संक्रमण दर 5.2 प्रतिशत:अल्सर के इलाज के लिए भर्ती थी युवती, चक्कर खाकर गिरी तब जांच में कोरोना निकला, सात दिन बाद दम तोड़ा

बालोद12 दिन पहले
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  • जिले में 5 माह बाद कोरोना से मौत पर भास्कर ने पड़ताल की तो वजह यह सामने आई...

गुंडरदेही ब्लॉक के ग्राम राहुद निवासी 22 वर्षीय कोरोना संक्रमित युवती की मौत भिलाई के शंकराचार्य हॉस्पिटल में हो गई। जिनका अंतिम संस्कार कोविड गाइडलाइन अनुसार किया गया। भले ही मौत दूसरे जिले में हुई लेकिन जान गंवाने वाली हमारे जिले की है। जिसका रिकॉर्ड जिला स्वास्थ्य विभाग ने काउंट किया है। ऐसे में कोरोना संक्रमित युवती का दम तोड़ना, जिलेभर में आम लोगों के अलावा प्रशासनिक अफसरों व अन्य वर्ग के बीच दिनभर चर्चा का विषय बना रहा। ऐसा होना स्वाभाविक भी है क्योंकि 5 माह बाद कोरोना से किसी की मौत हुई। इसके पहले 8 अगस्त को जिले के संक्रमित की मौत हुई थी। भास्कर की पड़ताल में यह सच्चाई सामने आई कि युवती की मौत की वजह सिर्फ कोरोना ही नहीं है बल्कि वह पहले से ही अन्य बीमारी से भी जूझ रही थी। स्वास्थ्य विभाग, अस्पताल प्रबंधन के अनुसार मुंह व गले में अल्सर होने के कारण 30 दिसंबर को युवती अस्पताल में भर्ती हुई थी।

इसी दौरान कमजोरी होने के कारण बेहोश होकर गिर गई। जिसके बाद 5 जनवरी को कोविड जांच की गई थी। जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। जिसके बाद उन्हें आईसीयू वार्ड में भर्ती किया गया था। जहां 12 जनवरी को शाम 7 बजे मौत हुई।अर्जुंदा के सहकारी बैंक में भीड़ से संक्रमण का खतरा गुरुवार को जिले में 66 संक्रमित मिलने की वजह से संक्रमण दर 5.2% रहा।

इस वजह से जिला प्रशासन की ओर से नाइट कर्फ्यू लगाकर स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखने का निर्णय लिया गया है। वहीं सार्वजनिक स्थानों में भीड़ होने से संक्रमण का खतरा बना हुआ है। शुक्रवार को जिला सहकारी केंद्रीय मर्यादित शाखा अर्जुन्दा के सामने लोगों की भीड़ रही। हालांकि अधिकांश लोग मास्क पहने थे।

बालोद ब्लॉक में अब तक 100 संक्रमितों की मौत
युवती के मौत के बाद जिले के मौतों का आंकड़ा 453 पर पहुंच गया है। जो 5 माह से 452 पर स्थिर था। इसके पहले 8 अगस्त 2021 को डौंडी ब्लॉक के एक संक्रमित की मौत हुई थी। इसके बाद से 11 जनवरी तक मौत नहीं हुई थी। अब तक गुंडरदेही ब्लॉक में सबसे ज्यादा 105 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। वहीं बालोद ब्लॉक में 100, डौंडी लोहारा में 98, डौंडी में 75 और गुरूर ब्लॉक में 75 संक्रमितों की मौत हुई है।

एक्सपर्ट व्यू: अल्सर से बहुत कम मौत होती है

आईएमए अध्यक्ष व वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रदीप जैन ने बताया कि अल्सर एक प्रकार का घाव ही है जो पेट, आहार नाल या आंतों की अंदरूनी सतह पर विकसित हो जाते हैं। जिस जगह पर अल्सर होता है उसके आधार पर इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे पेट में होने वाले अल्सर को ‘गैस्ट्रिक अल्सर’ कहा जाता है। उसी तरह छोटी आंत के अगले हिस्से में होने वाले अल्सर को ‘डुओडिनल अल्सर’ कहा जाता है। वैसे तो अल्सर से मौतें कम होती है लेकिन युवती को अन्य बीमारी रही होगी या ब्लड, रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी होने से यह स्थिति बनी होगी। तीसरी लहर में संक्रमित होने वाले अधिकांश लोग भले ही होम आइसोलेट में सुरक्षित है लेकिन विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। टीकाकरण सुरक्षा कवच का काम कर रहा है। अफवाहों पर ध्यान न दें। जरूर टीका लगवाएं। टीका लगने के बाद जो संक्रमित भी हो रहे है, उन पर कोरोना ज्यादा असर नहीं कर रही है।

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