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रोपवे टूटने से मौत का मामला:पुलिस की जांच में ट्रस्ट ही लापरवाह, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष कोषाध्यक्ष और मंत्री पर गैर इरादतन हत्या का जुर्म दर्ज

डोंगरगढ़14 दिन पहले
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  • एफआईआर में लिखा: मंदिर समिति में पदस्थ पदाधिकारियों की मनमानी व लापरवाही से हुई घटना, जांच और कथन के आधार पर कार्रवाई

मां बम्लेश्वरी मंदिर के रोप-वे की गुड्स ट्रॉली टूटने से ट्रस्ट के कर्मचारी गोपीराम पिता सुखीराम पड़ौती की मौत के मामले में डोंगरगढ़ पुलिस ने ट्रस्ट की लापरवाही को मान लिया है। उन्होंने मां बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति के चार पदाधिकारियों के खिलाफ धारा 304-ए के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। हादसे के पांच दिन बाद सोमवार को ट्रस्ट के अध्यक्ष नारायण अग्रवाल, उपाध्यक्ष रघुवर अग्रवाल, कोषाध्यक्ष बिरदीचंद भंडारी व मंत्री नवनीत तिवारी के खिलाफ पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। साथ ही विवेचना के बाद हादसे के लिए ट्रस्ट प्रबंधन को लापरवाह बताया है। एफआईआर में स्पष्ट लिखा गया है कि मंदिर समिति में पदस्थ पदाधिकारियों की मनमानी व लापरवाही से घटना हुई है। पुलिस ने एफआईआर में यह भी लिखा है कि प्राप्त दस्तावेज के आधार पर कन्वेयर एंड रोप वे कंपनी लिमिटेड व मां बम्लेश्वरी ट्रस्ट समिति के पदाधिकारियों की आपसी खींचतान के कारण रोप वे संचालन के लिए कोई भी टेक्नीकल टीम नहीं होने की जानकारी मिली है। बिना टेक्निकल टीम के शाम के 06 बजे के बाद मंदिर ट्रस्ट समिति के पदाधिकारियों के द्वारा ट्राली में माल ढुलाई का कार्य किया जा रहा था। ऐसा बताया जा रहा है कि विवेचना के बाद पदाधिकारियों के खिलाफ और भी धाराएं जुड़ेगी। तीन दिनों की विवेचना व दबाव के बाद ही पुलिस हरकत में आई और पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया। हालांकि मामले की जांच पूरी नहीं हुई है। क्योंकि पुलिस ने अब तक टेक्निकल इंजीनियरों के साथ जांच नहीं की है। इसलिए फिलहाल हादसे के लिए ट्रस्ट प्रबंधन ही जिम्मेदार है और लापरवाही के चलते ही हादसा हुआ और एक कर्मचारी की जान चली गई। क्योंकि शाम 6 बजे के बाद रोप-वे संचालन की अनुमति नहीं होने के बाद भी चालू रखा और मनमाने तरीके से गुड्स ट्रॉली में ओवरलोड सामान लोड कर भेजते रहे। लापरवाही की वजह से ही रोप से ट्रॉली अलग हुई और उतरते समय चट्टान में जा गिरी। ओवरलोड के चलते ही ट्रॉली के ग्रिप से रोप का संपर्क कटता रहा। यही हादसे की मुख्य वजह बनी। हालांकि टेक्निकल एक्सपर्ट की जांच में इस पर मुहर लगेगी। एसडीएम अविनाश भोई ने बताया कि जांच रिपोर्ट जल्द ही कलेक्टर को भेज दी जाएगी। हालांकि रिपोर्ट में क्या लिखा है इसका वे खुलासा नहीं कर पाएंगे।

