1994 से जारी है अनूठी परंपरा:दशहरा पर सिरसिदा में तालाब के बीच रावण दहन करने के लिए पुतला तैयार

बालोद2 महीने पहले
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दहन करने के लिए तालाब के बीच रावण का पुतला लगाते हुए लोग। - Dainik Bhaskar
दहन करने के लिए तालाब के बीच रावण का पुतला लगाते हुए लोग।
  • ट्रैक्टर के ट्यूब के सहारे पुतला खड़ा किया

ग्राम अंडा से 7 किलोमीटर सिरसिदा में दशहरा पर रावण दहन जमीन पर नहीं बल्कि तालाब के बीचोंबीच किया जाता हैं। इस दौरान आकर्षक अतिशबाजी भी होती है। सिरसिदा के सरपंच पोषण लाल ठाकुर, अध्यक्ष लवण यादव, सचिव ठाकुरराम, चंदू साहू ने बताया कि 1994 में पहली बार तालाब के बीच रावण का पुतला खड़ा कर जलाया गया। हर बार 35 से 40 फीट का पुतला जलाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि शुरू में शिक्षक सीपी चंद्राकर और स्वास्थ्य कर्मचारी जीआर शर्मा ने साइकिल के ट्यूब पर पानी के भीतर वजन लटका कर 10 फीट के खंभे को बैलेंस करने का जुगाड़ किया था। इसके बाद ट्रैक्टर के ट्यूब के सहारे रावण का पुतला खड़ा किया। अब हर साल उसी तरीके से रावण दहन किया जाता है। यहां सांस्कृतिक लोक कला मंच स्वर गंगा ग्राम छछानपाहरी जिला राजनांदगांव वालों का कार्यक्रम रखा गया है। राकेट से रावण के पुतले की नाभि को भेदते हैं: रावण दहन के पहले तालाब किनारे रामलीला का मंचन होता है। इसके लिए 12 पिलर पर दो मंजिल मंच तैयार किया जाता है। दूसरी मंजिल से भगवान राम की भूमिका निभा रहे पात्र राकेट से रावण के पुतले की नाभि को भेदते हैं, नाभी में पेट्रोल भरा होता हैं। इससे पुतला आसानी से जलने लगता है।

बारिश के दौरान बारूद के सहारे जलाया था पुतला
पोषण साहू ने बताया कि 24 साल में दो बार बारिश के कारण रावण का पुतला बारूद के सहारे जलाया गया। वर्ष 2002 व 2014 में ऐसी स्थिति बनी तो तालाब से उतार कर बारूद के सहारे पुतला दहन किया गया। चंदू साहू ने बताया कि 15 अक्टूबर को दशहरा पर रात में रामलीला के बाद रावण दहन किया जाएगा।

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