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नाफरमानी:कोरोना मरीजों से अस्पतालों ने 13.79 लाख ज्यादा वसूले, आदेश के बाद भी नहीं लौटाए

दुर्गएक महीने पहले
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  • दो अस्पतालों के मरीजों के पैसे वापस करने के लिए खुद कलेक्टर ने जारी किया था आदेश
  • खानापूर्ति : किसी भी मामले में हेल्थ विभाग की जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी

कोरोनाकाल में शहर के निजी अस्पतालों ने भर्ती मरीजों के इलाज के नाम पर निर्धारित से कहीं ज्यादा की राशि वसूली। प्रशासन द्वारा गठित जांच टीम ने इसका खुलासा किया है। आठ अस्पतालों ने कोरोना मरीजों से 13.79 लाख रुपए ज्यादा चार्ज किया।

इन अस्पतालों की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर दो अस्पतालों को कलेक्टर ने 1.79 लाख वापस करने का आदेश जारी किया। एक महीने बाद भी इस आदेश का पालन नहीं हो पाया है। इसके अलावा छह अन्य अस्पतालों में 12 लाख रुपए की ज्यादा बिलिंग कर लिए गए। इसमें जांच कमेटी का गठन किया गया है, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ी है। जबकि शिकायतों की फेहरिस्त लगातार बढ़ती जा रही है। जबकि पीड़ित मरीजों का कहना है कि वे लगातार स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के तमाम अधिकारियों तक आए दिन आवेदन दे रहे हैं। लेकिन हर दफा कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें टाल दिया जाता है।

इस तरह अस्पतालों की शिकायत आगे नहीं बढ़ी
स्वास्थ्य विभाग से मरीजों व उनके परिजनों से अस्पतालों के खिलाफ शिकायत की है। सांई नगर उरला निवासी तृप्ति साहू ने अपने पति स्व योगेश कुमार साहू को भिलाई तीन के हॉस्पिटल में कोरोना के इलाज के लिए भर्ती करवाया था। 2 जून को जांच आदेश दिए। सेक्टर 6 भिलाई निवासी कमलचंद जैन के शिकायत पर सीएमएचओ ने 24 मई को जांच के आदेश दिए। डॉ अर्चना मैथ्यू की शिकायत पर भी 24 मई को जांच आदेश दिए हैं। कादंबरी नगर दुर्ग निवासी विनोद सचदेव की मां माधुरी सचदेव के इलाज के दौरान मौत के मामले में 27 मई को जांच आदेश जारी हुआ। महावीर नगर दुर्ग निवासी विनोद जैन के पिता प्रकाशचंद्र जैन के इलाज के दौरान मौत के मामले में 4 मई को जांच आदेश दिया गया। अभी तक उसकी जांच ही पूरी नहीं हुई है।

जांच कमेटी बनाई पर किसी में कार्रवाई नहीं हुई
छह अस्पतालों के खिलाफ सीएमएचओ डॉ गंभीर सिंह ठाकुर ने जांच के आदेश दिए। आदेश में जांच टीम को 5 दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने कहा गया है। उसके बाद भी महीने हो गए जांच ही नहीं हो पाई है। जांच टीम में डीएचओ डॉ. सतीश कुमार मेश्राम, डॉ. आरके खंडेलवाल, डॉ.केके जैन,डॉ. अर्चना चौहान, डॉ.संजय बालभेंद्रे, डॉ. पीयाम सिंह व सहायक ग्रेड दो आरएस बघेल हैं।

जानिए, क्या कहना है पीड़ितों का, जिनसे निजी अस्पतालों ने वसूला अतिरिक्त शुल्क
केस-1.
जांच में 54 हजार ज्यादा लेने की बात सामने आई: रिसाली निवासी सत्यव्रत शर्मा ने बताया कि मेरी पत्नी माया शर्मा को 20 मार्च को कोरोना के इलाज के लिए भर्ती कराया। 3 अप्रैल को पत्नी की मौत हो गई। अस्पताल ने 4,04796 रुपए का बिल थमाया। ज्यादा बिल लेने की शिकायत की। कलेक्टर ने 15 मई को अस्पताल प्रबंधन को आदेश दिया कि 54,060 रुपए ज्यादा लिया।

केस-2. 2 दिन आईसीयू में रहा और बिल 10 दिनों का थमया: रविशंकर सिंह ने बताया कि दुर्ग के अस्पताल में 7 मार्च 2021 को भर्ती करवाया गया।। 18 मार्च को डिस्चार्ज हुआ। दो दिनों तक आईसीयू में रहा लेकिन बिल में 10 दिन आईसीयू में होना बताकर प्रतिदिन 10 हजार रुपए के हिसाब से 1 लाख रुपए का बिल दिया गया। बिल में रूम का चार्ज एक लाख 12 हजार 400 रुपए लिया गया।

केस-3. सीएम हाउस में की शिकायत: सुपेला निवासी रमेश यादव ने बताया कि कोरोना के इलाज के लिए 5 अप्रैल की रात हॉस्पीटल में में भर्ती हुआ। 13 मार्च तक इलाज चला। इलाज खर्च का अस्पताल द्वारा करीब दो लाख रुपए का बिल दिया। सरकार के निर्धारित दर से ज्यादा पैसा लेने की शिकायत मुख्यमंत्री से की। 7 मई को सीएम हाउस से कलेक्टर दुर्ग को पत्र लिखकर 1.25 लाख रुपए वापस करने की अनुशंसा की। लेकिन पैसा नहीं मिला।

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