परिवर्तन / कभी सांपों की टोकरी लेकर निकलते थे अब फसल कटाई कर पा रहे हैं रोजगार

Once used to take baskets of snakes, now they are able to harvest jobs
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Once used to take baskets of snakes, now they are able to harvest jobs

  • कोरोना वायरस व लॉकडाउन से बदली सपेरों की जिंदगी जीने की कला

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 05:00 AM IST

बालोद. जिला मुख्यालय से 2 किलोमीटर दूर ग्राम सिवनी में रह रहे सपेरों की जिंदगी कोरोना वायरस के चलते लागू लॉकडाउन में पूरी तरह बदल चुकी है। लगभग 30 वर्ष पहले सिवनी में आकर बसे 18 परिवार रोज सुबह सांपों की टोकरी कांधे पर लेकर अपने परिवार वालों के लिए दाना पानी ढूंढने शहर एवं गांवों की ओर निकल पड़ते थे। उन्हें जो मिल भी मिल जाता था, उससे ही अपना जीवन बिता रहे थे। लेकिन कोरोना के चलते इन सबको परेशानी होने लगी थी। दरअसल लॉकडाउन के कारण कहीं भी मांगने नहीं जा पा रहे थे। 
शासन की ओर से प्रतिमाह मिल रहे राशन से अपना गुजर बसर कर रहे थे। उऩके सामने अब रोजगार की समस्या आ रही थी। जो कभी खेती किसानी को जानते भी नहीं थे वे अब सुबह से शाम तक खेतों में मेहनत कर रोजगार पा रहे हैं। अब हाथों में हंसिया लेकर खेतों में फसल कटाई कर रहे हैं। 

बदल गई दिनचर्या
ग्राम पंचायत सिवनी के सरपंच दानेश्वर सिंन्हा ने बताया कि यह लोग जब से सिवनी में आए हैं, सांप दिखा कर अपना जीवन यापन करते आ रहे हैं। यह इनके पुरखों से आ रहे है। अब इनकी दिनचर्या में बदलाव आ गया। सभी गांव के किसानों के खेतों में काम कर रोजगार पा रहे हैं। पंचायत की ओर से इन्हें शासन की योजनाओं का लाभ दिला रहे हैं।

योजना का मिल रहा लाभ
सपेरा डेरा के प्रमुख रामलाल बताते हैं कि पंचायत के तरफ से हमें सभी सुविधाएं प्राप्त हो रहा है शासन के तरफ से हर महीने चावल मिलता है, पीएम आवास योजना का लाभ भी हमें मिला है। शासन से केवल चावल मिलने से घर नहीं चल पाएगा। इसलिए हम फसल काटने जा रहे हैं। मंगल सिंह ने कहा कि लॉकडाउन होने से हमें नया रोजगार मिला है। 

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