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कोरोना में पर्व:समितियों को 26 बिंदुओं पर खरा उतरना होगा, तभी लगा सकेंगे गणेश का पंडाल

डोंगरगढ़एक दिन पहले
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  • नियमों की जटिलता को देख गणेशोत्सव को लेकर समितियां रुचि नहीं दिखा रहीं
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गणेशोत्सव में भी कोरोना संक्रमण की मार के चलते सार्वजनिक पंडाल इस बार नजर नहीं आएंगे। क्योंकि प्रशासन ने 26 बिंदुओं पर गाइडलाइन जारी करके समितियों को लागू करने कहा है। नियम ऐसे हैं कि कोई भी समिति लागू करना नहीं चाह रही। जिस वजह से शहर में सार्वजनिक पंडाल नहीं लगेंगे। कोई भी समिति सार्वजनिक आयोजन कराने को लेकर अब तक तो सामने नहीं आई है। इसके अलावा एक वजह यह भी है कि पर्व के बीच यदि कोई व्यक्ति संक्रमित निकलता है तो उसके इलाज का पूरा खर्च समिति को वहन करना पड़ेगा। साथ ही प्रत्येक पंडाल में 4 सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे। ऐसे ही नियमों के चलते अब तक समितियों ने पंडाल लगाने रुचि नहीं दिखाया है। जबकि 21 दिन बाद गणेश चतुर्थी पड़ेगी। प्रशासन के सख्त नियम व संक्रमण के मार के चलते सार्वजनिक पंडाल नहीं के बराबर ही रहेंगे। जबकि ज्यादातर लोग घर पर ही मूर्ति स्थापना करेंगे।

अगर गाइडलाइन का सख्ती से नहीं हुआ पालन तो प्रशासन करेगी कड़ी कार्रवाई
इस बार 22 अगस्त से शुरू गणेशोत्सव की मार पड़ेगी। इससे मूर्तिकारों को तगड़ा झटका तो लगा ही है साथ ही डेकोरेशन व डीजे वालों का पूरा कारोबार बैठ गया है। प्रशासन ने व्यवस्था में लापरवाही पर आयोजक या समिति के खिलाफ महामारी एक्ट के तहत सख्त कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। जारी आदेश में कहा गया है कि थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही लोग गणपति का दर्शन कर सकेंगे। ऐसे ही कड़े नियमों के चलते इस बार समिति आयोजन नहीं करेगी। जिला प्रशासन ने पहले ही साफ कर दिया है कि 4 फीट से अधिक मूर्ति स्थापित करने की अनुमति नहीं रहेगी। इसलिए अब तक न तो समितियों ऑर्डर किया है और न ही मूर्तिकार प्रतिमा बना रहे हैं। वे बिना ऑर्डर के ही अधिकतम 4 फीट तक ही मूर्ति बनाकर अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं।

सुबह 7 से शाम 7 बजे तक कर सकेंगे विसर्जन, सिर्फ दो लोग ही जाएंगे
आयोजन के दौरान अस्थायी पंडालों में सीसीटीवी कैमरे के अलावा दर्शन करने आने वाले प्रत्येक लोगों के नाम रजिस्टर में दर्ज करने होंगे। जो कि समिति वालों के लिए संभव नहीं है। विसर्जन को लेकर भी प्रशासन ने कहा कि रात में विसर्जन की अनुमति नहीं रहेगी। सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक ही तालाब में विसर्जन के लिए लोग आएंगे। वहीं एक मूर्ति के साथ केवल दो लोग ही जाएंगे। पंडाल के सामने कोई सड़क या गली प्रभावित न हो। कम से कम 5000 वर्गफीट की खुली जगह होनी चाहिए। इसके अलावा विसर्जन शांतिपूर्वक ही करने होंगे। महावीर तालाब में विसर्जन व्यवस्था को लेकर भी बदलाव रहेगा। जो विसर्जन से पहले तय कर लिया जाएगा।

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मूर्तिकारः शहर के तीन वार्डों में मूर्तिकार भगवान की प्रतिमा बनाते है। इनमें कई ऐसे परिवार है जिनकी रोजी-रोटी भगवान गणेश की प्रतिमा से ही होती है। क्योंकि सालभर की कमाई एक सीजन में कर लेते है। इस साल कोरोना के चलते समितियों ने बड़ी मूर्तियों के ऑर्डर नहीं दिए। इससे कुम्हारों को लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

टेंट संचालकः कर्मचारी मार्च में कोरोना की दस्तक के दौरान ही शादी-ब्याह का सीजन था। परंतु पाबंदी के चलते टेंट व डेकोरेशन का काम ठप रहा। अब 4 माह बाद गणेशोत्सव में भी मंदी छाई हुई है। सार्वजनिक आयोजन नहीं होने से टेंट व डेकोरेशन के ऑर्डर संचालकों को नहीं मिले। अब ये दूसरे व्यवसाय करने लगे हैं।

सांस्कृतिक कलाकारः गणेशोत्सव में शहर के अलावा गांवों में भी रोजाना अलग-अलग तरह के सांस्कृतिक आयोजन होते थे। इससे छोटे व बड़े कलाकारों को काम मिलता था। उत्सवों में आयोजन होने से सीजन में अच्छी कमाई हो जाती थी। लेकिन अब पूरा साल ही ऐसे ही निकलने की संभावना है। ग्रामीण अंचल के कलाकार खासे परेशान हैं।

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