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मकर संक्रांति पर विशेष:अनाज देते हैं दान में, बच्चों को भोजन के लिए भटकना न पड़े

बालाेद5 दिन पहले
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  • दल्ली के मातृछाया आश्रम में रहने वाले नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बच्चों के लिए शिक्षा के साथ सुविधाएं भी दे रहे

मकर संक्रांति पर दान में मिले चावल व दाल को दल्लीराजहरा के वनवासी कल्याण मातृछाया आश्रम में रहने वाले नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बच्चों को समर्पण किया जाता है ताकि सालभर भोजन के लिए भटकना न पड़े। यह पहल विभिन्न समाजों व दानदाताओं के सहयोग से विद्या भारती सरस्वती शिक्षा संस्थान कर रही है। कोरोना के कारण वर्तमान में बच्चे आश्रम में नहीं है लेकिन दान देने की परंपरा का निर्वहन व पहल इस बार भी की जाएगी। यहां बस्तर नक्सल क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। बालोद के राजेश्वर राव कृदत्त ने बताया कि जिन स्थानों में शिशु मंदिर स्कूल का संचालन होता है, वहां पढ़ने वालों से एक किलो चावल, एक पाव दाल मंगाते की परंपरा है। स्वेच्छा से कई लोग दान या अन्य माध्यम से सहयोग देते है। जिसे आश्रम में पढ़ रहे बच्चों को समर्पण करते हैं। संचालन समिति के सचिव संजय सोनी ने बताया कि 36 बच्चों की देखभाल की जा रही है। 50 से ज्यादा बच्चे यहां से पढ़कर लाभान्वित हो चुके है।

रहने, खाने, पीने, कपड़े की मुफ्त में व्यवस्था
मातृ छाया जिसकी परिभाषा ही मां की छांव में पलना बढ़ना होता है। इसी की मिसाल आश्रम है। यहां नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र से आए बच्चों की पढ़ाई लिखाई, रहने, खाने, पीने, कपड़े की निशुल्क व्यवस्था के साथ-साथ खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों में बच्चों के विकास के लिए विभिन्न कार्यक्रम के द्वारा उनके प्रतिभाओं को निखारा जाता है।

12वीं तक की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं समाजसेवी
विभिन्न समाजों व दानदाताओं के सहयोग से विद्या भारती सरस्वती शिक्षा संस्थान वनांचल क्षेत्र में नक्सल प्रभावित बच्चों को कपड़े, भोजन, शिक्षा देने सराहनीय निशुल्क निस्वार्थ पहल कर रहे है। संस्थान से जुड़कर बच्चों के हित में लोग दान देकर सहयोग कर रहे है। अरुण, उदय से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई निशुल्क कराई जाती है। मकर संक्रांति गुरुवार को है।

अधिकतर निजी स्कूल देते हैं सहयोग: हिरवानी
जिला संयोजक दीपक हिरवानी, प्रधानाचार्य प्रकाश तिवारी ने बताया कि आश्रम में बच्चों की निशुल्क पढ़ाई व अन्य उनके अन्य खर्चों को लेकर संस्कार शाला, गुरुकुल, महावीर सहित अन्य प्राइवेट स्कूलों से सहयोग मिलता है। अन्न संग्रहण कर वनांचल में नक्सल पीड़ित अनाथ बच्चों को सुरक्षित स्थान में लाकर शिक्षा, भोजन, स्वास्थ्य कपड़े की व्यवस्था की जाती है।

बारहवीं के बाद संबंधित कलेक्टर को सौंप देते हैं
नक्सल प्रभावित क्षेत्र के अनाथ व आर्थिक स्थिति से जूझ रहे परिवार के बच्चों को आश्रम में भर्ती कर 12वीं तक शिक्षा देने के बाद संबंधित जिले के कलेक्टर की अनुशंसा से सौंपने की कार्रवाई होती है।

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