आवेदन लंबित है। जिसका नियमानुसार निराकरण किया जा रहा है।
  • अर्जुन्दा टीआई कुमार गौरव साहू ने कहा कि जमीन विवाद संबंधित शिकायत आने के बाद तत्काल निराकरण कर लिया जाता है।
  • डौंडीलोहारा एसडीएम ऋषिकेश तिवारी ने कहा कि जमीन विवाद के जितने मामले लंबित है, उनके निराकरण के लिए हर 3 या 6 माह में समीक्षा की जाती है। अधिकतम समय सीमा 6 माह के अंदर निराकरण हो जाए। यह प्रयास करते है। आपसी सहमति है तो विवादित नहीं है। ऐसे मामलों का निराकरण जल्द होता है।
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