आंकलन परीक्षा:जिले के 56 हजार 827 छात्र पिछली कक्षाओं के प्रश्न तक हल नहीं कर पाए, अयोग्य साबित

दुर्ग9 दिन पहले
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  • जिले के प्राइमरी-मिडिल स्कूल के करीब 1 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों ने दिया था पेपर

कोरोनाकाल के दौरान 15 महीने तक सरकारी स्कूल बंद रहे, जिसका नतीजा बेहद चौकाने वाला है। स्कूल खुलने के बाद एससीईआरटी और डीपीआई ने पहली से आठवीं तक के बच्चों का बेस लाइन आंकलन टेस्ट करवाया है।

इस टेस्ट में दुर्ग जिले के 926 प्राइमरी व मिडिल स्कूल के 1 लाख 3 हजार 813 विद्यार्थियों का आंकलन किया गया, जिसमें से 55 प्रतिशत यानी 56 हजार 827 विद्यार्थी अपनी कक्षाओं के अनुरूप नहीं पाए गए हैं। इस चौकाने वाले खुलासे के बाद अब ऐसे विद्यार्थियों को उस कक्षा के अनुरूप लाने के लिए फिर से प्लानिंग की जाएगी।

दुर्ग ब्लॉक के विद्यार्थियों की योग्यता पर प्रश्न चिन्ह: जिले के 3 ब्लॉक के स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों का आंकलन किया गया। दुर्ग ब्लॉक के 362 स्कूलों के 45696 विद्यार्थी इस टेस्ट में शामिल हुए, जिसमें 46.61 प्रतिशत विद्यार्थी ही योग्य मिले हैं। शेष 53.39 प्रतिशत यानी 24 हजार 395 विद्यार्थी कक्षा के अनुरूप नहीं पाए गए, जो पाटन और धमधा ब्लॉक से भी ज्यादा हैं।

पाटन ब्लॉक के 16377 विद्यार्थी निकले अयोग्य
पाटन ब्लॉक में 284 स्कूल के 28101 विद्यार्थियों ने आंकलन टेस्ट दिया। इस टेस्ट में 58.28 प्रतिशत यानी 16 हजार 377 विद्यार्थी पढ़ाई वाली कक्षा के स्तर के नहीं हैं। यहां 41.72 प्रतिशत यानी 11 हजार 724 विद्यार्थी, जिस कक्षा में पढ़ रहे हैं, उसके योग्य मिले हैं। इसे कोरोनाकाल में स्कूल नहीं खुलने का परिणाम मान रहे हैं। इस दौरान काफी असर पड़ा है।

धमधा का रिजल्ट 46 फीसदी से अधिक रहा
धमधा ब्लॉक के 274 प्राइमरी व मिडिल स्कूल के 30 हजार 16 विद्यार्थी आंकलन टेस्ट में शामिल हुए, जिसमें से 46.51 प्रतिशत यानी 13 हजार 961 विद्यार्थी ही कक्षा के अनुरूप पाए गए हैं। यहां 53.49 विद्यार्थी यानी 16 हजार 55 विद्यार्थी कक्षा के योग्य नहीं मिले। इसे लेकर शिक्षक सहित उनके अभिभावक भी परेशान दिखाई दे रहे हैं। छात्रों पर भी असर पड़ रहा।

6 हजार 478 विद्यार्थियों का आंकलन अभी बाकी
लोक शिक्षण संचालनालय ने समस्त जिलों के सभी स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों का आंकलन करने के निर्देश दिए हैं। दुर्ग जिले में कुल 926 प्राइमरी व मिडिल स्कूल में 1 लाख 10 हजार 291 बच्चे अध्ययनरत हैं, जिनमें से 1 लाख 3 हजार 813 बच्चों का आंकलन हो पाया है। 6 स्कूल के 6478 विद्यार्थियों की पोर्टल में इंट्री नहीं हो पाई है। इससे समस्या हो रही।

गणित, विज्ञान में ज्यादातर कमजोर
आंकलन टेस्ट में सबसे ज्यादा कमजोरी गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषयों में पाई गई है। गणित में 68 प्रतिशत बच्चे कक्षा के अनुरूप नहीं मिले हैं। विज्ञान में 67 प्रतिशत और अंग्रेजी विषय में 65 प्रतिशत बच्चे योग्य नहीं हैं। हिंदी, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत में भी विद्यार्थी कमजोर पाए गए हैं।

जानिए कब ली गई आंकलन परीक्षा
लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देश पर दुर्ग जिले में 30 सितंबर को कक्षा पहली, दूसरी, तीसरी और छठवीं के विद्यार्थियों का आंकलन टेस्ट लिया गया। एक अक्टूबर को कक्षा चौथी, पांचवीं, सातवीं और आठवीं के बच्चों ने यह परीक्षा दी, जिसके परिणाम जारी हुए हैं।

एक्सपर्ट व्यू: अब तक विद्यार्थी फेल-पास होते रहे
एससीईआरटी के असिस्टेंट डॉयरेक्टर योगेश शिवहरे बताते हैं कि पहली बार प्राइमरी और मिडिल स्कूल के बच्चों का आंकलन टेस्ट लिया गया है। इसके पहले तक बच्चों को शिक्षा के अधिकार के तहत फेल या पास का ही रिजल्ट मिलता रहा है। दक्षता परखे जाने से अब उन्हें योग्य बनाने का काम किया जाएगा।

अयोग्य विद्यार्थियों के लिए प्लान किया गया तैयार
विषय के हिसाब से कंटेंट:
एससीईआरटी ने अयोग्य विद्यार्थियों के लिए प्लान बनाया है। ऐसे बच्चों को उपचारात्क शिक्षा दी जाएगी। मसलन चौथी कक्षा का बच्चा गणित विषय में दूसरी कक्षा के अनुरूप मिला है। तो ऐसे बच्चों को दूसरी और तीसरी कक्षा के इस विषय का कंटेट एससीआरटी द्वारा भेजा जाएगा। इस कंटेट के हिसाब से शिक्षक ऐसे बच्चों को वर्तमान कक्षा के योग्य बनाएगा। इससे छात्रों को लाभ होगा।

शॉर्ट कोर्स का मॉड्यूल तैयार: एनसीईआरटी ने कक्षा आठवीं तक शॉर्ट कोर्स का मॉड्यूल तैयार किया है। इस मॉड्यूल में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत विषयों की शिक्षण सामग्रियां हैं। इससे वर्तमान कक्षा और पिछली कक्षाओं के हिसाब से दक्षता हासिल करने में मदद मिलेगी। हर 15 दिन में शिक्षक टेस्ट लेकर उनकी कमजोरी को परखेगा।

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