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बिजली आपूर्ति प्रभावित:जरूरत के समय पर्याप्त बारिश नहीं, सिंचाई में 470 मेगावॉट बिजली की खपत, 20 साल का रिकॉर्ड टूटा

दुर्ग16 दिन पहले
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बोरई के किसान झबेन्द्र भूषण के खेत की यह तस्वीर है। यहां कृषि पम्प से पानी लेकर रोपाई हो रही है। इसके ठीक बाजू के अन्य खेत पूरी तरह से सूख हुए हैं, जो बारिश के पानी पर निर्भर हैं। - Dainik Bhaskar
बोरई के किसान झबेन्द्र भूषण के खेत की यह तस्वीर है। यहां कृषि पम्प से पानी लेकर रोपाई हो रही है। इसके ठीक बाजू के अन्य खेत पूरी तरह से सूख हुए हैं, जो बारिश के पानी पर निर्भर हैं।
  • लोड बढ़ने से शहरी इलाके में ट्रिपिंग बढ़ी, ग्रामीण इलाके में घंटों बिजली की अघोषित कटौती

पिछले कई दिनों से बारिश नहीं होने से खेतों में पानी नहीं है। दरारें पड़ने लगी है। फसल को बचाने किसानों ने दिन-रात कृषि पंप का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। 20 साल में पहली बार ऐसा हुआ है जब जिले में रिकॉर्ड 470 मेगावाट बिजली की खपत हुई है। सामान्य दिनों में अधिकतम बिजली खपत रोजाना 380 मेगावाट की है। इस तरह इन दिनों हालात ने रोजाना 90 मेगावाट बिजली खपत बढ़ गई है।

छत्तीसगढ़ बनने के बाद अब तक का सबसे मेगा पावर लोड क्रश है। भीषण गर्मी के दिनों में भी बिजली की अधिकतम खपत 15 मेगावाट की रही है। इधर बिजली खपत बढ़ने के चलते शहरी क्षेत्र में ट्रिपिंग की समस्या बढ़ गई है। ओवर लोड वाले ट्रांसफार्मर में अधिक परेशानी है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों की अघोषित बिजली शुरू कर दी गई है।

दिक्कत : पानी नहीं मिलने से फसल के बर्बाद होने का खतरा भी बढ़ रहा

मानसून की बेरूखी ने बढ़ाई चिंता, कृषि पंप पर ही किसानों की निर्भरता बढ़ी
दुर्ग जिले में सबसे ज्यादा पानी की खपत धान फसल के लिए जरूरत पड़ती है। मानसून की बेरूखी से परेशान किसान अब पानी के लिए आत्मनिर्भर बनते जा रहे हैं। रोपाई का सीजन है और इसके लिए किसानों को भरपूर पानी चाहिए। इसलिए जिले के 35,033 कृषि पंपों से पानी का दोहन किया जा रहा है। दिन-रात किसानों को कृषि पंप चलाने पड़ रहे हैं। इससे बिजली की रिकॉर्ड खपत होने लगी है।

शहर में सिर्फ 10 मेगावाट और ग्रामीण क्षेत्रों में 80 मेगावाट तक खपत बढ़ी
बारिश नहीं होने की वजह से शहरी इलाके में भी लोग कूलर-पंखे इस्तेमाल करने लगे हैं। ग्रामीण इलाके में खेती के लिए पंप का उपयोग बढ़ा है। शहरी इलाके में इन दिनों रोजाना बिजली खपत 140 मेगावाट की है। जो सामान्य दिनों में 130 मेगावाट होती है। इस तरह 10 प्रतिशत खपत बढ़ी है। ग्रामीण इलाके मे खपत 330 मेगावाट हो रही है। सामान्यत: 230 मेगावाट रहती है।

लोड क्रशिंग का नतीजा ट्रिपिंग और बिजली गुल से लोग हो रहे परेशान
अचानक लोड क्रशिंग होने की वजह से विद्युत वितरण कंपनी को लोडिंग मैनेज शुरू करना पड़ा है। दुर्ग भिलाई सहित आउटर कालोनियों में ट्रिपिंग की समस्या बढ़ गई है। जैसे ही लोड बढ़ता है बिजली अचानक बंद हो जाती है। वहीं ग्रामीण इलाके में अघोषित बिजली बंद की जा रही है। ग्रामीण बताते हैं कि अंडा, नगपुरा, बोरई,जजंगिरी, जेवरासिरसा, उमरपोटी, पुरई, अहिवारा, गाड़ाडीह, रानीतराई, जामगांव आर, परसदा, मुरमुंदा, गोढ़ी, बोरी सहित अन्य गांवों में कई घंटों बिजली बंद हो रही है। रात में भी बिजली बंद हो रही है। जिसकी वजह से लोग खासे परेशान हैं।

लोड क्रशिंग का नतीजा ट्रिपिंग और बिजली गुल से लोग हो रहे परेशान
अचानक लोड क्रशिंग होने की वजह से विद्युत वितरण कंपनी को लोडिंग मैनेज शुरू करना पड़ा है। दुर्ग भिलाई सहित आउटर कालोनियों में ट्रिपिंग की समस्या बढ़ गई है। जैसे ही लोड बढ़ता है बिजली अचानक बंद हो जाती है। वहीं ग्रामीण इलाके में अघोषित बिजली बंद की जा रही है। ग्रामीण बताते हैं कि अंडा, नगपुरा, बोरई,जजंगिरी, जेवरासिरसा, उमरपोटी, पुरई, अहिवारा, गाड़ाडीह, रानीतराई, जामगांव आर, परसदा, मुरमुंदा, गोढ़ी, बोरी सहित अन्य गांवों में कई घंटों बिजली बंद हो रही है। रात में भी बिजली बंद हो रही है। जिसकी वजह से लोग खासे परेशान हैं।

इस तरह पिछड़ गई है खेती-किसानी, 35 फीसदी जगहों पर खेत सूखने लगे
दुर्ग जिले में इस बार 1.31 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की फसल ली गई है। जिसमें वर्तमान में केवल 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही रोपा लगाया जा सका है। पिछले साल इस समय तक 9.88 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में रोपा लगा चुके थे। इसी तरह पानी के अभाव में बियासी का काम भी शुरू नहीं हा़े पाया है।

रिकॉर्ड खपत दर्ज, कृषि पंपों का उपयोग ज्यादा, इसलिए शहरी क्षेत्र में दिक्कत
जिले में कई दिनों से बारिश नहीं हो रही है। इसकी वजह से किसान दिन-रात कृषि पंप का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिसकी वजह से दुर्ग जिले में राज्य बनने के बाद पहली बार रिकॉर्ड बिजली खपत हुई है।
-संजय पटेल, ईडी विद्युत वितरण कंपनी दुर्ग संभाग

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