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खरीफ की फसल:जिले में 35 दिन से ज्यादा पिछड़ गई खेती क्योंकि अब तक न खाद मिला न ही बीज

दुर्गएक महीने पहले
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जिले की सभी सहकारी समितियों में बीज का भंडारण किया जा रहा है। - Dainik Bhaskar
जिले की सभी सहकारी समितियों में बीज का भंडारण किया जा रहा है।

जिले में लंबे समय बाद ऐसा हुआ है जब खरीफ की फसल की खेती का समय 35 दिन ज्यादा गुजर गया है, और शुरुआत नहीं हो पाई है। कोरोना संक्रमण की वजह से लगने वाले लॉकडाउन ने ऐसे हालात बना दिए हैं। खरीफ फसल का सीजन शु्रू हो चुका है, लेकिन किसानों के पास न न खाद है और न ही बीज।

लोन के लिए उन्हें परेशान होना पड़ रहा, बैंक या तो बंद हैं, या फिर वहां से जानकारी नहीं मिल पा रही। सीजन में अग्रिम उठाव करने से किसानों को छूट मिलती है। ब्याज नहीं चुकाना पड़ता। पिछले साल के कोरोना काल में किसानों ने इस 35 दिन की अवधि में 38 प्रतिशत खाद-बीज का उठाव कर चुके थे। वहीं 80 करोड़ का लोन ले लिए थे। किसानों को इस सीजन में कितना लोन बांटा जाएगा, यह भी तय नहीं।

समितियों से बीज का एक दाना भी नहीं बंटा इस साल
सहकारी समितियों से प्रमाणित बीज किसान खरीदते हैं। इसलिए शुरुआत में इस साल धान बीज 21,042 क्विंटल का भंडारण किया गया है। जिसमें से एक दाना भी किसानों को नहीं बंटा। पिछले साल इस समय तक 11 हजार 35क्विंटल धान का बीज यानी 51 प्रतिशत उठावहो चुका था।

लोन नहीं उठा पाए किसान अभी भटकना पड़ रहा
पिछले साल जिले के 95,519 किसानों ने धान बेचकर कर्ज चुकाए थे। कर्ज चुकाने वाले इन किसानों को एक अप्रैल से खरीफ फसल के लिए फिर से लोन देते। वह भी बिना ब्याज के। इस बार 35 दिन हो गए हैं एक भी किसानों को लोन नहीं मिला है। इतने दिनों में 80 करोड़ लोन मिल जाता था।

देरी से किसानों को नुकसान
एक अप्रैल से लोन निकालकर ही खाद और बीज खरीदते हैं। कुल लोन में 60% नगद और 40 % खाद, बीज व दवाई के लिए मिलता है। अप्रैल से सितंबर तक ब्याज देना नहीं पड़ता है। लेकिन एक महीने जल्द लोन पटाना होगा।

आज से वितरण शुरू करेंगे
हमने समितियों में खाद व बीज का भंडारण करवा दिया है। लॉकडाउन में रियायत देने के बाद किसान सामान ले जा सकते हैं।
-एसएस राजपूत, उपसंचालक कृषि

छूट दिया जाना चाहिए
किसानों को लॉकडाउन में 35 दिनों का नुकसान हुआ है। नुकसान को आगे बढ़ाकर लोन जमा करने व सामान लेने छूट देना चाहिए।
-झबेन्द्र भूषण, प्रगतिशील किसान संघ

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