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मौसम:ऐसी बदली छाई कि दोपहर 2.25 बजे शाम 6 बजे जैसा अंधेरा

जांजगीरएक महीने पहले
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  • रविवार को 50 मिलीमीटर बारिश, किसान बोले: ज्यादा पानी गिरना अब फसल के लिए नुकसानदायक क्योंकि बीमारी बढ़ेगी

कांसी के फूलने के बाद बारिश की संभावना कम रहती है, जिले में भी औसत बारिश होने की संभावना 15 सितंबर तक रहती है। सितंबर में ऐसा दूसरी बार हुआ जब बादल बरसे। 12 सितंबर को जिले में 3 मिमी बारिश हुई थी। जबकि 20- 21 सितंबर के दरमियान अच्छी वर्षा हुई। इन चौबीस घंटे में जिले में 50 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। यह वर्षा जिले के किसानों के लिए नुकसानदायक भी है तो उन क्षेत्रोें के लिए जरूरी है जहां अभी नहर का पानी नहीं जा पा रहा है। सितंबर माह में बारिश जिले में नहीं हो रही थी। लेकिन उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उत्तरी ओडिशा के बीच निम्न दाब का क्षेत्र बना होने के कारण रविवार से जिले में फिर से बारिश शुरू हो गई है। रविवार की रात तक मौसम खुला था। किंतु देर रात 3 बजे के आसपास बादलों की तेज गड़गड़ाहट के साथ बारिश शुरू हो गई। इस दौरान करीब दो घंटे तक अच्छी बारिश हुई। सुबह 5 बजे बारिश जांजगीर में थम गई थी। इसके बाद फिर ऐसा लगा कि बारिश नहीं होगी। लोगों को अपने दफ्तर जाने, दुकानें खोलनें में कहीं कोई दिक्कत नहीं हुई। दोपहर एक बजे के बाद से फिर काले बादल छाने लगे। बादलों ने चारों ओर से घेरा बना लिया। दोपहर 2:25 बजे हल्की गड़गड़ाहट शुरू हुई और फिर बादल बरसने लगे। अंधेरा ऐसा हो गया कि दोपहर में ही शाम 6 बजे जैसा अंधेरे का अहसास होने लगा। फिर बारिश हुई जो करीब एक घंटा तक चली।

जानिए कहां कितनी बारिश

  • जांजगीर - 59.3
  • अकलतरा - 50.3
  • बलौदा - 42.2
  • नवागढ़ - 38.3
  • शिवरीनारायण - 13.6
  • पामगढ़ - 40.3
  • चाम्पा - 32
  • सक्ती - 84
  • जैजैपुर - 60.5
  • मालखरौदा - 64.4
  • डभरा - 65

पानी नुकसानदायक क्योंकि बीमारी बढ़ेगी
ग्राम कोसला के किसान संतोष तिवारी, रूपचंद साहू, जवाहर साहू, लोकनाथ पटेल ने बताया कि पामगढ़ क्षेत्र में खेतों में पर्याप्त पानी नहर से मिला है। इसलिए अभी इस पानी की जरूरत नहीं थी। क्योंकि इन दिनों खेतों में चरपा, माहो व अन्य बीमारियां हो रही है। इन बीमारियों से फसल को बचाने के लिए किसानों को दवा का छिड़काव करना पड़ रहा है। बारिश होने से दवा बह जाती है। वहीं धूप भी नहीं निकलने से कीट पतंगों को बढ़ने का मौका मिलता है। किसानों के अनुसार दवा का छिड़काव करने के साथ ही पर्याप्त तेज धूप पौधों को मिलने से असर दोगुना हो जाता है, वहीं बारिश होने से नुकसान होता है।
दवा छिड़काव के 4 घंटे बाद बारिश हो तो नुकसान कम
डीडीए एमआर तिग्गा का कहना है कि यह बारिश उन क्षेत्रों में जहां पानी नहीं पहुंच रहा है, वहां के किसानों के लिए अमृत के समान है। लेकिन जहां पानी पर्याप्त है वहां यदि बीमारी या किट प्रकोप है तो थोड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। श्री तिग्गा का कहना है कि किसानों को इतना अनुभव रहता है कि कब दवा का छिड़काव करना है व कब नहीं ये वे अच्छी तरह से जानते हैं। फिर भी यदि दवा का छिड़काव किया है और चार घंटे भी बारिश न हो तो दवा का असर पौधों पर होगा। नहीं तो पानी के साथ दवा बह जाती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि धूप निकलने पर ही दवा का छिड़काव करें।

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