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कोरोना से डरना नहीं लड़ना है:आत्मविश्वास के साथ डटकर मुकाबला करना जरूरी, शुरुआती 5-6 दिन तकलीफ होगी लेकिन इससे घबराएं नहीं, मास्क लगाने के साथ रखें सोशल डिस्टेंस, होगी जीत

बालाेद3 दिन पहले
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कोरोना से डरना नहीं लड़ना है... चाहे कोविड सेंटर में रहकर या घर में, क्योंकि किसी भी स्थान में रहें आत्मविश्वास के साथ डटकर मुकाबला करना जरूरी है, वरना इसके बिना हम कमजोर पड़ जाएंगे। शुरूआती 5-6 दिन में जो भी तकलीफ रहेगी, वह होगी। लेकिन इससे घबराना नहीं है। ऐसा कहना है कोरोना को हराकर स्वस्थ हो चुके लोगों का। जो अब पहले की तरह सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं। कोरोना को मात देने के बाद भास्कर से दो लोगों ने अपने अनुभव को साझा कर लोगों से अपील की है कि कोरोना को हल्के में न लें। घबराना बस नहीं है संघर्ष कर कोरोना को हराना है। अगर सर्दी, खांसी, बुखार है तो तत्काल अस्पताल जाकर टेस्ट कराओ या डॉक्टर को सूचित करो। जिससे स्पष्ट हो जाएगा कि पॉजिटिव है कि नेगेटिव। अगर पॉजिटिव है तो घबराने की जरूरत नहीं है। मास्क लगाएं और सोशल डिस्टेंस का पालन जरूर करें।

तकलीफ हुई लेकिन कोरोना को हावी नहीं होने दिया, पूरी सावधानी भी बरती

अर्जुन्दा की वानिकी वासनिक (20) ने कहा कि 14 दिन तक घर के एक कमरे में ही रहकर कोराेना से लड़ती रही लेकिन कभी भी हिम्मत नहीं हारी। तकलीफ हुई लेकिन कोरोना को हावी होने नहीं दी। कोरोना वायरस सीधा फेफड़ा को संक्रमित नहीं करता। पहले बुखार सर्दी खांसी के रूप में नाक में असर रहता है, फिर गले में, 2 से 3 दिन बाद फेफड़े में असर करता है। इस कारण से लापरवाही नहीं करना है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जो दवाई दी जाती है, उसे टाइमिंग में खाकर स्वास्थ लाभ लेना है। दवाई खाने के कारण 5 से 6 दिन सिर दर्द, खांसी, सुस्ती, चक्कर, सांस लेने में थोड़ा तकलीफ रोग प्रतिरोधक अनुसार किसी को ज्यादा किसी को कम हो सकता है। लेकिन बाद में सब धीरे-धीरे सामान्य हो जाता है। बस एक चीज का ध्यान रखना है कि ऑक्सीजन लेवल कम न हो। सामान्य तौर में 98 से 100 के पास ऑक्सीजन लेवल होता है।

सेकंड स्टेज तक पहुंचा, 6 दिन तक बुखार, सर्दी, खांसी, कमजोरी से जूझता रहा
बीएसपी कर्मचारी भेषराम साहू (47) ने कहा कि मुझे सबसे पहले सिर दर्द हुआ, फिर बुखार, शरीर दर्द होने लगा। गले में खराश आई। घर में ही सामान्य दवाई लिया लेकिन ठीक नहीं हो पाया। फिर अर्जुन्दा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चेकअप कराने गया दो बेटे के साथ, जिन्हें बुखार आ रहा था। पहले मलेरिया, टायफाइड टेस्ट हुआ तो रिपोर्ट निगेटिव आई फिर कोविड टेस्ट पॉजिटिव आ गया। कोविड सेंटर पाकुरभाट में पहुंचे। यहां शुरूआत के 5-6 दिन तक तकलीफ रही। बुखार, सर्दी, खांसी दोबारा होने लगा। फिर भी हौसला बरकरार रखा। जब दवाई का डोज कंपलीट हुआ, तब छठवें दिन से रिकवर होने लगा। कमजोरी आ गई थी। किसी भी चीज का गंध महसूस नहीं कर पा रहा था। 9वें दिन से ठीक होने लगा। सेकंड स्टेज में ही यह सब हुआ। थर्ड स्टेज यानी सांस लेने में तकलीफ की नौबत नहीं आई। ठीक हो गया। कोरोना को हल्के में न लें।

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