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लापरवाही:पहले चरण में दुर्ग और धमधा से निकले 65% बच्चे कुपोषित

दुर्गएक दिन पहले
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  • सुपोषण अभियान का दुर्ग जिले में है बुरा हाल
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जिले में सुपोषण अभियान दो चरणों में शुरू किया गया है। पहला चरण समाप्त हो चुका है। इसमें धमधा व दुर्ग शहरी दो ऐसे परियोजना क्षेत्र हैं, जहां कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ गई है। वह भी चलाए गए अभियान के दौरान इस बात का खुलासा हुआ है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सर्वे के बाद 65 फीसदी तक बच्चे कुपोषित मिले हैं।
इधर शनिवार से दूसरे चरण की शुरुआत कर दी गई है। जबकि पहले चरण दो परियोजना क्षेत्र कुपोषण सुधार में फिसड्डी साबित हुए हैं। खास बात यह है पूरे जिले में 6 से 54 माह तक के बच्चों में कुपोषण बढ़ा है। 54 फीसदी तक बच्चे कुपोषित मिले हैं। इन सबके बीच अब विभाग का तर्क है, कि नए कुपोषण के नए मामले में सामने आने की वजह से यह संख्या बढ़ी नजर आ रही है।
पहले चरण में मिले जिले में 10,732 बच्चे कुपोषित
महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में कुल 10 हजार 732 कुपोषित बच्चे हैं। पिछले साल सीएम भूपेश बघेल ने इसमें रुचि दिखाकर छह माह का विशेष अभियान शुरू किया। इसके तहत जिलेभर की आठ परियोजनाओं में करीब सवा दो करोड़ रुपए कुपोषण अभियान पर खर्च किए गए। इसके तहत दुर्ग शहर में 1603 बच्चों को कुपोषण की श्रेणी में रखा गया।

दुर्ग शहर और धमधा की स्थिति सबसे खराब
दुर्ग शहरी परियोजना में सुपोषण सुधार 35 फीसदी, धमधा में 37 फीसदी, जामगांव आर में 40 फीसदी, दुर्ग ग्रामीण में 42.38, पाटन में 42.88 फीसदी, अहिवारा में 47 फीसदी, भिलाई-2 में 49 फीसदी, भिलाई-1 में 58 फीसदी बच्चों में कुपोषण का स्तर कम हुआ। कुल 10 हजार 732 बच्चें में से 4 हजार 998 बच्चे सामान्य श्रेणी में आए। जिले में 44 फीसदी सुधार हुआ।

फोकस वर्किंग के बाद भी अभियान हुआ फेल
जिले में सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे दुर्ग शहरी परिजनों में हैं। गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 231 और मध्यम की 861 है। अभियान के तहत शासन से आई राशि का एक बड़ा हिस्सा इसी परियोजना में खर्च हुआ। लेकिन लगातार 6 माह तक चले अभियान के बाद केवल 62 बच्चे गंभीर से मध्यम श्रेणी में पहुंच सके। फोकस वर्किंग की गई। बावजूद अभियान फेल हो गया।

भिलाई में सुपोषण का प्रतिशत रहा है बेहतर
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, भिलाई-एक परियोजना में लगभग 1500 बच्चों का चयन हुआ, जिसमें से 907 बच्चे सामान्य श्रेणी आए। इसके चलते इस परियोजना में सुधार का प्रतिशत करीब 58 फीसदी रहा। इसके बाद भिलाई-2 परियोजना में करीब 49 फीसदी बच्चों के कुपोषण स्तर में सुधार हुआ। यहां 412 बच्चों में से 205 बच्चों का कुपोषण दूर हुआ।

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