जांच में पाया बिना टेक्निकल स्टाफ के संचालन
पुलिस ने जांच में यह भी पाया है कि मंदिर ट्रस्ट बिना टेक्निकल स्टाफ के रोप-वे का संचालन कर रही थी। वहीं शाम 6 बजे के बाद अनुमति नहीं होने के बावजूद रात के अंधेरे में सामान ओवरलोड भेजा जा रहा था। जबकि एमओयू के अनुसार साल भर कन्वेयर एंड रोप-वे कंपनी संचालन करती और ट्रस्ट के कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के बाद ही हैंडओवर करती। लेकिन एमओयू के मुताबिक काम नहीं हुआ और साल भर पहले ही ट्रस्ट ने संचालन अपने हाथों में ले लिया। इसलिए पदाधिकारियों को दोषी बनाया गया है।

पत्र बता रहा अक्टूबर में ही कर दिया हैंडओवर
इस मामले में यह बात भी सामने आ रही है कि कंपनी ने अक्टूबर 2020 में ही मंदिर ट्रस्ट को पत्र लिखकर हैंडओवर करने की बात लिखी है। क्योंकि 13 मार्च 2020 को नए रोप-वे का लोकार्पण हुआ। इसके पूर्व अक्टूबर 2019 से ट्रायल शुरू हो चुका था। इसलिए अनुबंध के मुताबिक अक्टूबर 2020 में ही कंपनी ने ट्रस्ट को पत्र लिखकर स्वयं को मुक्त कर लिया। जबकि लोकार्पण के बाद से एक साल तक संचालन कंपनी को ही करना था।

प्रशासनिक रिपोर्ट में भी ट्रस्टी को बताया जिम्मेदार
प्रशासनिक सूत्रों की मानें उनकी भी रिपोर्ट तैयार हो गई है। उस जांच रिपोर्ट में भी ट्रस्टी ही जिम्मेदार बताए गए हैं। दो-तीन दिन पहले कम्पनी के इंजीनियरों ने मौके का जायजा लिया था। उन्हीं की रिपोर्ट और जानकारी के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज किया है। पूरी लापरवाही ट्रस्ट की ही मानी गई है। पता चला है कि प्रशासनिक जांच रिपोर्ट मंगलवार को कलेक्टर के पास पुटअप हो जाएगी। बताया गया कि जांच रिपोर्ट में क्या लिखा है इसका खुलासा नहीं किया जाएगा।

तो रोप-वे को बनाया सिर्फ कमाई का जरिया
सड़क में पार्किंग और ट्रस्ट वसूल रही शुल्क
: कोरोना काल के बाद नया रोप-वे ही दोबारा शुरू हो पाया। छिरपानी के अलावा रोप-वे परिसर में ही पार्किंग कराया जा रहा है। मेन रोड पर भी गाड़ियां पार्क होती है। उसकी वसूली भी ट्रस्ट ही कर रही है। खासकर अवकाश के दिनों में मेन रोड पर ही बेतरतीब पार्किंग से अव्यवस्था का आलम रहता है। यानी सड़क पर पार्किंग कराकर केवल वसूली की गई और रोप-वे को कमाई का जरिया बना लिया गया।

कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया
कोरोना काल में ही रोप-वे चालू हुई। इस दौरान कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन मंदिर ट्रस्ट को कराना था। लेकिन कुछ ही दिनों में भीड़ ऐसी बढ़ी की सारे नियम टूट गए। न तो मास्क अनिवार्य किया और न ही सैनिटाइजर की व्यवस्था की। वेटिंग हॉल में लोगों की भीड़ खचाखच भरी रहती है। लेकिन ट्रस्ट ने प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए कमाई बढ़ाने के लिए बेतरतीब भीड़ एकत्रित कर यात्री ढोते रहे। जबकि पदाधिकारी स्वयं रोप-वे पहुंचकर रोजाना निगरानी कर रहे थे।

चार पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
"रोप-वे की गुड्स ट्रॉली टूटने से एक कर्मचारी की मौत के मामले में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष व मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मंदिर ट्रस्ट बिना टेक्निकल स्टाफ के रोप-वे का संचालन कर रही थी। साथ ही शाम 6 बजे के बाद अनुमति नहीं होने के बावजूद रोप-वे चलाया जा रहा था। ट्रस्ट प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है। जांच के बाद और भी धाराएं जुड़ेंगी।"
- अलेक्जेंडर किरो, टीआई डोंगरगढ़

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