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मनमानी:जितना पैसा और प्रभाव, जंगल में उसका उतना ही कब्जा, कोई कार्रवाई नहीं कर रहे अफसर

अंबागढ़ चौकी10 दिन पहले
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  • वन विकास निगम के डिपो, कार्यालय व आवासीय परिसर भी अतिक्रमणकारियों के कब्जे में

वन भूमि पट्टा के एवज में वन विकास निगम का संरक्षित एवं बेशकीमती जंगल इन दिनों औने-पौने दाम में बिक रहा है, जो जितना पैसा लगा रहा है वह जंगल में उतनी जमीन को घेर रहा है। हालात ऐसे हैं कि वन विकास निगम का हेड क्वार्टर मोहला डिपो एवं निगम परिसर तथा मोहला ब्लाक मुख्यालय में मुख्य मार्ग के किनारे स्थित निगम का जंगल व जमीन भी सुरक्षित नहीं है। जानकारी के अनुसार वन विकास निगम के अधिकारी-कर्मचारियों के संरक्षण व आपसी सांठगांठ में जंगल की जमीन को औने-पौने दाम में बेचने का खेल चल रहा है, जो जितना पैसा व प्रभाव लगा रहा है जंगल में उसकी उतनी अधिक जंगल में कब्जा मिल रहा है। वहीं वन भूमि पट्टा के लालच में वन विकास निगम पानाबरस डिवीजन के मोहला पानाबरस, भोजटोला, मिस्प्री, देववाडवी, खड़गांव वन परिक्षेत्र में संरक्षित जंगल अब आबादी व खेतों में परिवर्तित होने लगा है। जंगल जमीन का पट्टा लेने के होड में लोग जंगल पर न केवल कब्जा कर रहे हैं बल्कि वनों की अवैध कटाई कर इसे खेत में बदल रहे हैं।

हेड क्वार्टर परिसर व डिपो भी सुरक्षित नहीं
वन विकास निगम पानाबरस डिवीजन का हेड क्वार्टर, डिपो ब्लाक मुख्यालय मोहला में संचालित है। यह परिसर चौकी-मोहला व गोटाटोला-मोहला मुख्य मार्ग से लगा हुआ है। मेन रोड के किनारे निगम की यह जंगल जमीन लाखों की है और यह वन परिक्षेत्र निगम के कंपार्टमेंट 482 व 483 में आता है। आश्चर्य है कि निगम के हेड क्वार्टर में आधा दर्जन रेंजर, एक एसडीओ व भारी भरकम निगम अमला के मौजूद होने के बाद भी वन विकास निगम का हेड क्वार्टर परिसर व डिपो ही सुरक्षित ही नहीं है। निगम कार्यालय एवं निगम कर्मियों के आवासीय परिसर के आसपास मेन रोड के दोनों किनारे लोगों ने शासकीय जमीन को कब्जा कर झोपड़ी व मकान बना लिया है और अवैध कब्जा का यह सिलसिला रुका नही है बल्कि जंगल में कब्जा और मकान बनाने के खेल जारी है।

घर बैठे ही की जा रही है वनों की सुरक्षा
जिले के मोहला ब्लाक में वन विकास निगम पानाबरस डिवीजन कार्य कर रहा है। वन विकास निगम के एरिया में मोहला के अलावा अंबागढ़ चौकी व मानपुर ब्लाक का भी कुछ वन क्षेत्र शामिल है। निगम का पूरा क्षेत्र 5 रेंज मोहला, खड़गांव, मिस्प्री, भोजटोला, देववाडवी में बटा हुआ है। शिकायत है कि निगम में पदस्थ रेंजर और वन रक्षक घर बैठकर जंगल की सुरक्षा करते हैं और बिना काम के ही हर माह शासन को हजारों की चपत लगा रहे हैं। मोहला व खड़गांव में पदस्थ रेंजर तो जिला मुख्यालय में बैठकर ही जंगल की निगरानी करते हैं। इसी का नतीजा है कि वन भूमि पट्टा प्राप्त करने की होड में जंगल में अवैध कब्जा की बाढ आ गई है और जंगल वन माफिया एवं सागौन तस्करों के कब्जे में है।

झांकने नहीं आते डीएम व अन्य अफसर
वन विकास निगम पानाबरस का डिवीजन कार्यालय राजनांदगांव में स्थापित है। यहां पर डीएम सहित अन्य अधिकारी बैठते हैं। जानकारी के अनुसार विभाग के उच्चाधिकारी निगम क्षेत्र में चल रहे कार्यों व अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के कामकाज की मानिटरिंग के लिए क्षेत्र का भ्रमण व निरीक्षण भी नहीं करते हैं। जिसका नतीजा है कि निगम के कोई रेंजर अपने मुख्यालय में निवास नहीं करते हैं। इसके कारण उनके अधीनस्थ कर्मचारी भी अपने अधिकारियों की तरह मुख्यालय में नहीं रहते हैं। इसका परिणाम है कि निगम एरिया में इन दिनों पट्टों की लालच में जगल जमीन में कब्जा का खेल चल रहा है। शिकायत तो यह भी है कि निगम कर्मचारी अतिक्रणकारियों से मिलीभगत कर जंगल जमीन को औने-पौने दाम में बेच रहे हैं।

कोरोना संक्रमण व बारिश के बाद करेंगे कार्रवाई
आश्चर्य है कि निगम के शासकीय जमीन में आम आदमी ही नहीं शासकीय कर्मचारियों एवं रसूखदार लोगों ने भी कब्जा कर लिया है। पानाबरस के डिप्टी डीएम डी एल उइके ने बताया कि जंगल जमीन में अतिक्रमण की शिकायत मिली है। प्रकरण दर्ज किए गए हैं। कोरोना संक्रमण तथा बारिश के चलते कार्रवाई नही लंबित है।

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