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बड़ी समस्या:नीलामी के नियम में उलझा परिवहन, जिले के 90 खरीदी केंद्रों में 6.15 लाख क्विंटल धान डंप

दुर्ग12 दिन पहले
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उतई के खरीदी केंद्र में भी बड़ी मात्रा मं धान डंप है। यहां कई बारियां फट चुकी है, धान बिखरा भी हुआ है। - Dainik Bhaskar
उतई के खरीदी केंद्र में भी बड़ी मात्रा मं धान डंप है। यहां कई बारियां फट चुकी है, धान बिखरा भी हुआ है।
  • लॉकडाउन की वजह से केंद्रों से नीलामी और परिवहन दोनों बंद, छूट का नहीं हुआ असर
  • पहली बार: 5 महीने के बाद भी नहीं हो पाया उठाव, समितियां भी हो रहीं परेशान

नीलामी के नियम में धान परिवहन उलझ गया है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि खरीदी के पांच महीने के बाद भी सभी 90 केंद्रों में 6.15 लाख क्विंटल धान डंप है। प्रशासन लॉकडाउन में धान परिवहन को छूट देने के बावजूद भी नीलामी और परिवहन दोनों बंद हैं।

समर्थन मूल्य से 200 से 500 रुपए प्रति क्विंटल धान का नीलामी रेट कम होने के बाद भी केंद्रों में पूरी धान की नीलामी नहीं हो पाई। सरकार द्वारा एक दिसंबर 2020 से 31 जनवरी 2021 तक धान खरीदी की गई थी। मोटा धान का समर्थन मूल्य 1868 रुपए प्रति क्विंटल और पतला धान का 1888 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदी की है। केवल 1.51 लाख क्विंटल धान हुआ नीलाम: जिले के 24 केंद्रों से नीलामी के लिए 65075 क्विंटल धान का स्टॉक रखा गया था।

इन समितियों से केवल 15100 क्विंटल धान ही नीलाम हो पाया। इस तरह अब भी नीलामी के लिए 49975 क्विंटल धान शेष हैं। नीलामी को रिस्पांस नहीं मिलते देख शासन ने मिलर्स को अप्रैल महीने तक बढ़ाया था। लेकिन उसके बाद भी धान इन केंद्रों में बचा हुआ है। इस स्थिति को देखते हुए अब अधिकारी नई प्लानिंग के लिए जुट गए हैं ताकि पूरा धान नीलाम हो सके।

इस नियम की वजह से केंद्रों में डंप पड़ा है धान
केंद्रों में धान का स्टॉक अधिक हैं और नीलामी की मात्रा कम हैं। इस स्थिति में मिलरों को पूरा धान उठाव के लिए कहा जा रहा है। जिसकी वजह से खरीदार कम कीमत में भी हाथ खींच रहे हैं। खरीदारों के मुताबिक जैसे एक केंद्र में 3000 क्विंटल धान नीलामी होनी थी। यहां केवल 1500 क्विंटल धान बचा है तो इस पूरे स्टॉक खरीदार को लेना है। इस वजह से यह स्थिति बनी।

उठाव नहीं होने से पीडीएस चावल बांटने होगी दिक्कत
केंद्रों में जो धान डंप है वह सार्वजनिक वितरण प्रणाली के हितग्राहियों को चावल के रूप में बांटा जाना है। धान का मिलिंग करने के बाद चावल पीडीएस के गोदाम में जमा होता है। यहां से जिले के 541 उचित मूल्य की दुकानों में 3 लाख 3 हजार 63 हितग्राहियों को चावल वितरण होता है। यदि धान का उठाव नहीं होता है तो हितग्राहियों को पीडीएस चावल बांटने में दिक्कत हो सकती है।

रखरखाव के कारण समितियों को नुकसान
केंद्रों में डंप धान का रखरखाव समितियों को करना पड़ रहा है। समितियों ने खरीदी के बाद और लॉकडाउन में भी चौकीदार रखे हुए हैं। डंप धान को चूहे व अन्य जीव जन्तु से क्षति पहुंच रही है। उठाव के दौरान धान की बोरियों में मात्रा का शार्टेज भी आता है। इस शार्टेज की भरपाई समितियों से शासन वसूल लेती है। इस तरह से समितियों को कई तरह की दिक्कतों का सामना अभी करना पड़ रहा।

लॉकडाउन की वजह से डीओ नहीं काटा जा रहा
लॉक डाउन होने की वजह से केंद्रों से धान उठाव के लिए डीओ भी कटना बंद हो गया है। 90 केंद्रों में से महज तीन केंद्रों का ही डीओ काटा गया है। केंद्र प्रभारियों के मुताबिक जहां नीलामी नहीं होनी है वहां डीओ नहीं कटा है।

पूरा स्टाक खरीदने की बाध्यता नहीं रखी गई है
नीलामी में पूरा स्टॉक ही खरीदना है। इसकी बाध्यता नहीं है। लॉकडाउन के कारण उठाव के लिए दिक्कतें आ रही है। शासन से मार्गदर्शन मांगा गया है। आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-सचिन भौमिक बघेल, डीएमओ

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