परेशानी नहीं हो रही कम / ट्रेन के लिए 30 घंटे का इंतजार, 12 घंटे का सफर तय करने लगे 20 घंटे, लौटे बदहवास

30 hours wait for the train, 20 hours to travel 12 hours, returned unhappy
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30 hours wait for the train, 20 hours to travel 12 hours, returned unhappy

  • सफर के दौरान खाना-पानी के लिए भी मजबूर हो गए मजदूर

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 05:00 AM IST

दुर्ग. घर वापसी करने वाले मजदूरों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। 12 घंटे के सफर के लिए 30 घंटे तक मेहनत करनी पड़ी। पहले 50 से 60 किमी पैदल चलकर स्टेशन पहुंचे। इसके बाद 8 से 10 घंटे तक बिना सोए ट्रेन का इंतजार करना पड़ा। जब जाकर घर वापसी के ट्रेन में बैठने को मिला। रास्ते भर जिनके पास खाने के लिए कुछ नहीं था उनको खाने पीने के लिए भी तरसना पड़ गया।
कानपुर (यूपी) से आई श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार प्रत्येक मजदूर की यही स्थिति रही। इस बीच ट्रेन के करीब 6 से 7 घंटा देरी से पहुंचने पर भीषण गर्मी ने हालत खराब कर दी। शुक्रवार को बांदा से श्रमिक स्पेशल ट्रेन दुर्ग पहुंची। इस बीच अव्यवस्था देखी गई। प्रशासन की इसी अनदेखी के चलते कवर्धा और बेतूल जाने वाले श्रमिक अपने-अपने जिला के निकटतम स्टेशन पर उतरने की जगह अंतिम स्टेशन दुर्ग पहुंच गए। जानकारी होने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें घर वापसी की जगह क्वारेंटाइन सेंटर भेजने के आदेश जारी कर दिया। 
बिना जांचे बैतूल जाने वाले को दुर्ग के लिए बिठाया
घर वापसी की आस में ट्रेन में बैठने वाला बैतूल निवासी संतोष मंडलेकर दुर्ग स्टेशन पहुंचकर बदहवास हो गया। अधिकारियों के पूछने पर ये तक नहीं बता पा रहा था कि वो किस स्टेशन से ट्रेन में बैठा है। केवल बिलासपुर से पहले के स्टेशन से बैठने की जानकारी दे रहा था। निरक्षर होने की वजह से उसे नहीं पता था कि कौनसी ट्रेन कहां जाएगी। पूछ कर बैठ गया था।

एससी के आदेश के बाद भोजन व पानी के इंतजाम
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्टेशनों में भोजन व पेयजल के इंतजाम किए गए हैं। बावजूद यह सुविधा नाकाफी साबित हो रही है। स्टेशनों में पर्याप्त भोजन नहीं पहुंचने की वजह से सभी श्रमिकों तक भोजन नहीं पहुंच रहा। इसके अलावा स्टेशनों में ठहराव कम होने की वजह से श्रमिकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। आदेश पर भी कोई गंभीरता नहीं है।

स्टेशन तक पहुंचने के लिए नहीं किया गया प्रबंध
घर वापसी के लिए भूख और प्यास को सहन करने वाले मजदूरों के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के काफी राहत मिली। लेकिन उसके स्टेशन तक पहुंचने के लिए अभी भी किसी भी प्रदेश के शासन-प्रशासन की ओर से कोई इंतजाम नहीं किए हैं। इसके चलते स्टेशन तक ही पहुंचने के लिए श्रमिकों को कई-कई दिनों तक पैदल चलकर आना पड़ रहा है।

कानपुर का श्रमिक भाटापारा की जगह पहुंचा दुर्ग स्टेशन
इससे पहले तक बेमेतरा के श्रमिकों को उनके जिले में भेजने के लिए जिला प्रशासन ने व्यवस्था कर रखी थी। इसके चलते अधिकतर ट्रेन में आए श्रमिक दुर्ग स्टेशन पर ही उतरे। लेकिन अब उन्हें भाटापार स्टेशन से बेमेतरा भेजा रहा है। इसी गफलत की वजह कानपुर से आए गिरावन साहू भाटापारा की जगह दुर्ग पहुंच गया। इस दौरान स्टेशन पर 14 मजदूर दुर्ग पहुंचे।

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