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सांकेतिक चक्काजाम:सड़क पर बैठे कांग्रेसी, 5 मिनट में ही लग गया जाम

बालोदएक महीने पहले
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  • प्रदर्शन }एक साल में पेट्रोल 18.61 रु. डीजल 20.75 रु. सिलेंडर 165 रु. तेल 70 रु. महंगा, असर- एक परिवार पर हर माह 550 रु. से ज्यादा का बोझ
  • महंगाई को लेकर कार्यकर्ताओं ने किया सांकेतिक चक्काजाम, कहा- मोदी सरकार हर मोर्चे पर रही विफल

एक तरफ कोरोना के चलते कुछ माह पहले लगे लॉकडाउन के चलते लोगों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। वहीं अब तक इससे लोग उबर नहीं पाए है और दूसरी ओर बढ़ती महंगाई से भी परेशान हो रहे हैं। दरअसल एक साल में ही पेट्रोल प्रतिलीटर 18.61 रु. डीजल 20.75 रु. महंगा हो गया है। गैस सिलेंडर 165 रु. व तेल की कीमतों में भी 70 से 75 रु. तक इजाफा हुआ है। जिसके कारण एक परिवार पर हर माह न्यूनतम 550 रुपए से ज्यादा का आर्थिक भार बढ़ गया है।

इसी महंगाई के मुद्दे पर शुक्रवार को कांग्रेसियों ने नेशनल हाइवे 930 दल्ली चौक बालोद सहित सभी ब्लॉक मुख्यालय में 5 मिनट तक सांकेतिक चक्काजाम कर केंद्र सरकार पर भड़ास निकाली। इस दौरान बालोद में जाम की स्थिति बनी। गंतव्य स्थान जाने लोगों ने दूसरे रास्ते का सहारा लिया। कांग्रेस भवन में एकत्रित होने के बाद कांग्रेस के पदाधिकारी व कार्यकर्ता पैदल जय स्तंभ चौक, घड़ी चौक होकर दल्ली चौक पहुंचे। जहां केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर बैठकर सांकेतिक चक्काजाम किया। कांग्रेसियों ने कहा कि बढ़ रही महंगाई के लिए केंद्र सरकार ही जिम्मेदार है। इस दौरान वाहनों की सड़क पर लंबी कतार लग गई। बाइक व कार सवार शार्टकट मार्ग से गाड़ी निकालते नजर आए। यातायात विभाग के जवान व्यवस्था दुरूस्त करते दिखे।

हर माह हो रही बढ़ोतरी: एक साल पहले 90 रुपए में मिलने वाला सोयाबीन तेल अब 160 में बिक रहा
एक साल के अंदर सोयाबीन, मूंगफली, सरसों का तेल 60 से 75 रुपए तक महंगा होने से हर घर का बजट गड़बड़ा गया है। हर माह तेल की कीमत में बढ़ोत्तरी हो रही है। कोरोना महामारी से पहले से लेकर 2020 जून में सोयाबीन तेल का दाम 90 से 95 रुपए किलो था, जो अब बढ़कर 160 रुपए तक पहुंच गया यानी एक किलो पर सीधे 70 रुपए का इजाफा। सिर्फ तेल ही नहीं पेट्रोल, डीजल, गैस सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोत्तरी होने से लोगों को आर्थिक व मानसिक संकट से जूझना पड़ रहा है। भास्कर टीम ने आम लोगों, गृहणियों, व्यापारियों, पंप संचालकों, मैनेजरों, गैस एजेंसियों से चर्चा कर बढ़ती महंगाई के चलते बजट पर क्या असर पड़ रहा और दाम बढ़ने की वजह और आगे क्या की स्थिति जानी तो कई तथ्य सामने आए। इन दिनों दुकानों में जब लोग तेल का रेट पूछ रहे है तो दुकानदार बता रहे हैं कि टीन (कनस्तर) में भरा 15 किलो सोयाबीन तेल 2250 रुपए, मूंगफली 2600-2700, सरसो तेल 2900-3000 तक के आसपास मिल जाएगा। वहीं चिल्हर में प्रति किलो के हिसाब से और महंगा पड़ेगा।

आप ऐसे समझें एक साल में ही महंगाई का कहर

  • सोयाबीन तेल का दाम प्रति किलो पिछले साल मार्च से जून तक 90-95 रुपए तक था। जो अब 160-165 रुपए में मिल रहा है। एक साल में 70 रुपए की बढ़ोत्तरी हुई।
  • सरसों तेल का दाम प्रति किलो पिछले साल मार्च से जून तक 120-125 रुपए तक था। जो अब 195-200 रुपए में मिल रहा है। एक साल में 75 रुपए की बढ़ोत्तरी हुई।
  • मूंगफली तेल का दाम पिछले साल मार्च से जून तक 175-180 रुपए तक था। जो अब 195-200 रुपए में मिल रहा है। एक साल में 25-30 रुपए की बढ़ोत्तरी हुई।
  • मायने व असर क्या- जिले की जनसंख्या 10 लाख से ज्यादा है। औसत 3 लाख से ज्यादा परिवारों पर महंगाई का भार पड़ रहा है। अधिकांश परिवार दुकानों में पहुंचकर तेल ले जाते है।

पेट्रोल और डीजल के दाम शतक की ओर
पेट्रोल- शुक्रवार को बालोद में प्रति लीटर पेट्रोल का दाम 95.94 रुपए रहा। एक साल पहले यानी 18 जून 2020 को दाम 77.33 रुपए था यानी तब से अब तक पेट्रोल प्रतिलीटर 18.61 रुपए महंगा हो गया।
डीजल- शुक्रवार को प्रति लीटर डीजल का दाम 95.69 रुपए रहा। एक साल पहले दाम 74.97 रुपए था यानी तब से अब तक डीजल प्रतिलीटर 20.75 रुपए महंगा हो गया।
मायने व असर क्या- पंजीकृत डेढ़ लाख से ज्यादा वाहन चलते है। दाम बढ़ने से 50-60 रुपए अतिरिक्त खर्चा करना पड़ रहा है।
गैस सिलेंडर- शुक्रवार को बालोद में 14.2 किग्रा घरेलू गैस सिलेंडर का दाम 890 रुपए रहा। जबकि एक साल पहले 725 रुपए में मिल रहा था। इस तरह 165 रुपए की बढ़ोत्तरी हुई है।
मायने व असर क्या- जिले में 9 गैस एजेंसियां हैं। लगभग 2 लाख उपभोक्ता है। महंगाई बढ़ने से लकड़ियों के भरोसे खाना बनाने कई परिवार मजबूर है। एजेंसियों के अनुसार हर माह 60-65% परिवार रिफिलिंग करा रहे है, बाकी नहीं। उज्जवला योजना पर भी असर पड़ रहा है।

बजट गड़बड़ा गया, घर चलाना अब महंगा
गृहिणी पुष्पा बाई साहू, रूखमणी बाई ने कहा कि लॉकडाउन के बाद तेल, गैस सिलेंडर सहित अन्य खाद्य सामग्री के दाम में बढ़ोत्तरी हुई है। जिनकी जरूरत रोजाना पड़ती है। बजट गड़बड़ा गया है। पहले की तुलना में ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। खपत उतनी हो रही लेकिन दाम बढ़ गए। इसकी वजह से घर खर्च मेंटेन करने में परेशानी हो रही है।

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