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  • Preparation Starts In 200 Government Schools Of The District, Every Child Will Be Monitored About It; Chhattisgarhi Poems And Stories Will Be Taught In Schools

नया प्रयोग:जिले के 200 सरकारी स्कूलों में तैयारी शुरू, हर बच्चे की होगी इसे लेकर मॉनिटरिंग; स्कूलों में पढ़ाई जाएंगी छत्तीसगढ़ी कविताएं व कहानियां

दुर्ग20 दिन पहले
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इसे लेकर शिक्षकों ने नियमित बैठकें शुरू की। बच्चों को दे रहे जानकारी। - Dainik Bhaskar
इसे लेकर शिक्षकों ने नियमित बैठकें शुरू की। बच्चों को दे रहे जानकारी।

जिले के 200 सरकारी स्कूलों के बच्चों को धाराप्रवाह हिन्दी बोलने सिखाई जा रही है। एससीईआरटी ने नींव कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम के जरिए पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा के बच्चों को हिन्दी बोलने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए एक किट दिया गया है। इस किट के माध्यम से छत्तीसगढ़ी कविताएं व कहानियां भी पढ़ाई जाएंगी। बच्चों को हिन्दी में निपुण किया जाएगा। प्रदेशभर के स्कूलों में इसकी शुरूआत की गई है जिसमें दुर्ग जिले के 586 प्राइमरी स्कूलों में से 200 स्कूलों को मॉडल के रूप में शुरू किया जा रहा है।

किट में वर्क बुक उपलब्ध व पठन कार्ड भी उपलब्ध
किट में प्राइवेट स्कूलों की तरह सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए वर्क बुक दिया गया है। इस वर्क बुक में बच्चे हिन्दी की मात्रा सही उच्चारण के साथ लिखना सीखेंगे। इसके अलावा पठन कार्ड दिया गया है। इस कार्ड को जोड़कर हिन्दी का शब्द बच्चे बनाएंगे। हिन्दी की छोटी-छोटी कहानियां है जो केवल चार से पांच लाइन की है।

छत्तीसगढ़ी कविताएं और कहानियाें भी सिखाएंगे
जिले के सरकारी स्कूलों में प्राइमरी कक्षा के बच्चे छत्तीसगढ़ी में ही बात करते हैं। इसलिए छत्तीसगढ़ी का हिन्दी रूपांतरण कर बच्चों को सरल तरीके से सिखाने की कोशिश होगी। इसके लिए छत्तीसगढ़ी कहानियों और कविताओं की भी किताबें दी गई है। इस किताब में कविताएं दो से तीन लाइन की है। कहानियां भी बच्चों के हिसाब से लिखी गई है। इन कहानियों और कविताओं का हिन्दी रूपांतरण करके बच्चों को शिक्षक बताएंगे। साथ ही अन्य ट्रेनिंग भी देंगे। इसे लेकर शिक्षा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है।

पाटन के 88 स्कूलों से की गई अभियान की शुरुआत
पाटन के 88 प्राथमिक शालाओं के साथ बुनियादी भाषा को दक्ष बनाने हेतु नींव अधिगम संवर्धन कार्यक्रम संचालित किया गया। कोरोना की वजह से यह कार्यक्रम बंद हो गया था। अब शाला खुलने के साथ अकादमिक रूप से फिर से इसकी शुरूआत की गई। विद्यालयों को तथा पालकों को भी अनेक पठन सहायक सामग्री उपलब्ध कराई गई है। जिसका उपयोग सभी बच्चों के लिए हो रहा है। अभियान की शुरुआत कर दी गई है। ताकि बच्चों को इसकी जानकारी दे सकें। छत्तीसगढ़ी संस्कृति के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

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