सत्संग / ज्ञानेंद्रियों से प्रभावित होती है माया: रामबालक

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  • श्रीराम ने जब ब्राह्मण कुल में जन्मे रावण का वध किया तो उन्हें ब्रह्म हत्या का पाप लगा

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

डाैंडीलाेहारा. पाटेश्वरधाम में वाट्सएप में चल रहे सत्संग में राम बालक दास ने कहा कि भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण तब तक नहीं होगा। जब तक विवेक नहीं होगा। बिनु सत्संग विवेक न होई, उन्होंने कहा मनुष्य का कर्तव्य क्या और अकर्तव्य क्या। यह सब सत्संग से ही पता चलता है। जिस सत्संग की इतनी महिमा है, उससे आज हम वंचित हैं। पाठक परदेसी बैजलपुर ने पूछा कि क्या भगवान राम को ब्रम्ह हत्या का पाप लगा था यदि हां तो कैसे, राम प्रभु को इस पाप से मुक्ति कैसे मिली। 
संत ने बताया कि भगवान विष्णु ने राम के रूप में अवतार लिया था और मानव के सभी मर्यादाओं से वे बंधे हुए थे। मनुष्य कुल में जन्म लेने पर भगवान को तीन प्रकार की मर्यादा बांधती है, वैष्णवी, सांसारिक, शारीरिक, वैष्णवी माया वह है जो ज्ञानेंद्रियों और कर्म इंद्रियों से प्रभावित होती है, भगवान है फिर भी उन्हें नींद आती है, भूख लगती है। वह हंसते हैं, रोते हैं अनुभव करते हैं। सांसारिक माया से अभिप्राय है बहुत सारे रिश्ते निभाना, प्रभु राम सांसारिक सुख-दुख से उपर थे फिर भी बंधना चाहते थे क्योंकि यह मानव स्वभाव का परिचायक है। तीसरा है शारीरिक माया में बहुत सारी आवश्यकता होती है। स्नान, ध्यान, नृत्य क्रिया सभी। इसलिए भगवान राम ने जब ब्राह्मण कुल में जन्मे रावण का वध किया तो उन्हें ब्रह्म हत्या का पाप लगा। इसके निवारण के लिए उन्होंने कई स्थान पर जाकर अनुष्ठान, यज्ञ किए। हेमंत साहू राजनंदगांव ने गुरु व सतगुरु की महिमा पर पुछा। संत ने स्पष्ट किया कि गुरु वे होते हैं जो हमें दीक्षा देते हैं, संस्कार देते हैं, परंतु सतगुरु वह है जो हमें बिना दीक्षा दिए, बिना मंत्र दिए, बिना कंठी पहनाए हमारा मार्गदर्शन करते हैं। जिनके सानिध्य में हम यह ज्ञान प्राप्त करते हैं कि क्या उचित है क्या अनुचित, ईश्वर क्या है। सदा उचित मार्ग को प्रशस्त करते हैं वहीं सद्गुरु होते हैं। सुधीर सिंह राजपूत भंडारपुर ने पूछा कि भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि कर्म में अकर्म को देखें। 
बुरे व्यवहार को दोबारा नहीं दोहराना चाहिए
यदि किसी व्यक्ति को अपना अपराध बोध होता है और उसे वह दोबारा ना करने का प्रण ले लेता है तो इससे बढ़कर और कुछ नहीं है, आप दिल में संकल्प करिए कि आप कभी भी किसी बुरे व्यवहार को दोबारा नहीं दोहराएंगे यही प्रभु की प्राप्ति है। पदमादेवी देवांगन, माया जयेश ठाकुर डौंडीलोहारा, ज्योति आडिलजी, डूबोवती यादव, मनीषा साहू, शिवाली साहू, तनु साहू, कौशल्या पुखराज साहू ने वट सावित्री व्रत की कथा का वाचन करने का निवेदन बाबा राम बालक दास से किया।

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