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सत्संग:अन्याय को सहने के बजाय उसके खिलाफ आवाज उठाएं: रामबालक

डौंडीलोहाराएक महीने पहले
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पाटेश्वरधाम के संत रामबालक दास ने साेशल मीडिया के जरिए सत्संग में कहा कि सप्त ऋषि हमारे संस्कृति के स्तंभ है। जिन्हाेंने कहीं आयुर्वेद तो कहीं सामवेद कहीं चार वेदों तो कहीं भौतिक विज्ञा, भाषा विज्ञान सभी को प्रभावित किया। सप्तर्षियों में प्रमुख कश्यप, अगस्त्य, वशिष्ट, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भारद्वाज हैं।

अगस्त्य ऋषि ने एक बार पूरे समुद्र को सोख लिया था। अगस्त्य ऋषि की इस विषय पर कथा आती है कि एक बार पीपलीका प्रजाति की चिड़िया अंडे दे रही थी तब समुद्र के प्रवाह में वह चले गए, उसने महान समुद्र से बहुत विनती की कि आप सबल है समर्थ है मैं बहुत छोटी और असहाय हूं, आप मुझे मेरे बच्चे वापस कर दीजिए।

समुद्र ने अहंकार में बात नहीं सुनी और उसके बात ना सुनकर उसे उपेक्षित छोड़ दिया। वह सब के पास जाकर गुहार लगाती रही परंतु किसी ने उसकी नहीं सुनी। अगस्त्य मुनि ईश्वर की प्रेरणा से उसी और से गुजर रहे थे वहां उसने उस चिड़िया का यह हाल देखा और उससे पूछा कि तुम क्यों इस तरह दुखी हो। तब उस चिड़िया ने अपना हाल सुनाया। तब अगस्त्य ऋषि ने अपने तप से समुद्र को प्रकट होने की आज्ञा दी। समुद्र को उसके अंडे वापस करने के लिए कहा। तब समुद्र ने कहा कि यह तो मेरा प्रतिदिन का कार्य है।

तब ऋषि ने कहा कि अन्याय कई बार होता है वह महत्व नहीं रखता। परंतु जब कोई उसका विरोध करता है, तब वह महत्व रखता है और यह चिड़िया तो अपने ऊपर हुए अन्याय का विरोध कर रही है। आप से गुहार भी लगा रही है। आपको इनके बच्चे वापस कर देना चाहिए परंतु अहंकार वश समुद्र ने ऋषि की बात नहीं मानी और अगस्त्य ऋषि ने क्रोधित होकर उन्हें अपने अंदर पान कर लिया। कभी भी अन्याय को सहन नहीं करना चाहिए। उसके खिलाफ आवाज अवश्य उठानी चाहिए।

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