घर-घर जाकर किया सुआ नृत्य:टोकनी में मिट्टी से सुआ बनाकर गली-मोहल्लों में बच्चियों की निकली टोली

जामगांव आरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक

दीपावली नजदीक आते ही गांवाें में ता नारी ना सुआ वो की गीत गूंजने लगी है। केवल महिलाएं ही नहीं छोटी- छोटी बालिकाएं भी साड़ियां पहनकर गांवों के घरों में सुआ नाचने निकल पड़ी है। सुआ नृत्य करने आई महिलाओं को यथायोग्य उपहार देकर ससम्मान विदा कर रही है। लक्ष्मी पूजा 4 नवंबर को है, लेकिन 28 अक्टूबर से सुआ नाचने महिलाएं निकल पड़ी है।

जामगांव आर में बुधवार को शासकीय प्राथमिक व मिडिल स्कूल जामगांव आर की छात्राओं ने घर-घर जाकर सुआ नृत्य करके छतीसगढ़ की संस्कृति को सुरक्षित होने का एहसास कराया। अंचल में इन दिनों बांस की टोकनी में मिट्टी के सुआ बनाकर बच्चियों एवं माताओं की टोलियां घर-घर जाकर सुआ नृत्य कर रहीं। सीनियर सिटीजन कामता प्रसाद साहू डॉ गुलाब साहू, प्राचार्य पूरनलाल बारले, सरपंच राजकुमार ठाकुर, पूर्व सरपंच शैलेन्द्री मंडावी, जालम सेन, कुम्हली उपसरपंच घनेश साहू, जितेंद्र कहते है कि छतीसगढ़ की हर कला मनमोहक है भाईचारा का संदेश देने प्रभावी है।

नृत्य से मिले पैसों से खरीदते हैं पटाखे
स्कूली बच्ची योगिता ठाकुर, गेमेश्वरी ठाकुर, काजल ठाकुर, हेमा यादव, रश्मि ठाकुर, तारिणी यादव, डिलेश्वरी ठाकुर, भावना यादव ,हेमलता ठाकुर ने बताया कि टोली बनाकर घरों और दुकानों में पहुंचकर सुआ नृत्य कर रही हैं। छुट्टी होने के कारण हम लोग सुबह से शाम तक घूम-घूम कर नृत्य तक कर रही हैं। इन पैसों को इकट्ठा करने के बाद हम लोग त्योहार के लिए नए कपड़े, पटाखा, मिठाई के अलावा पुस्तक, कापी भी खरीदेंगे।

खबरें और भी हैं...