लोगों को आस:रकम वापसी के लिए अब तक 4 हजार आवेदन जमा

बेमेतरा3 महीने पहले
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चिटफंड कंपनियों में निवेश करने वाले जिलेभर के ग्रामीण रकम वापसी के लिए आवेदन जमा करने कलेक्टोरेट पहुंच रहे हैं। - Dainik Bhaskar
चिटफंड कंपनियों में निवेश करने वाले जिलेभर के ग्रामीण रकम वापसी के लिए आवेदन जमा करने कलेक्टोरेट पहुंच रहे हैं।
  • चिटफंड कंपनियों में निवेश करने वाले पहुंच रहे कलेक्टोरेट

चिटफंड कंपनियों में पैसा जमा करने के बाद नुकसान उठाने वाले लोग जिला कलेक्टोरेट में आवेदन देने पहुंच रहे हैं। आवेदन जमा करने की तारीख 6 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त किए जाने से चिटफंड में ठगे गए लोगों ने कुछ हद तक राहत की सांस ली है। जिले में चिटफंड कंपनी में गांवों में रहने वाले लोगों को अपना शिकार बनाया है। लोगों ने इन कंपनियों में पैसे जमा कर अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करने का उद्देश्य रखा था, लेकिन रुपए जमा करने के 10 साल के बाद भी पैसा वापस नहीं मिलने पर ग्रामीण परेशान हैं। कलेक्टोरेट में अब तक जिले भर से 4000 से अधिक आवेदन जमा हो चुके हैं।

चिटफंड कंपनी में घाटा उठाने के बाद अब लोगों को कलेक्टोरेट में आवेदन के फॉर्म भरने में परेशानी उठानी पड़ रही है। क्योंकि ऐसे चिटफंड में नुकसान उठाने वाले अधिकतर ग्रामीण क्षेत्र के लोग हैं। जिन्हें पैसा डबल करने का लालच देकर जबरदस्ती पैसा जमा करवाया गया। फिलहाल कलेक्टोरेट पहुंचकर सैकड़ों ग्रामीण आपस में एक-दूसरे की मदद कर फॉर्म भर रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि उन्हें नुकसान का पैसा जल्द मिल जाएगा। ग्राम डगनिया के ग्रामीण माखन यादव (53) अपना फॉर्म भरवाने के लिए पढ़े-लिखे लोगों को ढूंढ रहे थे। उन्होंने बताया कि खेती-किसानी और मजदूरी से बचाए पैसे को साल 2013 से हर 6 महीने में 1360 रुपए चिटफंड कंपनी के एजेंट भूखन यादव के पास जमा करते थे। उन्होंने बताया कि एजेंट से पैसा जमा होने के बाद एक साथ 46 हजार रुपए दिलाने की बात की थी।

कलेक्टोरेट के दो अलग-अलग कमरे में फॉर्म जमा हुए हैं।
कलेक्टोरेट के दो अलग-अलग कमरे में फॉर्म जमा हुए हैं।

बच्चों के नाम से जमा कर रहे थे रुपए, लेकिन वापस नहीं मिले: साजा ब्लॉक के नरेश साहू ने बताया कि उनका एक लाख 10 हजार रुपए चिटफंड कंपनी में डूबा है। वह तीन अलग-अलग एजेंट के पास अपने बेटे अभय साहू (12) और गोविंद साहू (10) के नाम पर पैसे हर महीने 300 रुपए जमा करते थे। इस तरह उन्होंने एजेंट राजेश साहू के पास 22 हजार, कमलेश्वर के पास 30 हजार, देवकर के अशोक साहू के पास 18 हजार और अकलतरा के शंभु साहू के पास 40 हजार रुपए जमा करने की बात कही। सभी ने उन्हें 20 साल में एकमुश्त एक लाख रुपए मिलने का भरोसा दिलाया था।

शासन को भेजेंगे सभी आवेदन: एसडीएम
गर्रा के दिव्यांग विष्णु ने बताया कि खेती किसानी से बचे 50 हजार रुपए 20 साल बाद एक लाख 40 हजार मिलने की बात पर कवर्धा के बैंक में पैसा जमा किया था। लेकिन 10 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें पैसा नहीं मिला है। एसडीएम दुर्गेश वर्मा का कहना है कि हमारे पास अब तक चिटफंड के 4 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। हम सभी आवेदनों को एकत्र कर राज्य शासन को भेज देंगे।

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