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कोरोना से राहत:जिला कोविड अस्पताल में 90 प्रतिशत बेड खाली आईसीयू में 13 भर्ती और पांच मरीज वेंटिलेटर पर

बेमेतरा20 दिन पहले
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  • अब तक जिले में 305 कोरोना संक्रमितों की मौत, अब मात्र 383 एक्टिव मरीज, लोग बरत रहे सावधानी

जिले में कोरोना संक्रमण कम हुआ है। ऐसे में जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या कम हुई है। जिला अस्पताल में जहां 15 दिन पहले मरीज को भर्ती करने बेड नहीं मिले रहे थे। वहीं अब बेड खाली पड़े हैं। अप्रैल के अंतिम हफ्ते में तो जिले के एकाएक संक्रमण के मामले बढ़े। इस दौरान कई संक्रमितों को ऑक्सीजन नहीं मिलने से परेशान होना पड़ा। अब अस्पताल में स्थिति पूरी तरह से बदल गई है।

ऑक्सीजन बेड व आइसोलेशन बेड 90 प्रतिशत खाली है। जिले में संक्रमित मरीज कम होने से अब डाॅक्टर भी राहत की सांस ले रहे हैं। अब अस्पताल के आईसीयू में 13 व वेंटिलेटर पर सिर्फ 5 मरीज ही भर्ती है। 29 मई के कोरोना मेडिकल बुलेटिन के हिसाब से इस दिन जिले में मात्र 24 संक्रमित मरीज मिले। 383 एक्टिव केस हैं। अब तक जिले में 305 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि हालत काबू में आने के बाद भी लोग समय पर इलाज के लिए अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं। ऐसे में उन्हें दिक्कत होगी। इसे देखते हुए अभी भी स्वास्थ्य विभाग लक्षण वाले मरीज को कोरोना जांच कराने की अपील की है।

कोविड सेंटर में मरीजों के लिए 320 बेड की सुविधा है
जिला कोविड अस्पताल में आईसीयू में 13 मरीज और 5 मरीज को वेंटिलेटर पर हैं। दो मरीज जनरल वार्ड, 6 मरीज आइसोलेशन में हैं। इसमें कुल 20 मरीजों को ऑक्सीजन लगी हुई है। सिर्फ एक मरीज ही ऐसा है जिसे ऑक्सीजन की जरूरत नहीं है। जिला कोविड अस्पताल में अब 199 बेड खाली पड़े है। यहां कोरोना मरीजों के लिए 320 बेड है। इसमें से 220 बेड जिला कोविड अस्पताल में ही है। 12 अप्रैल से कोरोना संक्रमितों की सख्या बढ़ने लगी थी। तब बेड कम पड़ रहे थे।

ऑक्सीजन की खपत भी अब धीरे-धीरे हो रही कम
कोविड अस्पताल में एक पाली में तीन एमबीबीएस डॉक्टर, 2 आयुर्वेद डॉक्टर और 10 नर्स सहित अन्य कर्मचारी मरीजों का इलाज कर रहे हैं। एक पाली में एक ही डॉक्टर 100 से अधिक मरीजों को समय-समय पर देख रहे थे। 7 मई से मरीजों की सख्या में कमी आना शुरू हुआ है। तब अस्पताल के बेड खाली होना शुरू हुआ जो अब सामान्य स्थिति में पहुंच गया है। ऑक्सीजन की खपत भी कम हो रहीं है।

केवल 25 ऑक्सीजन सिलेंडर की कर रहेे रिफिलिंग
जिला कोविड सेंटर के प्रभारी डॉ. दीपक मिरे ने बताया कि बीते दो सप्ताह से हालत काबू में है। अप्रैल के अंतिम दिनों में जिला अस्पताल और कोविड अस्पताल में मरीज सभी बेड में भर्ती थे। इस दौरान 40 से 60 जम्बो ऑक्सीजन सिलेंडर की रिफिलिंग करना पड़ता था। लेकिन अब केवल 25 ऑक्सीजन सिलेंडर की रिफिलिंग करा रहे है। स्थिति पूरी तरह से कंट्रोल में है, अब गंभीर मरीज भी नहीं आ रहे। तीसरी लहर को देखते हुए अभी से तैयारी की जा रही है। 15 दिन पहले यानी 14 मई को जिला अस्पताल में 220 मरीज थे। इनमें आईसीयू में 18, वेंटिलेटर में 7 और 60 मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। इसके साथ ही जनरल वार्ड में 50 संक्रमित भर्ती थे।

इन चार प्रमुख कारणों से संक्रमण दर में आई कमी
1. कोरोना के मामले जिले में लगातार बढ़ रहे थे, तब प्रशासन ने कोरोना की चेन तोड़ने 10 अप्रैल शाम 6 बजे पूरे जिले में लॉकडाउन लागू किया। दुकाने बंद होने से लोग घर में रहे। हालांकि स्थिति में सुधार होने पर छूट मिलती रही। इससे संक्रमण कम हुआ।

2. लोगों में जागरूकता आने लगी। लोग मास्क और कोरोना संक्रमण के राेकथाम के नियम का पालन करने लगे। लक्षण होने व न होने पर भी जांच कराने केन्द्र में पहुंचे।

3. जहां-जहां मरीज मिल रहे थे, वहां पाबंदी लगाई गई। जिला प्रशासन ने उस क्षेत्र पर ध्यान दिया, जहां कोरोना के मामले ज्यादा हैं। ऐसे में तुरंत कंटेनमेंट जोन बनाकर सील कर दिया।

4. ग्रामीण क्षेत्र में भी कोरोना के मामले बढ़ने लगे। तब मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सर्वे कराया गया। सर्दी, खासी और बुखार लक्षण वाले मरीज को दवा दी गई। शुरुआती लक्षण में ही लोग स्वस्थ होने लगे। इसके अलावा लोग भी अब सावधानी बरत रहे हैं।

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