यह शून्य शुभ है, एक भी एक्टिव केस नहीं:16 माह बाद कोरोना मुक्त हुआ बालोद, अब तक 4.42 लाख सैंपल जांच में मिले 27239 पॉजिटिव

बालोद20 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
200 बेड वाले कोविड हॉस्पिटल में वेंटिलेटर व सभी बेड खाली हैं। - Dainik Bhaskar
200 बेड वाले कोविड हॉस्पिटल में वेंटिलेटर व सभी बेड खाली हैं।
  • 452 मौतों के बाद अब सुकून

कोरोना की चपेट में 10 दिन पहले आने वाले बालोद व डौंडीलोहारा ब्लॉक के दो लोग बुधवार को रिकवर हुए। इसके साथ ही बालोद जिले ने कोरोना पर बड़ी जीत हासिल कर ली है। प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बालोद दुर्ग संभाग का दूसरा व प्रदेश का 7वां कोरोना मुक्त जिला है। जहां एक्टिव केस नहीं है।

यह सुखद स्थिति आने में 16 माह लगा। जिला कोविड हॉस्पिटल में वेंटिलेटर समेत सभी 200 बेड खाली हो गए हैं। विभाग के अनुसार जिला सहित सभी ब्लॉक मुख्यालयों के 12 कोविड सेंटरों के सभी 1126 बेड खाली है। डौंडी ब्लॉक के कोकान गांव में कोरोना का पहला मरीज 14 मई 2020 को मिला था। 16 महीने में 4 लाख 42 हजार 785 सैंपल जांच में 27 हजार 239 लोग संक्रमित होने और इनमें से 452 लोगों की मौत के बाद अब खुशियों को शून्य आया है। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. शिरीष सोनी ने बताया कि जिले में 5 लाख 16 हजार 429 (86%) लोगों को पहली व 2 लाख 25 हजार 867 (38%) को दूसरी डोज लग चुकी है।

26 हजार 787 लोगों ने कोरोना को हराया
संक्रमित होने वाले 26 हजार 787 लोग स्वस्थ होकर डिस्चार्ज होकर सामान्य जिंदगी जी रहे हैं। सीएमएचओ डॉ. जेपी मेश्राम ने कहा कि अभी की तरह आने वाले समय में भी सतर्क रहेंगे तो तीसरा लहर दस्तक ही नहीं देगी।

प्रदेश का यह जिला कोराेनामुक्त
राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बालोद के अलावा कबीरधाम, गौरेला-पेंड्रा, सरगुजा, बलरामपुर, नारायणपुर, बीजापुर में भी कोरोना के एक्टिव केस नहीं है।

ये 3 फार्मूले, जिसके जरिए कोरोना को दी मात
फार्मूला 1: इस साल अप्रैल-मई में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच कलेक्टर जनमेजय महोबे ने टीकाकरण पर जोर दिया। टीका लगवाने वाले लोगों से अपील की कि प्रोटोकॉल का पालन करें। अफसरों ने संक्रियता दिखाई। दूसरे राज्यों से आने वालों की कोविड जांच की गई।
फार्मूला 2: जब केस व संक्रमण बढ़ रहे थे, तब शादी समारोह कार्यक्रम में शामिल होने वालों की संख्या पहले 10 और बाद में 20 व 50 लोग तय की गई। इसमें भी सभी की कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव होना अनिवार्य किया गया था। इससे संक्रमण की रोकथाम में मदद मिली।
फार्मूला 3: जिले में कोरोना के शंकास्पद मरीजों को कोविड रिपोर्ट आने के पहले ही दवा दी गईं, क्योंकि जांच रिपोर्ट आने में 4 से 5 दिन लग रह थे। फायदा यह हुआ कि लोगों को अस्पताल जाने की नौबत नहीं आई।

खबरें और भी हैं...