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परेशानी:बेमौसम बारिश से धान फसल में लग रहे कीड़े

बेमेतरा8 महीने पहले
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  • जिले में धान फसल का रकबा एक लाख 83 हजार हेक्टेयर, कीट प्रकोप से बचाने के उपाय बताए

जिले में इस बार पर्याप्त वर्षा होने के कारण धान की अच्छी फसल होने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में वर्षा व खराब मौसम होने के कारण कीट व बीमारियों के प्रकोप देखने को मिल रहे हैं। जिले में धान फसल का रकबा 1 लाख 83 हजार हेक्टेयर के लगभग है। किसानों को विभिन्न कीट व बीमारियों के निरीक्षण व रोकथाम नियंत्रण करने की सलाह कृषि विभाग दे रहा है। कृषि विभाग के अधिकारी ने बताया कि बारिश के बाद तेज धूप के बाद वाली मौसम में कम अवधि में पकने वाली किस्मों में कीट व बीमारियां देखने को मिल रही है। धान में ब्लास्ट रोग के अधिक प्रकोप होने की शिकायत मिल रही है। पौधे के निचली पत्तियों में आंख या नाव आकार के धब्बे बनते हैं। वातावरण में अधिक नमी व बादलों वाला मौसम रोग फैलाने में सहायक होते हैं। यह रोग पत्तियों के अलावा धान की बालियों को भी प्रभावित करता है। इससे बालियों की गर्दन पर भूरे काले रंग का संक्रमण होने से बाली कमजोर व टूटने लगती है। इसकी रोकथाम के लिए ट्रायसायकलाजोल 120 ग्राम या आइसोप्रोथियोलेन 200 मिली में से किसी एक दवा का 12 से 15 दिन के अंतराल में 3 से 4 बार प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। शीथ ब्लाइट फफूंद जनित रोग भी हो रहे हैं। खेत में अधिक दिनों तक लगातार पानी जमा रहने से नमीयुक्त मौसम व मेढों पर उगे घास से यह धान में फैल रही है। इसके लिए पानी निकासी के साथ हेक्साकोनाजोल 300 मिली या प्रोफिकोनाजोल 30 मिली में किसी का 12 से 15 दिन के अंतराल में 3 से 4 बार प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने की सलाह दी जा रही है। बैक्टिरियल लीफ ब्लाइट व भूरा माहो की शिकायत भी सामने आ रही है। अधिकारियों ने कहा कि संबंधित किसान विभाग से मार्गदर्शन लेकर फसल में कीट उपचार कर सकते हैं।

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