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मौत के मुंह से बचकर निकले कलाकार:कच्चे रास्ते पर हाथियों का झुंड देख स्कूटी सहित खेत में गिरे दो भाई, भागकर बचाई जान

बालोद14 दिन पहले
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  • खल्लारी जा रहे थे रिहर्सल के लिए, हाथियों को सड़क पार करते देख अड़जाल की ओर बढ़े, वहां पहुंचने से पहले मोड़ पर अचानक झुंड को देखा, गाड़ी व वाद्य यंत्र रातभर खेत में पड़े रहे

शनिवार रात 8 बजे गुरामी निवासी दो कलाकार भाई लक्ष्मण गंधर्व और शिव गंधर्व नाच के रिहर्सल में जाते वक्त अड़जाल मोड़ पर हाथियों के झुंड में जा घुसे। बड़ी मुश्किल से खेतों से होकर भागते हुए गुजरा पहुंचे। रात 10 बजे खल्लारी से दूसरे रास्ते से गांव वाले उन्हें लेने पहुंचे। दोनों के हाथ-पैर में चोटें आई है। मौत को सामने देखकर रात भर दोनों भाई बुखार से कांपते रहे। रविवार को घर के लिए निकले। म्यूजिक स्टूमेंट्स, बैंजो, मोहरी व स्कूटी रात भर खेत में ही पड़ा था।

मौत के मुंह से बचकर निकले कलाकार भाइयों की जुबानी, रात में दहशत का मंजर, वन विभाग से मदद तक नहीं मिली

मौत से बस 5 मीटर की दूरी पर थे, लगा दौड़ा-दौड़ा कर रौंद देंगे
पूजा के फूल छग नाचा पार्टी खल्लारी के बैंजो वादक शिव कुमार गंधर्व ने बताया कि सरेखा में आयोजित कार्यक्रम की तैयारी करनी थी। दोनों भाई खाना खा कर घर से निकले थे। हमें हाथी की कोई जानकारी नहीं थी। हर बार की तरह गुजरा की ओर से जा रहे थे। तभी सामने से बाइक सवार ने रोक कर कहा आगे हाथी रोड पर हैं। दूसरे तरफ से चलो। हम अड़जाल के रास्ते घुसे 2 किमी चले ही थे कि अचानक मोड़ में हाथी आ गया। लगभग 20 मीटर की दूरी पर ब्रेक लगाई। लेकिन ऐसा लगा टकरा जाएंगे। इसलिए मैंने खेत की तरफ मोड़ा। दोनों भाई खेत में गिर गए।

जान बचाने के लिए दौड़ना ही एक रास्ता था, बाइक वाला मुड़ कर भागा तो हमें लेने तक नहीं आया
मोहरी वादक लक्ष्मण गंधर्व ने भास्कर को बताया कि वह अपने भाई के पीछे बैठा हुआ था। हाथी के बारे में ही चर्चा चल रही थी और हाथ-पैर डर से फूल रहा था। इत्तफाक से मोड़ में ही हाथी और उसके बच्चे पर लाइट पड़ी। साथ चल रहा बाइक सवार मोड़ कर भाग खड़ा हुआ। हम खेत में गिरे, तब गाड़ी चालू थी। भाई ने कहा भागो। खेत में पानी भरा था। भागने में मुश्किल हो रही थी। हम कपड़ा उतार कर फेंकते गए और दो किमी तक भागते ही गए। तब हमारी जान बच पाई। गांव पहुंचकर दूसरे के फोन से घर व गांव वालों को घटना के बारे में सूचना दी। तब हमें पिकअप वाहन से लेने के लिए मौके पर पहुंचे।

दोनों कीचड़ से सने हुए थे, कपड़े फट गए, खाना तक नहीं खाया
खल्लारी निवासी छत्तीसगढ़ नाचा पार्टी पूजा के फूल के मैनेजर सगरु राम पाड़े ने बताया कि सुबह से गांव में हाथी का बच्चा मिलने से हम सब घबराए हुए थे। रात 9.30 बजे पता चला कि दोनों गंधर्व फंस गए हैं। कोई जाने के लिए तैयार नहीं था। उन्होंने बताया कि ग्राम प्रमुखों ने लगातार वन विभाग के लोगों से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन संपर्क हो नहीं सका। कुछ लोगों के साथ कुसुमकसा की ओर से पहुंचे। दोनों भाई कीचड़ से सने हुए कांप रहे थे। दोनों को खल्लारी लाये। दोनों रात भर सो नहीं पाए। दोनों को सही हालात में देख कर गांव वाले खुश हुए।

बिछड़ा बच्चा दल में पहुंचा, जब तक हाथियों का सही लोकेशन नहीं मिलता तब तक यह गांव संवेदनशील
वन विभाग के अनुसार हाथी का बिछड़ा हुआ बच्चा अपने दल में शामिल हो चुका है। वर्तमान में अड़जाल, जमही, गुजरा, खल्लारी, सलईटोला, पुतरवाही, कुरुभाट, धोबनी सहित आसपास का क्षेत्र संवेदनशील हैं। लेकिन हाथी का दल बालोद-दल्ली मुख्यमार्ग से ज्यादा दूरी पर भी नहीं है इसलिए मुख्य मार्ग के साथ ही तांदुला डैम किनारे स्थित बसे ग्रामीणों को सचेत रहने की जरूरत है।

हाथियों का दल अभी गुजरा के पास: रेंजर नांदुलकर
दल्लीराजहरा रेंजर राजेश नांदुलकर ने बताया कि हाथियों का दल अभी गुजरा के पास में ही है। पिछले साल भी इसी क्षेत्र में लगभग एक महीना तक थे। दिन में जंगलों में आराम करते हैं और रात में भोजन की तलाश में बाहर निकलते हैं। दल्ली मुख्य मार्ग पर आने की संभावना कम हैं क्योंकि ट्रैफिक और गाड़ियों की आवाज से वह इस ओर नहीं आते।

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