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सुविधा:नालों के गहरीकरण से वॉटर लेबल बढ़ा

दुर्ग14 दिन पहले
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  • पाटन के 9 गांवों के नालों में किया गया प्रयोग, 40 गांवों को हुआ फायदा

पाटन के 9 गांव ऐसे हैं, जहां नालों की सफाई और गहरीकरण से खेती को बड़ा फायदा पहुंचा है। यहां चना और गेहूं की फसल को पर्याप्त पानी पहुंच पा रहा है। नरवा योजना के तहत तैयार किए गए प्रोजेक्ट से 40 गांवों का भूजल रिचार्ज हो गया है। इससे किसानों के बोर से पर्याप्त पानी निकल रहा है। इस पानी का उपयोग किसान खेत पर कर पा रहे हैं। जिला पंचायत के सीईओ सच्चिदानंद आलोक ने बताया कि इसके लिए पहले प्लानिंग की गई। सभी नालों में लंबे समय से गाद जमी हुई थी, इसे साफ किया गया।

कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे के निर्देश में की गई
इस पूरे प्रोजेक्ट की प्लानिंग डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने की। उनके निर्देश पर इसकी स्वीकृति ली गई और काम शुरू कराया गया। पहले नालों को ट्रीटमेंट के लिए चयनित किया गया। स्थानीय जरूरतों के मुताबिक नरवा के परंपरागत स्ट्रक्चर विभाग द्वारा तैयार किया गया। यह संरक्षण रिज टू वैली सिद्धांत के आधार पर किया गया।

पाटन ब्लाक में लगातार बनाए जा रहे चेक डेम
पाटन ब्लाक में लगातार चेक डेम का निर्माण किया जा रहा। 30 नग बोल्डर चेक डेम कम डाइक, 26 चेयक डेम, लूज बोल्डर चेक डेम 31 नग, सिल्ट ट्रैप 8 नग एवं एक ट्रैंच का निर्माण गांव में किया गया है। इसका भी किसानों लाभ मिला।

चना, सरसो और गेहूं की हो रही खेती, मिल रहा पानी
नालों के किनारे लगे खेतों में किसान गेंहूँ, चना, सरसों और सब्जी का भरपूर उत्पादन कर रहे हैं। नरवा ट्रीटमेंट के 334 कार्य पाटन ब्लाक में स्वीकृत किए हैं।

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