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जानलेवा देरी:मरीज 10 दिन में ठीक होकर घर लौट रहे तब उनके संपर्क में आने वालों को मिल रही पॉजिटिव रिपोर्ट

बालाेद13 दिन पहले
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  • मौत के बाद परिजनों को करना पड़ रहा 3 दिन तक इंतजार, तब जाकर मिल रही रिपोर्ट

एक ओर स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि जिले में ही कोरोना जांच सुविधा होने के बाद सैंपल लेने की रफ्तार बढ़ने के साथ संक्रमितों या पॉजिटिव मरीजों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। वहीं दूसरी ओर लेटलतीफी भी संक्रमण बढ़ने का प्रमुख कारण है। आलम यह है कि मौत के बाद परिजनों को रिपोर्ट के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते है कि ग्राम गंधरी के 45 वर्षीय युवक की मौत हार्टअटैक से 11 सितंबर की रात हुई थी। 3 दिन बाद सोमवार को राजनांदगांव स्वास्थ्य विभाग की ओर से परिजनों को बताया गया कि इन्हें कोरोना हुआ था। तब मंगलवार को शव को गांव लाया गया। यूं कहें कि शोक परिवार को भी विभिन्न समस्याओं से गुजरना पड़ रहा है। वहीं जो स्वस्थ हैं, उन्हें भी लेटलतीफी के चलते परेशान होना पड़ रहा है। दरअसल संक्रमित मरीज 10 दिन में ठीक होकर घर लौट रहे तब संपर्क में आने वालों की कोरोना जांच रिपोर्ट आ रही है। गुंडरदेही ब्लॉक के ग्राम मोखा में ऐसा ही हो रहा है। जहां 24 अगस्त से अब तक 59 मरीज मिल चुके हैं। वहीं बालोद शहर के नयापारा वार्ड में तो सभी 9 संक्रमित ठीक होकर आ चुके हैं लेकिन तीन लोग रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

अफसरों को नहीं मालूम कितनी सैंपल रिपोर्ट पेंडिंग
स्वास्थ्य विभाग के अफसर यह बता नहीं पा रहे है कि कितने लोगों का सैंपल लिया जा चुका है और कितने की रिपोर्ट आनी बाकी है और इधर केस बढ़ते ही जा रहे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि सितंबर के 14 दिन में ही 725 मरीज मिले। जिनमें से अधिकांश संक्रमित के संपर्क में आने वाले हैं।

चिंता इसलिए क्योंकि संक्रमण बढ़ता जा रहा सैंपल देने वालों को स्वास्थ्य विभाग तब तक दवा नहीं देता जब तक उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव ना आ जाए। ऐसे में सैंपल देने के बाद इंतजार में बैठे पॉजिटिव मरीज बिना दवाई के रह रहे हैं। लिहाजा संक्रमण का लोड बढ़ रहा है और वे दूसरों को भी संक्रमित कर रहे हैं। इसकी वजह से मरीजों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।

घर में ही रहकर संक्रमण फैलने से रोकें: डॉ. जैन
आईएमए अध्यक्ष डॉ. प्रदीप जैन ने बताया कि जिनकी रिपोर्ट नहीं आई है, उन्हें घर में ही रहना चाहिए। ताकि संक्रमण न फैलें। अगर किसी प्रकार का लक्षण है तो डॉक्टरों से संपर्क करें और जरूरत पड़ने पर कोरोना जांच भी कराएं। रिपोर्ट आने के बाद ही गाइडलाइन अनुसार दवाइयां दी जाती है। उपचार होता है।

यह उदाहरण बता रही सच्चाई
रिपोर्ट के इंतजार में घर में कैद रहना मजबूरी

केस 1- गुंडरदेही ब्लॉक के ग्राम मोखा के कोरोना संक्रमित युवक ने बताया कि 25 अगस्त को सैंपल लिया गया था। पॉजिटिव रिपोर्ट 2 सितंबर को मिली, वह भी एक साथ 25 लोगों की। एक-एक कर पाकुरभाट लाया गया। अब स्वस्थ होकर घर आ गए है। 9 दिन बाद रिपोर्ट आई।
केस 2- नयापारा के 25 वर्षीय युवक ने बताया कि घर में 3 लोग संक्रमित हैं। 31 अगस्त को कोरोना जांच के लिए सैंपल लिए हैं। रिपोर्ट अब तक नहीं मिली।

रिपोर्ट निगेटिव है, वे भी सामूहिक रूप से रह रहे
केस 1-
ग्राम भोथली में 27 वर्षीय युवक की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद भी संपर्क में रहें 17 लोगों का सैंपल 24 मई को भेजा गया था। 28 दिन बाद पत्नी, बच्चे सहित 17 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई।
केस 2- गुरूर ब्लॉक के रमतरा में 26 मई को एक युवक कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। जो 5 जून को स्वस्थ होकर घर लौट गया। बावजूद क्वारेंटाइन सेंटर में रहने वाले 10 लोगों की रिपोर्ट 30 दिन बाद आई।

सीधी बात
डॉ एस देवदास, सीएमएचओ

सवाल - कोरोना टेस्ट रिपोर्ट आने में देरी हो रही है, ऐसा क्यों
- आरटीपीसीआर में अधिकतम 4 दिन लग रहे।
सवाल - संक्रमित के संपर्क में आने वाले नयापारा के 3 लोग 14 दिन से रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे
- रिपोर्ट पॉजिटिव हो या निगेटिव आती ही है, जिनका कह रहे हैं उनका पता करवाते है।
सवाल - रिपोर्ट आने में देरी भी कोरोना संक्रमण बढ़ने का कारण है
- कुछ लोगों की लापरवाही से संपर्क में आने वाले ज्यादा हो सकते हैं लेकिन जिनकी रिपोर्ट पेंडिंग रहती है, उसे घर में ही रहने की सलाह दी जाती है, मॉनिटरिंग करते हंै।

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