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हमने दी छूट तो हत्यारा हुआ कोरोना:पहली सौ मौत होने में 133 दिन लगे, फिर और सौ की मौत 102 दिन में तो अब मात्र 14 दिन में ही 108 लोगों ने दम तोड़ दिया

बालोदएक महीने पहले
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  • जिले में संक्रमण से 308 मौत
  • अब कोरोना को सजा देने का सही समय और मौका हमारे हाथ में

स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार रात 9 बजे के बाद कोरोना से 5 लोगों की मौत होने की पुष्टि की है। इसी के साथ ही जिले में मौतों का आंकड़ा 308 तक पहुंच गया है। दूसरी लहर में भयावह स्थिति का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि दो सप्ताह पहले 23 अप्रैल को ही स्वास्थ्य विभाग ने 200 संक्रमितों की मौत होने की पुष्टि की थी यानी मौतों का आंकड़ा 200 से 308 तक पहुंचने में महज 14 दिन ही लगे। पहली 100 मौतें होने में 133 दिन लगे फिर और 100 की मौतें 102 दिन में हुई। अब 108 लोगों ने 14 दिन में ही दम तोड़ा। 29 अगस्त 2020 से 7 मई 2021 तक 308 संक्रमितों की मौत होने की पुष्टि विभाग विभाग ने की है।

कोरोना सहित अन्य बीमारियों से 52% संक्रमित जूझ रहे थे
मृतक संक्रमितों में 52% ऐसे रहे, जिनको बीपी, शुगर, किडनी, हार्ट या अन्य बीमारियां थी। वहीं 48% की मौत की वजह कोरोना ही रही यानी सर्दी, खांसी, बुखार, ब्रेथलेसनेस सांस लेने में तकलीफ के बाद दम तोड़ा। 100 से 200 मौत होने में 102 दिन का फासला रहा। जबकि जनवरी से मार्च तक सिर्फ 34 की मौत हुई थी। इस प्रार माैतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।

मृतकों में 174 की उम्र 60 साल से कम
मृतकों में 60+ के 128(42%) व इससे कम उम्र के 174 लोग(58%) शामिल है। पहली मौत 29 अगस्त 2020 को हुई थी। जब हथौद की महिला ने रायपुर में दम तोड़ा था। जिसके बाद 9 जनवरी 2021 को मौतों का आंकड़ा 100 पहुंचा था यानी 133 दिन में यह स्थिति बनी।

जिले में माहवार मौतें, यहां हुई मौतें
कोविड अस्पताल बालोद में 101 (33%), कोविड सेंटर, सीएचसी, पीएचसी में 45 (15%), 134 (44%) की मौत रायपुर सहित अन्य जिले के अस्पतालों में हुई। होम आइसोलेशन के दौरान या बाद में 14 (5%) संक्रमितों की मौत हुई।

इलाज में देरी
कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद कई लोग इसे हल्के में ले रहे है। अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल पहुंच रहे है, तब तक देरी के चलते मौत हो रही, कई ऐसे भी रहे जिन्हें बेड ही नहीं मिल पाया।

दूसरी लहर में वायरस खतरनाक, निमोनिया हो रहा
पहली की तुलना में दूसरी लहर में वायरस ज्यादा खतरनाक है। इससे निमोनिया भी हो रहा है और यही मौत की वजह बन रही है। लेकिन अधिकांश लोग इससे अनजान है।

ऑक्सीजन लेवल कम होना
ऑक्सीजन लेवल 94 से 99 के बीच होना बेहतर माना जाता है। लेकिन संक्रमितों का लेवल 40-45 तक पहुंच रहा और दम तोड़ रहे। वायरस फैलने के दवा दी जाए तब असरदायक है वरना कोई औचित्य नहीं।

अनदेखी व लापरवाही
गांव हो या शहर, कई लोग सर्दी, खांसी, बुखार, दर्द होने पर कोरोना जांच कराने के बजाय मेडिकल स्टोर्स के दवा के भरोसे घर में ही रहे। कोरोना लक्षण की जानकारी के बाद भी अनदेखी व लापरवाही की।

सीधे फेफड़े पर अटैक कर रहा वायरस
दूसरी लहर में कोरोना वायरस सीधे फेफड़े को संक्रमित कर रहा है। इसलिए सांस लेने में परेशानी हो रही है। ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण 30 से 45 साल के बीच युवाओं ने भी दम तोड़ा।

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