अच्छी पहल / मरीजों की जांच कर रहे ये कोरोना नोडल अफसर

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  • दोनों डॉक्टर हैं, उत्कृष्ठ चिकित्सक का अवार्ड मिल चुका है, कहा- कोरोना से बचने सावधानी जरूरी

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

बालाेद. आज डॉक्टर्स डे पर हम बात कर रहे है डॉक्टर ग्लेड दंपती की। जो 13 साल तक वनांचल क्षेत्र के गांवों में घर-घर पहुंचकर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कर रहे है। डॉ. संजीव ग्लेड को, कोविड अस्पताल, सैंपल की मॉनिटरिंग, कोरोना के लिए जिला नोडल अफसर की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा वे जहां भी जाते है मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं। इनकी पत्नी डॉ. रशिम ग्लेड अर्जुंदा में मेडिकल अफसर हैं। रूटीन की जवाबदारी के अलावा ग्लेड दंपती जनसेवा के अंतर्गत मरीजों की जांच कर मुफ्त में इलाज भी करते हैं। इन्होंने कहा कि कोरोना से बचने सावधानी बहुत जरूरी है। 
दोनों ने एक साथ 2002 में मेडिकल ऑफिसर के पद पर वनांचल क्षेत्र में ही ज्वाइनिंग ली। डॉ. संजीव ने सुरडोंगर में तो डॉ. रश्मि ने घोटिया में कार्यभार संभाला। दोनों घोटिया हेडक्वार्टर में रहकर सेवाएं दी। गुंडरदेही के पूर्व बीएमओ रह चुके डॉ. ग्लेड ने कहा कि बीमारी का कारण जानने व स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का अभाव है। बीमारी के इलाज से बेहतर उसका बचाव करना है।

डॉक्टर पत्नी भी पूरी सेवा भावना के साथ कर रही इलाज
डॉ. संजीव, रश्मि ने बताया कि 2002 में जब वनांचल क्षेत्र में ज्वाइनिंग लिए तो फोन सुविधा नहीं थी इसलिए घर वालों से बात करने के लिए 15 से 20 किलोमीटर दूर दल्लीराजहरा या झलमला जाना पड़ता था। तब बात हो पाती थी। डॉ. संजीव ने बताया कि वनांचल क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान मेरे साथ मेरी पत्नी ने भी मरीजों के इलाज व सेवा में पूरा योगदान दिया। दिन या मेरी पत्नी दोनों में से एक गांव जाकर इलाज करते थे। आमाडुला से लेकर परसडीह, मंगलतराई सहित कई गांवों में पहुंचकर सेवाएं दी। वर्तमान में कोरोना के कहर से बचने मास्क लगाने के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना जरूरी है।
तत्कालीन मंत्री व कलेक्टर ने किया था सम्मानित
15 अगस्त 2010 में, जब बालोद जिला का गठन नहीं हुआ था, तब दुर्ग में तत्कालीन मंत्री हेमचंद यादव, तत्कालीन कलेक्टर ठाकुरराम सिंह ने उत्कृष्ठ चिकित्सक का अवार्ड देकर दोनों को सम्मानित किया था।

ड्यूटी समय के बाद भी मरीजों का इलाज किए 
डॉक्टर दंपती ने 13 साल तक आदिवासी ब्लॉक डौंडी के सुरडोंगर, घोटिया, आमाडुला वनांचल क्षेत्रों में पदस्थ रहकर सेवाएं दीं। घोटिया हेडक्वार्टर में रहकर दोनों ने लोगों की मदद करने के लिए समय की बंदिशें समाप्त कर दी। अमूमन अधिकांश डॉक्टर रुटीन ड्यूटी समय के बाद अपने घर चले जाते हैं लेकिन दोनों घोटिया में ही रहे। रात में किसी भी गांव में बीमार होने की सूचना पर इमरजेंसी में मदद करने के लिए डॉ. संजीव ने खुद का बाइक उपयोग किए क्योंकि उस समय लोग पैदल ही अस्पताल आते थे।

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