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कोरोना ट्रेंड:गांव में 50% तक कम कर दिए क्वारेंटाइन सेंटर जबकि शहरी क्षेत्र में 30% तक बढ़े

दुर्ग10 महीने पहले
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ग्रामीण क्षेत्रों में 50 प्रतिशत क्वारेंटाइन सेंटर कम हो गए है। वहीं शहरों में सेंटर की संख्या 30 प्रतिशत बढ़ा दी गई है। प्रवासी श्रमिकों के नहीं आने की वजह से ग्रामीण सेंटरों में महज 493 लोग ही क्वारेंटाइन हैं। इधर शहरों में बाहरी लोग इतने आ रहे हैं कि पिछले 15 दिनों में ही 7 की जगह क्वारेंटाइन सेंटरों की संख्या 20 हो गई है।  यहां स्थिति यह है कि सप्ताहभर में पूरे सेंटर खाली हो जाएंगे। होम  क्वारेंटाइन भी खत्म हो गया है।  दो महीने पहले ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर आए और इसकी वजह से प्रशासन ने दुर्ग, पाटन और धमधा ब्लॉक में 295 क्वारेंटाइन सेंटर बनाए। वर्तमान में केवल 134 सेंटर ही बचे हैं। इस तरह 161 सेंटर बंद हो गए हैं। दुर्ग ब्लॉक में  केवल 10 और पाटन ब्लॉक में 5 सेंटरों में ही लोग क्वारेंटाइन हैं। धमधा में अभी भी 119 सेंटर में लोग क्वारेंटाइन हैं। संक्रमण के चलते जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक 4389 प्रवासी मजदूर क्वारेंटाइन हुए हैं। 

शहर में 4092 लोग अब भी क्वारेंटाइन में है
शहरों में कोरोना के हालात बिगड़ने लगे हैं। इन दिनों में ही 4092 लोग क्वारेंटाइन हुए हैं। प्रशासन ने पिछले 15 दिनों के भीतर  7 क्वारेंटाइन सेंटर को बढ़ाकर 20 किया है। 14 पेड क्वारेंटाइन सेंटर हैं। 2 अनपेड क्वारेंटाइन सेंटर और 4 बीएसएफ जवानों के लिए सेंटर बनाए हैं। पेड सेंटरों में 114 लोग  क्वारेंटाइन हैं। बीएसएफ के सेंटरों में 900 जवान क्वारेंटाइन है।

295 क्वारेंटाइन बनाए गए थे ग्रामीण इलाकों में

  • 161 क्वारेंटाइन सेंटर बंद हाे गए हैं जिलेभर में अब तक।
  • 05 सेंटर पाटन में है, जहां 12 लोग ही क्वारेंटाइन है। 
  • 10 सेंटर दुर्ग ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों में है, जहां 14 लोग है।
  • 119 सेंटर है धमधा ब्लॉक में, जिनमें 467 लोग क्वारेंटाइन है।
  • 02 लोग हर सेंटर में क्वारेंटाइन है औसतन जिले में। 
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