अभी और इंतजार:दो साल में तैयार हाेना था फिल्टर प्लांट, रि-टेंडर व कोरोना की वजह से 3 साल 8 माह बाद भी अधूरा

कवर्धा13 दिन पहले
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शहर में करीब 55 हजार आबादी के पेयजल की जरूरतें पूरी करने के लिए 26.56 करोड़ रुपए की लागत से खैरबना कला में दूसरा वाटर फिल्टर प्लांट तैयार किया जा रहा है। अप्रैल 2018 में निर्माण का ठेका हुआ था। दो साल में यह प्लांट तैयार हो जाना था, लेकिन 3 साल 8 महीने बाद भी काम अधूरा है।

अब काम पूरा होने में 6 महीने और लगने की बात कही जा रहा है। यानी पेयजल के लिए शहरवासियों को 6 महीने इंतजार करना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि फिल्टर प्लांट के लिए दोबारा टेंडर करना पड़ा था। उसके बाद कोरोना की वजह से साल भर काम प्रभावित रहा।

निर्माणाधीन फिल्टर प्लांट के अधूरे काम को पूरा करने के लिए ठेका कंपनी को टाइम एक्सटेंशन (अतिरिक्त मोहलत) देने की तैयारी चल रही है। नगर पालिका में परिषद की आगामी बैठक में टाइम एक्सटेंशन पर चर्चा होगी। नगर पालिका के ईई एमएल कुर्रे का दावा है कि प्लांट का काम 90 फीसदी पूरा हो चुका है।

सिर्फ 10 फीसदी काम शेष है। हकीकत में इससे ज्यादा का काम होना बाकी है। कोतवाली थाने के पास ओवरहेड पानी टंकी का काम पूरा नहीं हुआ है। खैरबना में जहां फिल्टर प्लांट स्थापित, वहां रोटिंग आर्म्स वाली टंकी अधूरी पड़ी है।

फिलहाल मेन पाइप लाइन में वाॅल्व चेंबर बनाए जा रहे

निर्माणाधीन प्लांट से नवनिर्मित 4 पानी टंकियों तक मेन पाइप लाइन लग चुकी है। कॉलोनियों व वार्डों में डिस्ट्रीब्यूशन पाइप भी लगाए जा चुके हैं। लालपुर रोड पर नेत्रालय के पीछे नई कॉलोनियों में पाइप लाइन बिछाई जा रही है। मेन पाइप लाइन में वाॅल्व चेंबर बनाए जा रहे हैं। इसे लेकर एसपी ऑफिस के पास खुदाई भी हुई है। इधर लेटलतीफी की वजह से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है।

कोरोना के कारण एक साल तक काम प्रभावित रहा

जनवरी 2019 में फिल्टर प्लांट का काम रायपुर की मल्टी अर्बन कंपनी ने शुरू किया। उसे भी 2 साल में काम पूरा करना था। टेंडर मिलने के बाद काम शुरू करने में देरी हुई। कोरोना के चलते मार्च 2020 में लाॅकडाउन लग गया। इससे सभी मजदूर अपने घर लौट गए थे और काम बंद पड़ गया। इस तरह करीब 1 साल तक काम प्रभावित हुआ।

{मौजूदा प्लांट से 20 लाख लीटर कम पानी सप्लाई: खैरबना कला में पूर्व में 7.5 एमएलडी क्षमता वाला वाटर फिल्टर प्लांट मौजूद है। अभी इस प्लांट में 40 लाख लीटर पानी शुद्धिकरण कर सप्लाई हो रही है। इससे करीब 45 हजार आबादी को प्रतिदिन 60 लाख लीटर पानी की जरूरत है, लेकिन 20 लाख लीटर कम सप्लाई हो रही है।

निर्माण में देरी, ~4 करोड़ बढ़ी लागत, पूर्व के ठेका कंपनी से वसूले नहीं
निर्माण में देरी के चलते प्रोजेक्ट की लागत 4 करोड़ रुपए तक बढ़ गई है। वाटर फिल्टर प्लांट के लिए 22.96 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली थी। अप्रैल 2018 में इसका टेंडर हुआ था। पूर्व में तापी इंटरप्राइजेस एजेंसी पुणे (महाराष्ट्र) को टेंडर मिला, लेकिन 10 महीने बाद भी काम शुरू नहीं किया। ऐसे में उसका ठेका निरस्त कर दोबारा टेंडर निकाला गया। इस बार लागत 26.56 करोड़ यानि 4 करोड़ रुपए बढ़ गई थी। बढ़ी हुई लागत राशि की वसूली तापी इंटरप्राइजेस एजेंसी से किया जाना था। इसे लेकर नगर पालिका ने शासन को भी चिट्ठी थी, लेकिन रिकवरी नहीं हुई।

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