खरीफ फसल:समितियों में धान की खरीदी शुरू नहीं काेचिए के पास कम दाम पर बेच रहे

डाैंडीएक महीने पहले
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  • गांवाें में धान की कटाई शुरू, हार्वेस्टर और थ्रेसर से मिंजाई करवा रहे

डाैंडी सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में धान की कटाई शुरू हो गई है। खरीफ की फसल तैयार होने के बाद किसान खेती-किसानी के काम में पूरी तरह जुट गए हैं। किसानों का पूरा दिन खेत खलिहानों में बीत रहा है। किसान मौसम को देखते हुए हार्वेस्टर और थ्रेसर से मिंजाई करवा रहे हैं। किसानाें ने बताया कि मौसम परिवर्तन के डर से धान की कटाई कर सीधे मिंजाई कर रहे हैं। वहीं कुछ बड़े किसान थ्रेसर से मिंजाई करवा रहे हैं।

अर्ली वेरायटी की फसलें पक कर तैयार हो गई हैं। खेतों में रखे धान के करपा को विभिन्न साधनों से खलिहान में रखने की जुगत कर रहे हैं। किसान विपरीत मौसम को देखते हुए डरे हुए हैं। लेकिन धान खरीदी एक दिसंबर से शुरू करने के फैसले के कारण मिंजाई के बाद उसे मौसम की मार से सुरक्षित रखने की चिंता सता रही है। समितियों में सरकारी धान की खरीदी अभी शुरू नहीं हाेने से काेचिए के पास कम दाम पर किसान धान बेच रहे हैं। इस बार क्षेत्र के किसानों को धान की बुआई से लेकर फसल के पकने तक कई बार मौसम की मार झेलनी पड़ी है। धान बुआई के समय किसान अल्पवर्षा से परेशान थे। फसल पक कर तैयार हुआ तो अब माैसम ने चिन्ता में डाल दिया है। मंगलवार काे दोपहर बाद मौसम बिगड़ने से किसान सहमे हुए थे। धान फसल की कटाई के बाद ढ़ुलाई मजदूरों के अलावा गाड़ियों से करने लगे हैं।

मुनाफा कम हो रहा
गांव उकारी, आवराटोला, कामता, सल्हाईटोला, छिंदगांव, मरारटोला, कुसुमटोला, अवारी, लिम्हाटोला, गुदुम, कांडे, कुआंगोदी, झुरहाटोला, सुरडोंगर, भोलाईपारा, कुरूटोला, भर्रीटोला आदि गांव के किसान धान की कटाई कर रहे है। कटाई करने वाले मजदूरों द्वारा साल दर साल मजदूरी बढ़ाए जाने से किसानी लागत बढ़ गई है। क्षेत्र में बमुश्किल मजदूर मिल रहे हैं। क्षेत्र के किसानों ने बताया कि मजदूर शुरूआत में अपने फसल की कटाई कर लेते हैं। इसके बाद ही दूसरे के खेतों में मजदूरी करने जाते हैं। आने वाले समय में मजदूरी में और इफाजा होने की संभावना है।

बढ़ गई परेशानी
डाैंडी के किसान देवेन्द्र मसिया, विकास ठाकुर, पूरन निषाद ने बताया कि धान की सरकारी खरीदी शुरू नहीं हाेने से किसानाें काे परेशानी हो रही है।सरकार ने 1 दिसंबर से धान खरीदी करने का एलान किया है। ऐसे में धान की मिंजाई के बाद उसे सुरक्षित रखना बड़ी समस्या है। अगर खरीदी शुरू हाे जाता ताे किसान खलिहान से सीधे साेसायटी बेचने ले जाते।

खेती में लागत बढ़ गई
सल्हाईटाेला के किसान राेमन रात्रे ने बताया कि साेसायटी में खरीदार नहीं होने के चलते किसान बे-भाव धान बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। बाजार में किसानों को उनकी मेहनत और लागत का पर्याप्त कीमत नहीं मिल रहा है, इसके चलते किसानों का शोषण हो रहा है। किसान मजबूरी में 1400-1500 रुपए क्विंटल के हिसाब से धान बेच रहे हैं, जिससे काफी नुकसान हो रहा है।

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