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स्वच्छता सर्वेक्षण:शहर कचरामुक्त है या नहीं, यह वहां की जनता तय करेगी

बालाेद2 दिन पहले
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  • नई गाइडलाइन जारी, सिटीजन फीडबैक से मिलेगा 600 अंक, जिले के 2 नपा व 6 नपं क्षेत्र में तैयारी शुरू, मेडल भी मिलेगा

शहरी क्षेत्रों में सफाई का हाल कैसा है, इसे परखने के लिए नई गाइडलाइन जारी की गई है। अब शहर धूल व कचरामुक्त है या नहीं, यह सर्वे, शिकायत, वास्तविक स्थिति के आधार पर जनता तय करेगी। पहले नई दिल्ली की टीम फील्ड में पहुंचकर सर्वे कर नंबर देती थी।
स्वच्छ भारत मिशन में पहली बार शहरों को सफाई को लेकर किए गए कार्यों को परखने व लोगों से फीडबैक लेने के बाद मेडल मिलेंगे। सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले शहर को प्लेटिनम मेडल मिलेगा।स्वच्छ भारत मिशन-2021 की नई गाइडलाइन में सर्वे से जनता को और अधिक जोड़ने के लिए डायरेक्ट आब्जर्वेशन यानी प्रत्यक्ष अवलोकन को पूरी तरह पब्लिक फीडबैक से जोड़ दिया गया है।
यानी सर्वे के लिए आने वाली टीमें आम लोगों से चर्चा करके उनके फीडबैक के आधार पर ही तय करेंगी कि शहर धूल मुक्त, कचरा मुक्त और डस्टबिन मुक्त है या नहीं?
शहर में कचरे का 100 प्रतिशत डोर टू डोर कचरा कलेक्शन और सोर्स पर सेग्रीगेशन होता है या नहीं? इसके अलावा अन्य मापदंडों पर शहर में सफाई का हाल कैसा है, यह जाना जाएगा। नई गाइडलाइन के हिसाब से जिले के बालोद, दल्लीराजहरा नगर पालिका, गुरूर, गुंडरदेही, डौंडी, डौंडीलोहारा, चिखलाकसा, अर्जुन्दा निकाय प्रमुखों ने भी तैयारी शुरू कर दी है।
इन सब कार्यों को परखा जाएगा: स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 के अंतर्गत गीले, शुष्क और खतरनाक अपशिष्ट को अलग करने, गीले अपशिष्ट के निपटान की प्रक्रिया, गीले और शुष्क अपशिष्ट का निपटान और पुनर्चक्रण, निर्माण मलबा का निस्तारण, कचरा स्थल पर फेंके जाने वाले कचरा की मात्रा और शहरों की सफाई की स्थिति पर गौर किया जाएगा। जिससे शहर को स्वच्छ रखा जा सके। नई गाइडलाइन से ही अब परख होगी।

किस कार्य पर कितने नंबर निकाय को मिल सकते हैं
100 अंक स्वच्छता में इनोवेशन के हैं। इसमें स्पर्धाएं आयोजित होंगी।
350 अंक स्वच्छता एप के हैं। एप के जरिए आने वाली शिकायतों के निराकरण पर यह तय होंगे।
300 अंक सिटीजन अनुभव के हैं। आब्जर्वेशन में चर्चा के आधार पर।
450 अंक सिटीजन वॉइस के हैं। सफाई में लोगों के जुड़ाव के आधार पर तय होंगे।
600 अंक सिटीजन फीडबैक के हैं। इसमें लोगों से सवाल पूछे जाएंगे।

गाइडलाइन में एकीकृत दृष्टिकोण पर दिया जोर
शहरी विकास मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार इस बार सर्वे में स्वच्छता के प्रति इंटिग्रेटेड एप्रोच यानी एकीकृत दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है। इस बार शहरों को नंबर के साथ मेडल भी दिए जाएंगे। इसके लिए 6 पैरामीटर तय किए गए हैं। इनमें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर प्लेटिनम (दिव्य) अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। केंद्रीय सरकार की ओर से पुरस्कार की नई श्रेणी की घोषणा की गई है। जिसमें दिव्य (प्लेटिनम), अनुपम (गोल्ड), उज्जवल (सिल्वर), उदित (ब्रॉन्ज), आरोही (एस्पायरिंग) अंतर्गत शहरों का चयन होगा। प्लेटिनम अवार्ड के लिए केवल वही शहर क्वालिफाई हो सकते हैं। जिनके पास 2020 का वाटर प्लस अवार्ड हो।

सिटीजन वॉइस कैटेगरी बनाई गई है
पिछले सर्वे में 1500 अंक डायरेक्ट आब्जर्वेशन के थे और इतने ही पब्लिक फीडबैक के, यानी 6000 अंकों के सर्वे में 50 फीसदी अंक इन दोनों कैटेगरी के थे। लेकिन इसमें कई जगह डुप्लीकेसी थी। इस बार इन दोनों को जोड़ कर सिटीजन वॉइस कैटेगरी बनाई गई है।

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