लापरवाही / खेतों में ही पैरा व नरवाई को जला रहे मिट्‌टी की उर्वरा क्षमता भी घट रही

The fertility of soil, which is burning para and narwai in the fields, is also decreasing
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The fertility of soil, which is burning para and narwai in the fields, is also decreasing

  • मिट्‌टी के साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं क्षेत्र के किसान

दैनिक भास्कर

Jun 02, 2020, 05:00 AM IST

गुरुर. ग्रामीण अंचल में किसान खेताें में पैरा व  नरवाई  को आग लगा रहे है। गुरूर ब्लाक में हार्वेस्टर व थ्रेसर से धान मिसाई करने के बाद खेतों में छोड़े गए पैरा को बेरोक-टोक आग के हवाले कर दिया जा रहा है। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि मिट्टी की उर्वरा क्षमता भी क्षीण होती है इसके अलावा चारों ओर आग की लपटें उठने से मवेशी भी इसका शिकार होते है। गुरूर सहित ग्राम तार्री, कुलिया, कनेरी, डोकला, दरगहन, पलारी, नरबदा, खर्रा, ठेकवाडीह, खैरवाही सहित अन्य ग्रामों मे किसान खुद पैरा व नरवाई में आग लगा रहे है। 
क्षेत्र में इन दिनों खेत में जगह-जगह आग की लपटें उठ रही है। हार्वेस्टर व थ्रेसर से धान मिसाई करने वाले किसान खेत में छोड़े गए पैरा को घर ले जाना नहीं चाहते और ना ही गौठान में पैरा दान करने रूचि ले रहे हैं इसके दुष्परिणाम भी देखने को मिल रहा है। खेतों में पैरा जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है।  इस संबंध में पंचायतों के माध्यम से गांवों में मुनादी भी कराई गई है, बावजूद खेत में पड़े पैरा को बेखौफ आग के हवाले कर रहे है। पूरे क्षेत्र में खेतों मे आग सहित धुआं का नजारा होता है। इस आगजनी से उठने वाले धुआं से पूरा वातावरण प्रदूषित तो होता है। वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी जेएस खेनगर ने बताया कि लगातार किसानों को पैरा व  नरवाई  जलाने के हानि बता रहे हैं, गांवों में भी कई बार मुनादी कराकर पंफलेट बांट चुके है, इसके बाद भी किसान एेसा कर रहे हैं। अब फिर से अभियान चलाएंगे।

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