नतीजे / मिशन क्लीन सिटी प्रोजेक्ट के बाद भी गंदगी, स्वच्छता रेटिंग में जीरो

Dirt after mission clean city project, zero in cleanliness rating
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Dirt after mission clean city project, zero in cleanliness rating

  • 2018 में डोंगरगढ़ ने प्रदेश के टॉप-3 में जगह बनाई, इस बार खराब प्रदर्शन

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

डोंगरगढ़. केंद्र ने हाल ही में गारबेज फ्री सिटी की रैंकिंग जारी की। इस बार डोंगरगढ़ नगर पालिका स्थान बनाने में नाकाम रही। अफसरों की निष्क्रियता व सफाई के नाम पर महज औपचारिकता के चलते ही स्वच्छता रेटिंग में गिरावट हुई। पिछले दो वर्षों में पालिका स्वच्छता के मामले में कई पायदान नीचे खिसकी है।
शहर में मॉनिटरिंग के अभाव व सफाई व्यवस्था महज औपचारिकता होने की वजह से ही रेटिंग में बढ़ोतरी नहीं हुई है। जबकि मिशन क्लीन सिटी प्रोजेक्ट से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन हो रहा है। नियमित, प्लेसमेंट व दैनिक वेतनभोगी सफाईकर्मी भी सार्वजनिक स्थलों की सफाई व्यवस्था संभाले हुए हैं, इसके बाद भी शहर में अघोषित मुक्कड़ें खत्म करने में नगर पालिका की टीम फिसड्डी साबित हुई है। एक साल के भीतर स्वच्छता में बेहतर काम नहीं होने की वजह से ही 2019 के आखिरी में जारी हुई स्वच्छता रेटिंग में नगर पालिका पांचवें पायदान पर रहा। वह भी 25-50 हजार की आबादी वाले निकायों में। जबकि इसके 2018 में प्रदेश के टॉप-3 में डोंगरगढ़ में जगह बनाई थी। वहीं 2020 में तो डोंगरगढ़ का स्थान ही नहीं लगा। इसके बावजूद स्वच्छता के क्षेत्र में और बेहतर करने की बजाय औपचारिकता ही निभाई गई है। सर्वेक्षण में अंक कम करने में सहायक अघोषित मुक्कड़, एप से सफाई समस्याओं का निराकरण, पब्लिक फीडबैक समेत कई विषयों पर तो ही काम ही नहीं हुए। केवल दिखावे के लिए रूटीन व्यवस्था बरकरार है। 
2019 में जारी सूची में मिला था पांचवां स्थान: 2019 के आखिरी में शासन ने सभी नगरीय निकायों की स्वच्छता रेटिंग जारी की थी। देशभर में इंदौर एक बार फिर से नंबर वन पोजिशन पर रहा। वहीं 25-50 हजार की आबादी वाले निकायों की बात करें तो नगर पालिका डोंगरगढ़ प्रदेश में पांचवें स्थान पर रहा। 
जबकि पिछले साल बेहतर काम की बदौलत देश के निकायों से प्रतिस्पर्धा करते हुए रेटिंग में सुधार किया था। किंतु इस बार रेटिंग में दूर-दूर तक डोंगरगढ़ का नाम ही नहीं आया। यानी बेहतर काम करने बजाय टीम ने हल्के में लिया और रेटिंग में गिरावट आ गई।
इन बिंदुओं ने कम किया अंक, सुधार नहीं 
अघोषित मुक्कड़ः सर्वेक्षण टीम सबसे पहले शहर के अघोषित मुक्कड़ों की काउंटिंग करती है। शहर में जब मिशन क्लीन सिटी प्रोजेक्ट संचालित है तो फिर अघोषित मुक्कड़ पूरी तरह से खत्म हो जाने चाहिए थे। किंतु इस विषय पर ही नगर पालिका अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई है। इसी वजह से रेटिंग में नंबर कम होते गए। फिलहाल शहर में 300 से अधिक अघोषित मुक्कड़ें देखे जा सकते हैं। इन मुक्कड़ों से रोजाना कई टन कचरा उठ रहा है।
स्वच्छता महुआ एप: शासन ने इस एप को पब्लिक की समस्या सुनने के लिए तैयार कराया है। जिसे शुरुआत में तो जमकर उपयोग कराने अभियान चलाकर लोगों के मोबाइल में डाउनलोड करवाया गया। लेकिन धीरे-धीरे यह भी फिसड्डी साबित हुआ। एप में गंदगी की शिकायत करने के कई दिनों बाद भी सफाई करने मौके पर टीम नहीं आ पाती थी। वहीं शिकायतें कई दिनों तक पेडिंग रह जाती है। इसके बाद पब्लिक ने भी इस एप का उपयोग अब बंद कर दिया है। 
पब्लिक फीडबैकः सर्वेक्षण की टीम पब्लिक से भी सफाई व्यवस्था को लेकर फीडबैक लेती है, जिस पर भी अंक निर्धारित रहते हैं। लेकिन बेहतर व्यवस्था देने में ही नगर पालिका नाकाम है तो फीडबैक भी बेहतर नहीं जाता। यह भी देखा गया है कि स्वच्छता सर्वेक्षण करने टीम आएगी तो पब्लिक को इसकी जानकारी भी नहीं है। यानी नगर पालिका पब्लिक के बीच सफाई को लेकर समन्वय नहीं बना पा रही है।
81 सफाई मित्र के बावजूद व्य‌वस्था लचर 
नगर पालिका क्षेत्र के मिशन क्लीन सिटी प्रोजेक्ट में 81 महिला सफाई मित्र कार्यरत हैं। जिन्हें हर माह 6000 रुपए प्रतिमाह मानदेय दे रहे हैं। ये डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने के बाद कबाड़ की छटनी कर बेचती हैं। जब ये महिलाएं डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन कर रही है तो अघोषित मुक्कड़ों पर नगर पालिका सख्ती बरतकर खत्म क्यों नहीं करा पा रही है। शहर में सफाई व्यवस्था भी लचर हो गई है। जिसे सुधारने के लिए पालिका की टीम काम नहीं कर पा रही है। सफाई व्यवस्था महज औपचारिकता में ही चल रही है।

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