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कोरोना के कारण पैरोल पर हैं बाहर:अब सब अनलॉक; इसलिए खुले में घूम रहे 29 विचाराधीन बंदियों को करें जेल में लॉक

बालोद21 दिन पहले
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  • कारण- संक्रमण का खतरा जेल के अंदर से ज्यादा बाहर है, इनके बाहर रहने से अपराध का खतरा
  • अगस्त-सितंबर तक रहेंगे बाहर, आगे तीसरी लहर की संभावना
  • सच कुछ ऐसा- बालोद जेल के अंदर 110 को रखने की क्षमता लेकिन स्थिति ऐसी कि वर्तमान में हैं 250 बंदी

कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए कोर्ट के आदेश पर बालोद जेल से पहली लहर में पिछले साल 7 साल से कम सजा वाले लगभग 100 विचाराधीन बंदियों को 90 दिन के लिए पैरोल पर छोड़ा गया था। अब हाल ही में जून के अंतिम सप्ताह से अब तक कोरोना की दूसरी लहर में 29 को छोड़ा गया है।

जिसमें से अधिकांश की समय अवधि अगस्त-सितंबर तक समाप्त हो जाएगी। जिसकी पुष्टि जेल प्रशासन ने की है। स्थानीय अफसरों का कहना है कि कोर्ट की ओर से निर्देश अनुसार ही ऐसा किया जा रहा है। दरअसल निर्देश दिए गए है कि कोरोना महामारी को देखते हुए सभी आरोपियों को जेल तक लाने की जरूरत नहीं है।

ऐसे आरोपी जिन्हें अधिकतम सात साल की सजा की संभावना है उन्हें जेल में डालने की जरूरत नहीं है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जेल के अंदर से ज्यादा संक्रमण का खतरा बाहर बरकरार है। ऐसे में जिन आरोपियों को पैरोल पर छोड़ा गया है, जब वह वापस आएंगे तो संभवत संक्रमण लेकर आ सकते हैं।

जिसके जवाब में उपजेलर आरआर मतलाम का कहना है कि कोर्ट के आदेश अनुसार ही 7 साल से कम सजा पाने वाले आरोपियों को छोड़ा गया है, इनमें मारपीट, चोरी के वारदात करने वाले ज्यादा है। वहीं एसपी सदानंद कुमार ने सभी टीआई को जेल से रिहा हुए, निगरानीशुदा बदमाशों को नियमित चेक करने के निर्देश दिए है।

अपराधों में नियंत्रण के लिए मुखबिर, सूचना तंत्र को सक्रिय कर लगातार पेट्रोलिंग करने कहा है। इधर सभी थाना प्रभारियों को सूची भी उपलब्ध कराई जा रही है, कि किस गांव का रहने वाला कौन सा आरोपी, कब छूट रहा है, ताकि उन पर लगातार पैनी नजर रखी जा सकें।

आरोपी महिलाओं को रखने यहां व्यवस्था नहीं

जिले में आपराधिक घटना होने के बाद कोर्ट का फैसला आने के बाद पुरुष आरोपियों को बालोद जेल दाखिल किया जाता है। वहीं महिलाओं को दुर्ग जेल भेजा जाता है, क्योंकि यहां व्यवस्था नहीं है। जिले के कितने आरोपी महिला वहां बंद है और छोड़े गए है, इसकी जानकारी नहीं होने की बातें कहीं जा रही है।

हत्या, दुष्कर्म, डकैती और लूट के आरोपी जेल में ही बंद, मॉनिटरिंग भी कर रहे

जेल प्रशासन के अनुसार बालोद जेल से चोरी, मारपीट, अवैध शराब बिक्री, गाली गलौच जैसे छोटे अपराध में बंद विचाराधीन बंदियों को ही छोड़ा गया है। धारा 302, 363, 376, पॉक्सो एक्ट यानी दुष्कर्म, हत्या जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम देने वाले आरोपियों को नहीं छोड़ा गया है। सभी जेल में ही बंद है।

लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। जानकारी अनुसार बालोद जेल में 110 विचाराधीन बंदियों को रखने की क्षमता है लेकिन वर्तमान में यहां लगभग 250 बंद है। कोर्ट के आदेश अनुसार आगे भी विचाराधीन बंदियों को छोड़ा जा सकता है।

जब तक कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं विचाराधीन बंदी कहलाएंगे आरोपी

बालोद के अधिवक्ता धीरज उपाध्याय ने बताया कि जिन मामलों में कोर्ट का अंतिम फैसला न आया हो और इस अवधि में कोई आरोपी जेल में बंद है तो वह उन्हें विचाराधीन बंदी (अंडर ट्रायल) कहा जाता है। छोटे-छोटे आपराधिक गतिविधियों में बंद विचाराधीन कैदियों को पैरोल या अंतरिम जमानत में एक निश्चित समय में ही छोड़ने के निर्देश दिए गए है।

किसी अपराधी द्वारा खुद के द्वारा किये गए किसी गुनाह की सजा का जेल में एक बड़ा भाग काटने के बाद, अच्छे आचरण की वजह से उसे जेल से अस्थायी रूप से लिए मुक्त किया जाना ही पैरोल कहलाता है।

गंभीर अपराधों में बंद आरोपियों को नहीं छोड़ा

बालोद के उपजेलर आरआर मतलाम ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर ही जून व जुलाई में 29 विचाराधीन बंदियों को छोड़ा गया है, अपराधों की पुनरावृत्ति न हो। इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। गंभीर अपराधों में बंद आरोपियों को नहीं छोड़ा गया है। किसे छोड़ा गया है, इसकी जानकारी संबंधितों को दी गई है।

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