तैयार किया समूह:हाउस वाइफ से बनी उद्यमी, अचार व फिनाइल की डिमांड

डौंडी9 महीने पहले
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  • महिला सशक्तीकरण व स्वाभिमान का प्रतीक बनी कुमुड़कट्टा की कुसुम, रिटेल बाजार में बिक रहा इनका उत्पाद

एक समय था जब महिलाएं घर के काम और चूल्हा-चौके का ध्यान रखना ही अपने जीवन का उद्देश्य समझती थी। लेकिन आज महिलाएं आत्मनिर्भर हो कर स्वाभिमान के साथ जीना चाहती हैं। वे भी अपने परिवार के लिए काम करना और पैसा कमाना चाहती हैं। डाैंडी ब्लाक के ग्राम पंचायत कुमुड़कट्टा की जय मां पहाड़ों वाली महिला समूह से जुड़ी कुसुम सिन्हा अपने दम पर अागे बढ़ रही हैं। समूह की अध्यक्ष कुसुम सिन्हा ने बताया कि पहले वह हाउस वाइफ थी। घर- परिवार काे सम्हालने में ही समय निकल जाता था। एेसे में उन्होंने अपनी पहचान बनाने के लिए 2017 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ी। जनपद पंचायत डौंडी के अधिकारियों ने राजनांदगांव के सीआरपी दल को गांव की महिलाओं को जोड़ने के लिए भेजा था। उनके मार्गदर्शन से गांव की 12 महिलाओं ने समूह बनाया। लेकिन कुछ दिन बाद अन्य महिलाओं ने रुचि नहीं ली। फिर अकेले ही समूह को आगे बढ़ाने के लिए छोटे- मोटे काम करती रहीं। जिसकी बदौलत अाज एक सफल व्यवसायी बन चुकी हैं। उन्हाेंने बताया कि सबसे पहले अगस्त 2020 मे बांस से राखी बनाकर बेचा। वहीं से थाेड़ी पहचान बनी। अपने गांव में ही संसाधन जुटा कर बांस, धान, चावल, रखिया बीज, मौली धागा, रेशम से राखी बनाना शुरू किया। 6 हजार रुपए की लागत से पहली बार की मेहनत में ही 36 हजार रुपए की राखी बेची, इसके बाद 10 हजार रुपए की लागत से फिनाइल बनाने का काम शुरू किया। उसमें 20 हजार रुपए मिला।

2 लाख रुपए लोन लेकर अचार बना रही
कुसुम ने बताया कि अभी अचार बनाकर बेच रही हूं। जनपद पंचायत डाैंडी तथा जिला पंचायत बालोद के माध्यम से अचार बालाेद बाजार में बिक रहा है। वहीं रिटेल बाजार में भी अचार व फिनाइल बिक रहा है। फरवरी में देना बैंक चोरहा पड़ाव की शाखा से 2 लाख रुपए का लोन मिला है। जिससे कारोबार चल पड़ा है। नींबू का अचार, मिर्ची का अचार, गाजर जिमी कंद का अचार बनाकर सबसे पहले अपने क्लस्टर कोटागांव ले गई। फिर जनपद व जिला पंचायत के माध्यम से 63 डिब्बा अचार गया है। फिर दूसरी बार अट्ठारह डिब्बे की मांग हुई। मेरा मानना है कि पैसा तो कभी भी कमा सकते हैं लेकिन जो इस समूह के माध्यम से मान- सम्मान मिला वह पैसे से भी अधिक मूल्यवान है। बिहान की पीआरपी शकुन निर्मलकर और बीपीएम अंजू मेमन का योगदान है।

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