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रेलवे ने शुरू किया था काम:बिना सहमति के तीसरी लाइन का निर्माण विरोध में उतरे किसानों ने काम बंद कराया

डोंगरगढ़एक वर्ष पहले
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  • मानसून आने के पहले खेत में शुरू हो चुका है जुताई व सफाई का काम

नागपुर से बिलासपुर तक निर्माणाधीन तीसरी रेल लाइन के निर्माण में रेलवे किसानों की जमीन पर अतिक्रमण कर दिन-रात काम करा रहा है। मंगलवार को रेलवे किसान संघर्ष समिति जटकन्हार व धुसेरा के किसान पदाधिकारियों अध्यक्ष नैनकुमार जनबंधु, नोहर लाल वर्मा, घनश्याम साहू, नकुल साहू, मन्ना लाल, धनीराम, बसंत, ललित, श्यामलाल, महावीर, रोहित, रजवंतिन आदि ने कार्यस्थल पर विरोध करते हुए रेलवे के निर्माण कार्य को रूकवा दिया और खुदाई में लगें जेसीबी को वापस भेजा। 
साथ ही रेलवे के अफसरों से फोन पर चर्चा कर काम को तत्काल बंद कराने की बात कही। किसानों ने कहा कि सभी किसानों की मौजूदगी में भूमि नाप के बाद ही काम चालू किया जाए। किसानों ने दो टूक कहा कि बिना नाप-जोख हुए ही काम करना अनुचित है और खेतों में रखे गए मिट्टी व स्लीपर को भी तत्काल उठाया जाए। बता दें कि जटकन्हार रेलवे स्टेशन के समीप चल रहे तीसरी लाइन निर्माण में रेलवे ने किसानों की बिना सहमति के ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया है। जबकि किसान अपनी जमीन में चल रहे निर्माण का विरोध कर रहे है। इसके बाद भी लॉकडाउन के बीच रेलवे तेजी से काम करा है। महिला किसान रजवंतिन बाई ने बताया कि उसके खेत के ट्यूबवेल को रेलवे ने निर्माण के दौरान दबा दिया। इस तरह से रेलवे तीसरे लाइन के निर्माण कार्य में किसानों को नुकसान पहुंचा रहा है। तीसरी लाइन का निर्माण कार्य राजनांदगांव जिला में अंतिम चरण पर है। परंतु किसानों की सहमति के बिना ही तेजी से काम चल रहा है। जिसे लेकर किसान रेलवे के रवैये से आक्रोशित है। 
दिन में विरोध को देख रात में करा रहे काम: किसानों ने बताया कि प्रभावित किसान समय-समय पर रेलवे के मनमानी रवैये का विरोध करते रहे हैं। कई बार दिन में किसानों के पहुंचने की वजह से रेलवे रात में मशीनों से काम पूरा कराने में लगा है। रात में मशीनों से काम कराकर अब स्लीपर, सीमेंट व गिट्टी भी डंप किया जा रहा है। जबकि जमीन अधिग्रहण करने से पहले अब तक न तो किसी किसान को मुआवजा मिला है और न ही नौकरी दी गई है।

बुआई होगी प्रभावित आंदोलन की दी चेतावनी
किसानों ने कहा कि मानसून आने के पहले खेत में जुताई व सफाई का काम शुरू हो चुका है। लेकिन रेलवे के निर्माण कार्य के चलते किसानी कार्य प्रभावित हो रहे है। अगले माह मानसून आते ही बोआई का कार्य प्रारंभ होगा। लेकिन रेलवे के मनमानीपूर्ण रवैया के चलते बोआई का कार्य भी प्रभावित होगा। तीसरी लाइन निर्माण के लिए अन्य खेतों में भी मटेरियल रखकर कब्जा कर लिया गया है। किसानों ने कहा कि यदि अब निर्माण कार्य किया जाता है तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

लगातार पत्र लिखने के बाद भी ध्यान नहीं दे रहे
प्रभावित किसानों ने बताया कि रेल परियोजना के लिए शासन द्वारा अधिग्रहित की गई भूमि के प्रभावित किसानों के परिवार में से एक सदस्य को नौकरी व चार गुना मुआवजा दिए जाने संबंधित पत्र प्रभावित किसानों द्वारा कलेक्टर को पत्र लिखकर 8 अक्टूबर 2018 को प्रभावित किसानों की सूची की मांग के लिए अवगत कराया था जो कि आज तक नहीं मिला। वहीं 11 नवंबर 2019 को भारत सरकार रेल मंत्रालय के पत्र में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित नीतियों में संशोधन किए जाने की सूचना दी गई थी।

सर्वे को बताया गलत, उपस्थिति में दोबारा नाप की मांग 

तीसरी लाइन के लिए रेलवे के सर्वे को किसानों ने गलत बताया है। उनका कहना है कि उनकी गैर मौजूदगी में रेलवे ने नाप-जोख कर लिया और काम शुरू करा दिया। इसका विरोध करते हुए किसानों ने दोबारा नए सिरे से सर्वे कराकर अधिग्रहण की कार्रवाई करने का मांग किया था। परंतु रेलवे ने मनमानी करते हुए बिना मुआवजा दिए ही तीसरी लाइन का काम शुरू करा दिया। साथ ही रेलवे ने प्रभावित किसानों की सूची अब तक राजस्व को उपलब्ध नहीं कराया है। इसलिए किसान विरोध में उतर गए। 

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