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समाधि:मंदिर का संरक्षण करने वाला कोई नहीं

डोंगरगांव8 महीने पहले
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डोंगरगांव से 10 किलोमीटर दूर अति प्राचीनतम एक मात्र वाराह देवी मंदिर स्थित है। इसमें अभी नवरात्रि की तैयारी चल रही है। क्षेत्र की जीवनदायिनी नदी कालीसिंध के तट पर स्थित मंदिर अपनी अलग छटा बिखेरता है। मंदिर के आगे-पीछे समाधि है जो सिद्धि स्थल कहलाता है।

यहां पर भी मंदिर के आगे राजपूत समाज की सोनगरा सती स्थान हैं। वहीं मंदिर के पीछे बैरागी समाज के पुरखों की समाधि स्थित है। स्थानीय समिति के संयोजक रमेश दांगी ने बताया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यहां पर घोषणा कर चुके हैं कि मां वाराही देवी मंदिर, शनि मंदिर, बालाजी मंदिर, आशापूर्णा धाम को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करेंगे, लेकिन आज तक घोषणा पूरी नहीं हुई ।

क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और पुरातत्व विभाग सहित धर्मस्व विभाग का ध्यान आकर्षण यहां के लोगों द्वारा कई बार कराया गया फिर भी धरोहर का संरक्षण करने वाले कोई नहीं है।

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