संत ने कहा:अनुभूति को महसूस कर सकते हैं, जीवन में घटी घटनाओं से मिलता है अनुभव

डौंडीलोहारा5 दिन पहले
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पाटेश्वरधाम के संत रामबालक दास ने सत्संग में कहा कि मकर संक्रांति के ही दिन सूर्य उत्तरायण होता है। हिंदू धर्म के त्योहारों की तारीख अंग्रेजी कैलेंडर में बदलती रहती है, लेकिन मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही होती है। सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और इसी दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाता हैं 14 जनवरी के बाद ही सूर्य नई ऊर्जा और नए गति के साथ उत्तरायण की ओर गमन करते हैं। ग्रह नक्षत्रों की ऐसी स्थिति 14 जनवरी या 3 साल मे 15 जनवरी को पड़ना संयोग है, इसीलिए मकर संक्रांति मनाया जाता है। राजकुमार यादव कुनकुरी ने जिज्ञासा रखी कि यज्ञ कुंड कितने प्रकार के होते हैं। बाबा ने बताया कि जिस तरह से अलग-अलग यज्ञ है, वैसे ही देव हैं, कृतिका हैं, मातृकाएं हैं, दिगपाल हैं, उन्हीं के अनुसार एक यज्ञ की बहुत सारी विद्याएं और उन्हीं के अनुसार बहुत सारी यज्ञ वेदी और यज्ञ कुंड बनाए जाते हैं।

यज्ञ कुंड मुख्यत: आठ प्रकार के होते हैं और सभी का प्रयोजन अलग अलग होता हैं । योनी कुंड- योग्य पुत्र प्राप्ति के लिए, अर्ध चंद्राकार कुंड- परिवार में सुख शांति के लिए। पर पति-पत्नी दोनों को एक साथ आहुति देना पड़ती हैं। त्रिकोण कुंड- शत्रुओं पर पूर्ण विजय। वृत्त कुंड- जन कल्याण और देश में शांति के लिए। सम अष्टास्त्र कुंड- रोग निवारण के लिए।

सम षडास्त्र कुंड- शत्रुओ में लड़ाई झगड़े करवाने के लिए, चतुष्कोणा स्त्र कुंड- सर्व कार्य की सिद्धि के लिए, पदम कुंड- तीव्रतम प्रयोग और मारण प्रयोगों से बचने के लिए। बाबा ने बताया कि अनुभूति व अनुभव में बहुत अंतर होता है। अनुभूति को हम अपनी कल्पना और संवेदना से मन व ह्दय में महसूस करते हैं। किसी चीज की अनुभूति नहीं कर सकते। अनुभव हमारे जीवन में घटी घटनाओं से हमें प्राप्त होता है। उसका मन व ह्दय से कोई लेना नहीं होता है।

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