मिशन श्रमिक वापसी / स्पेशल ट्रेन बैंगलुरू से दुर्ग आई, एक दिन में सबसे ज्यादा 344 मजदूरों ने की घर वापसी

Special train came to Fort from Bengaluru, 344 laborers returned home the most in a day
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Special train came to Fort from Bengaluru, 344 laborers returned home the most in a day

  • आज सुबह साढ़े 9 बजे आएगी एक अन्य श्रमिक स्पेशल ट्रेन, लौट रहे 200 श्रमिक

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

दुर्ग. दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों को लाने वाली स्पेशल ट्रेनें लगातार देरी से पहुंच रही है। शुक्रवार को भी बेंगलुरू से चलकर बिलासपुर जाने वाली ट्रेन भी करीब 2 घंटा देरी से आई। करीब सवा दो बजे के निर्धारित से ट्रेन शाम 4.40 पर दुर्ग रेलवे स्टेशन पर पहुंची। इस दौरान 344 लोग ट्रेन से उतरे। 
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक 23 मई शनिवार की सुबह करीब 9.30 बजे एक अन्य ट्रेन पुणे से करीब 200 मजदूरों के लेकर दुर्ग स्टेशन पहुंचेगी। शुक्रवार को देरी की वजह से उनके इंतजार में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन का अमला भी खासा परेशान रहा। कब एक बजे से प्रशासन ने दूसरे जिलों के मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए बसें स्टेशन पर पहुंचा दी। इसी तरह स्वास्थ्य विभाग का अमला सुबह से मजदूरी की जांच के लिए मौके पर आकर बैठ गया। शाम करीब पौने पांच बजे ट्रेन के पहुंचते पर दुर्ग जिले के 19, बालोद के 53, बेमेतरा के 27, कवर्धा के 172, और राजनांदगांव के 73 मजदूर शामिल रहे। सभी की जांच के बाद उन्हें क्वारेंटाइन के लिए भेज दिया गया। सभी की स्क्रीनिंग हुई। इस दौरान उन्हें स्टेशन में ही इंतजार करना पड़ा। 
बेंगलुरू से आई ट्रेन में 301 मजदूर और 43 स्टूडेंट्स आए
शुक्रवार को जिले में आई स्पेशल ट्रेन में मजदूरों के साथ स्टूडेंट्स और किसी कारण फंसे लोगों की संख्या काफी रही। कुल 344 लोगों में 301 मजदूर और 43 स्टूडेंट्स व अन्य परिवार शामिल रहे। दुर्ग जिले में गैर मजदूरों की संख्या 6 रही, बेमेतरा के 3, बालोद के 13, कवर्धा के 14 और राजनांदगांव के 7 स्टूडेंट्स शामिल रहे।
प्लेटफॉर्म में ठहराव समय अधिक, इसलिए लेट है ट्रेनें
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, दूसरे राज्यों में फंसे श्रमिक व अन्य लोगों को लाने के लिए ही स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है। इसके चलते सभी के ट्रेन में चढ़ने के बाद ट्रेन अपने सोर्स  स्टेशन से रवाना होती है, लेकिन जांच के बाद ही स्टेशन पर प्रवेश कराया जाता है। इसके चलते जाने वाले लोगों को जल्दी आने की कहा जाता है।
पिछले दो सप्ताह में आने वाली 90 फीसदी ट्रेनें देरी से ही पहुंची
स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को पिछले दो सप्ताह से ट्रेनें लगातार ला रही है। इसमें से करीब 90 फीसदी ट्रेन कभी अपने निर्धारित समय पर स्टेशन नहीं पहुंची। हालांकि देरी के लिए अधिकारी दो वजह मान रहे हैं। एक तो मजदूरों के देरी से पहुंचा। दूसरा प्रत्येक स्टेशन पर ट्रेनों का स्टॉप निर्धारित नहीं होना। स्टेशन पर करीब 15 मिनट तक ट्रेन रुकी रहती है।

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