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सुपोषण अभियान की हकीकत:दुर्ग, धमधा और पाटन में अकेले 3366 तो पूरे जिले में 3 महीने के अंदर 7,150 कुपोषित मिले

दुर्ग6 दिन पहले
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  • ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा शहरी इलाकों में ज्यादा कुपोषित बच्चे, दुर्ग शहर में 1171 कुपोषित

पिछले साल की तरह इस बार भी कुपोषित बच्चे अंचल से ज्यादा शहरी क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों में ही मिले हैं। शहरी इलाकों में दुर्ग शहरी परियोजना में कुपोषण का स्तर सबसे ज्यादा दर्ज किया गया है। ग्रामीण क्षेत्र की परियोजनाओं में इस बार भी धमधा में संख्या है। ये स्थिति उस समय निर्मित हो रही है, जब शहरी क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को अधिक सुविधा दिए जाने का दावा किया जा रहा है। शासन के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास प्रति बच्चे पर 750 से 800 रुपए खर्च करता है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के दूसरे चरण में जिलेभर से कुल 7,150 कुपोषित बच्चों की सूची तैयार की गई है। हालांकि पिछले साल की अपेक्षा कुल बच्चों की संख्या में थोड़ी कमी जरूर आई है। लेकिन जिस तरह पिछले साल परियोजनाओं और उनके अंतर्गत आने वाली सेक्टरों की स्थिति थी। ठीक उसी प्रकार दूसरे फेज में भी सेक्टर और परियोजनाओं में बच्चे मिले है। अंतर केवल बच्चों की संख्या का आया है।

कुपोषित बच्चों की संख्या (जुलाई से सितंबर)

  • परियोजना - कुपोषित बच्चे
  • दुर्ग शहरी - 1171
  • धमधा - 1137
  • पाटन - 1058
  • दुर्ग ग्रामीण - 883
  • जामगांव - 994
  • अहिवारा - 880
  • भिलाई-1 - 698
  • भिलाई-2 - 329

दावा केंद्रों में मिल रहा गर्म भोजन: मंगलवार से 3 से 6 साल के बच्चों व गर्भवती महिलाओं को गर्म भोजन दिया जा रहा।

3 महीने की रिपोर्टिंग में 7 हजार के पार हुई संख्या
मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान का पहला चरण इस साल मार्च महीने में समाप्त हो गया। इसके बाद जुलाई से दूसरे चरण में कुपोषित बच्चों की डेटा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई। ऐसे में जुलाई, अगस्त और सितंबर की की रिपोर्टिंग के बाद ही आठों परियोजनाओं में कुल बच्चों की संख्या 7 हजार 150 तक पहुंच गई है। जबकि पहले चरण के छह महीने के अभियान में इनकी संख्या 10 हजार 732 रही।

पोटियाकला सेक्टर में सबसे अधिक मिले हैं कुपोषित
दुर्ग शहरी परियोजना के अंतर्गत 220 आंगनबाड़ी केंद्रों को 9 सेक्टर में बांट रखा है। सितंबर महीने की रिपोर्टिंग में 1171 कुपोषित दर्ज किए गए हैं। लेकिन इन सेक्टरों हमेशा सबसे ज्यादा संख्या पोटियाकला सेक्टर की रहती है। इस दफा भी सेक्टर में सबसे ज्यादा 199 कुपोषित बच्चे दर्ज हैं। इन के बाद उरला में 180, शिवपारा में 167 और नयापारा सेक्टर में 158 कुपोषित बच्चे दर्ज हैं। यही स्थिति पहले चरण के सुपोषण अभियान में भी रही। पहले भी पोटिया में कुपोषित की संख्या अधिक रही।

दुर्ग के अलावा पाटन और धमधा में बढ़े हैं कुपोषित
सुपोषण अभियान के पहले चरण में सबसे ज्यादा कुपोषित दुर्ग शहरी में रहे। इसके बाद भिलाई- एक परियोजना और तीसरे नंबर धमधा था। इस दफा दुर्ग शहरी परिजन पहले की तरह टॉप पर है। लेकिन दूसरे पायदान पर धमधा में 1137 और तीसरे पर पाटन 1058 कुपोषित मिले। छठवें नंबर पर जामगांव चौथे नंबर पर आ गया।

50 फीसदी हुए सुपोषित, फिर भी संख्या अधिक
महिला एवं बाल विकास विभाग की सबसे छोटी परियोजना भिलाई-दो है। इसमें कुल 90 हैं। पिछले सुपोषण अभियान में कुपोषण का रिकवरी रेट 50 फीसदी रहा। कुल 412 बच्चों में से 205 सामान्य में पहुंचे। लेकिन इसके बाद भी मात्र तीन महीने में परियोजना में 329 बच्चें दर्ज हो चुके हैं। केंद्रों से आहार का वितरण किया जाता है।

हर महीने कुपोषितों की पहचान की जा रही...
"प्रत्येक माह कुपोषित बच्चों को खोजकर रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसके चलते संख्या में लगातार इजाफा होता रहता है। बाकी किसी केंद्र के संबंध में शिकायत आएगी तो कार्रवाई की जाएगी।"
-विपिन जैन, डीपीओ महिला एवं बाल विकास विभाग

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