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धान की खेती की प्रक्रिया:उपचारित किए बिना खेतों में न डालें धान का बिचड़ा,खेती में उपचारित बीज प्रयोग करने पर दिया बल

मानपुर25 दिन पहले
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रबी की फसल कटने के बाद मई-जून महीनों से ही किसान धान की खेती में जुट जाते हैं। प्रखण्ड के प्रगतिशील किसान सम्भवतः 5 जून से खरीफ फसल मुख्यतः धान की खेती की प्रक्रिया प्रारम्भ करेंगे। इस परिस्थिति में प्रखण्ड स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ राजीव सिंह ने खेती में उपचारित बीज प्रयोग करने की बात कही। उनके मुताबिक बिना उपचार किए नर्सरी में धान का बिचड़ा लगाने से किसानों को काफी नुकसान

उठाना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि इससे फसल को न केवल बीज जनित बीमारियों से होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है, बल्कि मृदा जनित बीमारियों से भी फसल की रक्षा होती है। साथ ही उत्पादन की मात्रा में बढ़ोत्तरी होती है। गौरतलब रहे कि बीजों को कवकनाशी रसायन से उपचारित किया जाता है, ताकि बीज जमीन के भीतर सुरक्षित रहे।

ऐसे करें बीज का उपचार
वैज्ञानिक प्रधान ने बताया कि बिचड़े बुआई के पहले बीजों का उपचार करने के लिए खारे पानी का प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि पानी खारा करने के लिए एक लीटर पानी में 20 ग्राम नमक का इस्तेमाल करें। घोल तैयार होने के बाद बिचड़े को उसमें डाल कर अच्छी तरह से हिलाएं, ताकि हल्के व बीमार बीज खारे पानी के ऊपरी सतह पर तैरने लगे।

तैरते बीज को निथार कर अलग कर दें फिर फफून्दीनाशक, कीटनाशक व जीवाणु कल्चर (बाविस्टीन, कैप्टान अथवा थीरम की 1-2 ग्राम प्रति कि ग्रा या फिर ट्राईकोडर्मा 10 ग्राम प्रति कि ग्रा के साथ पीएसबी कल्चर 6 ग्राम और एजेटोबैक्टर कल्चर 6 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) के हिसाब से उपचारित कर नमी युक्त जूट बैग के ऊपर फैला देना चाहिए।

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